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नए फ़ॉर्म 6 पर अब तक कोई फ़ैसला नहीं दिया, जांच करेंगे: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा कि बिहार एसआईआर का फ़ैसला आने तक नया फ़ॉर्म था ही नहीं। कोर्ट ने उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने दोनों साथी आयुक्तों के बिना फ़ैसले लिए।

मुख्य बातें
- कोर्ट ने कहा कि मई 2026 के बिहार एसआईआर फ़ैसले में नए फ़ॉर्म 6 की जांच नहीं हुई थी।
- चुनाव आयोग ने सितंबर में कहा था कि कोर्ट ने फ़ॉर्म 6 की घोषणा को सही ठहराया है।
- याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ दूसरे मामलों के साथ 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उसने मतदाता पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग के नए फ़ॉर्म 6 को न मंज़ूरी दी है, न ख़ारिज किया है, क्योंकि मई में जब उसने बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मामला तय किया, तब यह फ़ॉर्म मौजूद ही नहीं था।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, “नए फ़ॉर्म 6 पर कोई न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। हमने बस इतना ही कहा है।” उन्होंने कहा, “हम इसकी जांच करेंगे।”
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने प्रिया मिश्रा और मध्य प्रदेश के पूर्व विधि मंत्री पी.सी. शर्मा की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस पर 27 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दूसरी याचिकाओं के साथ सुनवाई होगी।
फ़ॉर्म क्यों अहम है
फ़ॉर्म 6 के साथ जुड़ी नई घोषणा में नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने वालों से पूछा जाता है कि क्या पिछले एसआईआर में उनकी या उनके माता-पिता की मैपिंग हुई थी। पहले के राज्य पुनरीक्षणों में इस्तेमाल हुए फ़ॉर्म में यह सवाल नहीं था। 26 सितंबर की एक प्रेस विज्ञप्ति में चुनाव आयोग ने संकेत दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने बिहार फ़ैसले में इस घोषणा को सही ठहराया है।
ख़बरों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी कि जब तक केंद्र सरकार मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन न करे, यह बदलाव नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता इन्हीं आपत्तियों का सहारा ले रहे हैं।
याचिका में क्या है
याचिका का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने करीब 10 महीनों में लगभग 14 फ़ैसले बाकी दो आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। इसमें इन फ़ैसलों को रद्द करने, बैठकों के ब्योरे, एजेंडा और असहमति नोट मंगाने, और आयोग को सामूहिक रूप से इन फ़ैसलों पर दोबारा विचार करने का निर्देश देने की मांग है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि कोर्ट 5 अक्टूबर को ही साफ़ कर चुका है कि उसने फ़ॉर्म 6 को मंज़ूरी नहीं दी। मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें पीठ की बातों से शब्द उठाने को लेकर टोका। उन्होंने कहा, “इस तरह शब्द मत उठाइए।”