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चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी छूट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

एडीआर का कहना है कि 2023 के कानून की धारा 16 मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को जीवन भर अदालतों की पहुंच से बाहर कर देती है। याचिका के मुताबिक यह प्रावधान देर से जोड़ा गया और बिना बहस पारित हुआ।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
सुप्रीम कोर्ट की इमारत
सुप्रीम कोर्ट की इमारतPhoto: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।
  2. धारा 16 आधिकारिक कामकाज को लेकर मौजूदा और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के खिलाफ दीवानी या आपराधिक मामलों की सुनवाई पर रोक लगाती है।
  3. मामले को इसी सवाल पर लोक प्रहरी की लंबित याचिका के साथ जोड़ा गया है।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने मंगलवार को केंद्र और चुनाव आयोग से उस कानूनी कवच को दी गई चुनौती पर जवाब मांगा, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को पद छोड़ने के बाद भी मुकदमों से बचाता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की याचिका पर नोटिस जारी किया। एडीआर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बहस की। अदालत ने इसे इसी सवाल को उठाने वाली लोक प्रहरी की लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया।

कानून क्या कहता है

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 कहती है कि “कोई भी अदालत किसी भी दीवानी या आपराधिक कार्यवाही पर विचार नहीं करेगी या उसे जारी नहीं रखेगी”, अगर वह किसी मौजूदा या पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त के खिलाफ आधिकारिक कर्तव्य के दौरान किए गए या किए जाने का दावा किए गए किसी काम को लेकर हो।

एडीआर का कहना है कि यह सुरक्षा आजीवन और व्यापक है, और आयुक्तों को स्वतंत्र रखने के घोषित मकसद से इसका कोई तार्किक संबंध नहीं है। याचिका के मुताबिक राष्ट्रपति, राज्यपाल या जज समेत किसी भी दूसरे संवैधानिक पदाधिकारी को पद छोड़ने के बाद ऐसी छूट नहीं मिलती। उसकी दलील है कि यह प्रावधान अनुच्छेद 14 और 21 और संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है।

यह कानून कैसे बना

यह प्रावधान मूल विधेयक में नहीं था। एडीआर का कहना है कि इसे 11 दिसंबर 2023 को जारी एक आधिकारिक संशोधन के जरिए जोड़ा गया, और राज्यसभा ने इसे बिना बहस के उस समय पारित किया जब विपक्ष के कई सांसद निलंबित थे। याचिका में यह भी कहा गया है कि 1950 से 2023 तक आयुक्तों को ऐसे किसी कवच के बिना ही संवैधानिक स्वतंत्रता मिली हुई थी।

एडीआर चाहता है कि धारा 16 रद्द की जाए और मौजूदा या पूर्व आयुक्तों के खिलाफ जो कार्यवाहियां इसकी वजह से खत्म हुईं, उन्हें फिर से शुरू किया जाए।

यह नोटिस ऐसे समय आया है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार दिल्ली और दूसरे शहरों में प्रदर्शनों और विपक्ष की ओर से उन्हें हटाने की मांग का सामना कर रहे हैं। अगली सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं हुई है।