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कनॉट प्लेस में सीजेपी का तिरंगा प्रदर्शन पुलिस ने रोका, दिपके और नेहा बोरा हिरासत में

शुक्रवार शाम मध्य दिल्ली में करीब 150 लोग हिरासत में लिए गए। सेंट्रल पार्क पुलिस की मानव श्रृंखला के पीछे बंद रहा, और तिरंगा लिए छोटे-छोटे जत्थे इनर सर्किल में घूमे, जिन्हें पुलिस ने तितर-बितर कर दिया।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
कनॉट प्लेस, नई दिल्ली (फ़ाइल फ़ोटो)
कनॉट प्लेस, नई दिल्ली (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Dgp4004 / Wikimedia Commons, CC0

मुख्य बातें

  1. सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके को पुलिस ने शाम 5 बजे के प्रदर्शन से कुछ मिनट पहले हिरासत में लिया।
  2. आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को मंडी हाउस पर तब रोका गया जब छात्र तिरंगा मार्च शुरू कर रहे थे।
  3. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक मध्य दिल्ली में करीब 150 लोग हिरासत में लिए गए।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम 5 बजे से कुछ मिनट पहले हिरासत में ले लिया, जब वे अपने बुलाए “लहरा दो तिरंगा” प्रदर्शन की अगुवाई के लिए कनॉट प्लेस निकल रहे थे। शाम तक मध्य दिल्ली में करीब 150 लोग हिरासत में थे, और सेंट्रल पार्क के लॉन, जहां तिरंगे के साथ जुटान होनी थी, पुलिस की कतार के पीछे सूने पड़े रहे।

आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को मंडी हाउस पर हिरासत में लिया गया, जब छात्र और वाम दलों के कार्यकर्ता वहां से तिरंगा मार्च शुरू कर रहे थे। आइसा ने कहा कि उन्हें “किसी अज्ञात जगह” ले जाया गया है।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “जो लोग कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है।” उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब 150 बताई। बाद में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने दिपके और बोरा को हिरासत में लिया है। हालात पूरी तरह शांत हैं।”

पहले नोटिस, फिर पुलिस वैन

दिन में 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी झंडेवालान में उस जगह पहुंचे जहां दिपके ठहरे थे, और उन्हें कनॉट प्लेस में किसी भी प्रदर्शन से रोकने वाला नोटिस थमाया। नोटिस में कहा गया कि वहां भीड़ जुटने से “आपात पहुंच में बाधा” आ सकती है और 15 लाख से ज्यादा व्यापारियों और कर्मचारियों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला दिया गया। दूसरे नोटिस में उन्हें हवाई अड्डे की एक पुरानी घटना के बाद दिए गए उस अदालती निर्देश की याद दिलाई गई, जिसमें एक साल तक शांति बनाए रखने को कहा गया था।

एक लाइव वीडियो में दिपके ने अफसरों से कहा कि पार्टी ने प्रदर्शन की बात नहीं कही है। उन्होंने कहा, “हम बस तिरंगा लहराएंगे।” जब वे निकलने लगे तो एक अफसर ने कहा, “आप नई दिल्ली नहीं जा सकते। हम आपको डिटेन कर रहे हैं।” दिपके ने पूछा, “मैंने कौन सा कानून तोड़ा है?” उन्हें जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया।

मानव श्रृंखला के पीछे सेंट्रल पार्क

नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) ने “प्रशासनिक कारणों” का हवाला देकर सेंट्रल पार्क शुक्रवार और शनिवार के लिए बंद कर दिया था। पुलिस ने पार्क की रेलिंग के साथ मानव श्रृंखला बनाई। अंदर रैपिड एक्शन फोर्स के जवान थे और बाहर आंसू गैस वाहन और एक वज्र वाहन खड़ा था। इलाके में और आसपास दिल्ली पुलिस के 6,000 से ज्यादा जवान तैनात थे, और दोपहर 3 बजे से मध्य दिल्ली की 20 से ज्यादा सड़कों पर यातायात पाबंदियां रहीं। कनॉट प्लेस के आसपास इंटरनेट धीमा हो गया।

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने कहा, “नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है। इसलिए हम सभी से कानून का पालन करने की अपील करते हैं।” पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार इंतजाम का जायजा लेने संसद मार्ग थाने में डीसीपी दफ्तर पहुंचे।

इसके बावजूद तिरंगे निकले। सैकड़ों सीजेपी समर्थक और छात्र “जय हिंद” के नारे लगाते हुए इनर सर्किल में घूमे, पुलिस के आने पर बिखरे, फिर जुटे और राष्ट्रगान गाया। पुलिस के उन्हें हटाने की कोशिश में हल्की धक्का-मुक्की हुई। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 6 के पास एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया।

भाकपा सांसद पी संदोष कुमार एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएसएफ और एआईवाईएफ के कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। उन्होंने कहा, “आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होगा। हम ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित करेंगे।”

दिल्ली से बाहर

बेंगलुरु पुलिस ने टाउन हॉल से मार्च की अनुमति नहीं दी। पुलिस ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक फ्रीडम पार्क ही शहर में प्रदर्शन की इकलौती जगह है। मुंबई में सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया तिरंगा मार्च में शामिल हुईं। उन्होंने कहा, “हम अपने देश का तिरंगा लहराएंगे, और हमें कोई नहीं रोक सकता।”

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान बिक्री घटने की शिकायत करते रहे कनॉट प्लेस के व्यापारियों को वैसी ही शांत शाम मिली जैसी पुलिस चाहती थी। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कोषाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने कहा, “लोग यहां आने से डर रहे हैं।”

देर शाम तक पुलिस ने यह नहीं बताया था कि दिपके, बोरा और बाकी लोगों को रात में छोड़ा जाएगा या नहीं। सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका मंगलवार को जंतर-मंतर में घुसने के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।