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ममता बोलीं 'अघोषित आपातकाल', राजनाथ का आरोप: युवाओं को मोहरा बना रहा विपक्ष

राष्ट्रीय ध्वज लेकर निकले अभिजीत दिपके की हिरासत की शुक्रवार को विपक्षी नेताओं ने एक सुर में निंदा की। लखनऊ में रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए कर रहे हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फ़ाइल फ़ोटो)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Parthsanyal / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. ममता बनर्जी ने दिपके की हिरासत को "अघोषित आपातकाल से कम नहीं" बताया।
  2. राजनाथ सिंह ने कहा कि युवाओं को "अराजकता की राजनीति का मोहरा" बनाया जा रहा है।
  3. आप ने अपना तिरंगा मार्च निकाला और कहा कि प्रदर्शन सीईसी के इस्तीफे तक जारी रहेगा।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की हिरासत को शुक्रवार शाम विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बना दिया। उनका आरोप था कि केंद्र राष्ट्रीय ध्वज को खतरे की तरह देख रहा है। भाजपा ने लखनऊ से जवाब दिया, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं का इस्तेमाल टकराव भड़काने के लिए कर रहे हैं।

दिपके को शाम 5 बजे से कुछ पहले कनॉट प्लेस जाते समय हिरासत में लिया गया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में लोगों से वहां जुटकर तिरंगा लहराने को कहा था।

“जरा सोचिए”

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सबसे तीखा हमला किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “अभिजीत दिपके को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज थामने के लिए हिरासत में लिया गया है। जरा इस बात पर सोचिए।” उन्होंने इसे “अघोषित आपातकाल से कम नहीं” बताया। उन्होंने कहा कि असहमति से डरने वाली सरकार “अब पूरी एक पीढ़ी को डराकर चुप कराने की कोशिश कर रही है”। प्रदर्शनकारियों के लिए उनका संदेश था, “आपकी दीदी आपके साथ मजबूती से खड़ी है।”

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लिखा, “यह सीधी-सीधी तानाशाही के सिवा कुछ नहीं है।” उन्होंने पूछा, “क्या तिरंगा फहराना अपराध है?” समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे रंगों की लड़ाई बताया। उन्होंने लिखा, “आज ‘एकरंगा’ बनाम ‘तिरंगा’ का दिन है।”

एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने कहा कि दिपके को “दिल्ली पुलिस ने अगवा कर लिया” है और “#NewIndia में शांतिपूर्ण विरोध अपराध है”।

आप ने पंडित रविशंकर शुक्ल लेन पर अपने मुख्यालय के पास अलग से तिरंगा मार्च निकाला, जिसमें कार्यकर्ताओं ने “भारत माता की जय” के नारे लगाए। आप नेता गोपाल राय ने कहा, “जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और एसआईआर वापस नहीं लिया जाता, विरोध जारी रहेगा।”

राजनाथ: “अराजकता की राजनीति”

लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष “युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राजनीतिक टकराव भड़काने और अराजकता फैलाने” के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा, “देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है।” उन्होंने कांग्रेस पर बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन चाहने का आरोप लगाया और कहा कि लोकतंत्र अव्यवस्था या संवैधानिक संस्थाओं पर हमले की इजाजत नहीं देता।

उत्तर प्रदेश में विपक्ष ने कुछ ही घंटों में पलटवार किया। प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि भाजपा एक व्यक्ति का बचाव क्यों कर रही है।” उन्होंने कहा कि कुमार से इस्तीफा लिया जाना चाहिए था और उन पर महाभियोग चलना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए कुमार ने “13 करोड़ से ज्यादा नागरिकों के मताधिकार छीन लिए हैं”।

सपा सांसद इकरा हसन ने कहा, “देखिए, देश को लूट रही है और देश में आग लगा रही है तो वह भाजपा है।” उन्होंने भी कुमार के इस्तीफे की मांग की।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के मंत्री दिलीप घोष ने सीजेपी पर अपने प्रदर्शनों से नवरात्रि और दुर्गा पूजा के उत्सवों में खलल डालने का आरोप लगाया।

सरकार का पक्ष

शुक्रवार को विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में छात्रों के प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमारी संस्थाएं और एजेंसियां इस पर नजर रख रही हैं, और वे वही कर रही हैं जो उन्हें करना है।”

यह जुबानी जंग ऐसे हफ्ते के बाद हुई है जिसमें भाजपा ने प्रदर्शन के समर्थकों पर बांग्लादेश से प्रेरणा लेने का आरोप लगाया, और राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने कहा कि तिरंगा थामना अपराध नहीं हो सकता। दिपके ने उन समर्थकों से, जो दिल्ली नहीं पहुंच सकते, अपने-अपने शहरों में तिरंगा मार्च निकालने को कहा था।