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जेल भेजे गए सीजेपी नेताओं के साथ खड़ा हुआ विपक्ष, राहुल गांधी बोले: 'तिरंगा लहराना अपराध नहीं'
जंतर-मंतर में राष्ट्रीय ध्वज लेकर घुसने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन के लिए तिहाड़ भेजा गया। कांग्रेस, टीएमसी, आप, डीएमके और वाम दलों के नेता उनके समर्थन में एकजुट हुए।

मुख्य बातें
- राहुल गांधी ने पहली बार कॉकरोच जनता पार्टी का खुलकर समर्थन किया और उसके नेताओं को जेल भेजने को कायरता बताया।
- ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, एम के स्टालिन, पिनराई विजयन और डी राजा ने गिरफ्तारियों पर सवाल उठाए।
- राहुल ने युवा प्रदर्शनकारियों से पुलिस ज्यादती के वीडियो और तस्वीरें संभालकर रखने को कहा।
विपक्ष के तमाम नेता बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जेल भेजे गए दो नेताओं के समर्थन में खड़े हो गए। महीनों से इस नए संगठन से दूरी बनाए रखने वाले राहुल गांधी ने भी पहली बार उसका खुलकर साथ दिया।
सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार सुबह एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। दोनों को मंगलवार तड़के जंतर-मंतर में घुसने के बाद हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने सप्ताहांत में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था। दोनों ने वहां तिरंगा लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने अतिक्रमण, निषेधाज्ञा तोड़ने, कुछ दिन पहले भरे गए शांति बॉन्ड के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया है।
“जंतर-मंतर देश की जनता का है”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने लिखा, “जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है।” उन्होंने आगे कहा, “जंतर-मंतर भारत की जनता का है। हम इसे वापस लेंगे।”
यह सुर में साफ बदलाव था। एक दिन पहले ही अपने घर के बाहर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा था, “कोई समानांतर प्रदर्शन नहीं है”, और कांग्रेस 10 अक्टूबर को सीजेपी के अपने मार्च से दूर रही थी। दास ने 2 अक्टूबर को ही कांग्रेस के इकोसिस्टम पर हमला बोला था।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस समर्थन का स्वागत किया। उन्होंने लिखा, “@AshutoshRanka और @SauravDassss की गैरकानूनी गिरफ्तारी के खिलाफ बोलने के लिए धन्यवाद, नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhisir।”
विपक्ष का बड़ा मोर्चा
प्रतिक्रिया कांग्रेस तक सीमित नहीं रही। आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने पूछा, “क्या अपने ही देश में अपना ही झंडा लहराना अपराध है?” तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गिरफ्तारियों को एक पूरी पीढ़ी को डराने और चुप कराने की कोशिश बताया। डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा कि युवाओं को हिरासत में लेने से वे चुप नहीं होंगे, उलटे और नागरिक सड़कों पर उतरेंगे। अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा न रही उनकी पार्टी ने सीजेपी को कानूनी मदद की पेशकश की। केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी आवाज उठाई, और सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा कि कुछ ही दिन पहले तक तय प्रदर्शन स्थल रही जगह पर “अतिक्रमण” के लिए दोनों को जेल भेजना उत्पीड़न है।
इन नेताओं ने सरकार पर असहमति को अपराध बनाने का आरोप लगाया।
छात्रों से मिले राहुल
बुधवार को बाद में राहुल उन छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों से मिले, जिनका कहना है कि सप्ताहांत के प्रदर्शनों के बाद पुलिस हिरासत में उन्हें पीटा गया। कुछ ने बताया कि उन्हें लात मारी गई, गला दबाया गया और उनके फोन ले लिए गए। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने कहा कि उसकी एक कान की सुनने की क्षमता चली गई।
राहुल ने कहा, “इन युवाओं की एक ही आवाज है, और वह भारत की आवाज है। इसके खिलाफ कोई खड़ा नहीं हो सकता।” उन्होंने हर घटना का रिकॉर्ड रखने को कहा। “वीडियो या तस्वीरें बेहद जरूरी होंगी,” उन्होंने कहा, और चेतावनी दी कि “वह दिन करीब आ रहा है जब हमारे लोकतंत्र की आवाज दबाने वालों को सख्त न्याय का सामना करना पड़ेगा”। जवाबदेही तय होने वालों में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त का नाम लिया। “शांतिपूर्ण प्रदर्शन आपका अधिकार है। हम इसे किसी को छीनने नहीं देंगे,” उन्होंने कहा।
सप्ताहांत की हिरासतों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) गुरुवार को सुनवाई करने वाला है।