फैक्ट चेकचुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 पर 26 सितंबर का प्रेस नोट हटाया, यह दावा गलत
चुनाव आयोग ने 5 अक्टूबर को इस दावे को खारिज किया और नोट का लिंक साझा किया, और पीआईबी फैक्ट चेक ने इसे फर्जी बताया। लोकवॉक्स ने अभी तक खुद यह पेज नहीं खोला है।
दावा
सुप्रीम कोर्ट के यह कहने के बाद कि उसने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी, चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 पर अपना 26 सितंबर 2026 का प्रेस नोट अपनी वेबसाइट से हटा दिया।
दावा किसका: आशुतोष रांका, कॉकरोच जनता पार्टी
कहां दिखा: एक्स, फिर राजनीतिक हैंडल्स ने शेयर किया, पहली बार 5 अक्टूबर 2026
निष्कर्ष: गलत
- सही
- ज़्यादातर सही
- भ्रामक
- गलत
हमने क्या पाया
उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा गलत है। पीटीआई के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग ने उन दावों को खारिज कर दिया कि उसने अपना 26 सितंबर का प्रेस नोट वेबसाइट से हटा लिया है, और यह दिखाने के लिए नोट का लिंक साझा किया कि वह अब भी उपलब्ध है। पीआईबी फैक्ट चेक ने दावे को फर्जी बताया और नोट का आधिकारिक चुनाव आयोग लिंक साझा किया।
लोकवॉक्स खुद पेज जांचने के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट नहीं खोल सका, इसलिए यह निष्कर्ष आयोग के जवाब और पीआईबी की जांच पर टिका है, जैसा समाचार एजेंसियों ने बताया। डेस्क के सीधे पेज की पुष्टि करने के बाद इसे अपडेट किया जाएगा। दावा इस बारे में है कि कोई दस्तावेज़ ऑनलाइन मौजूद है या नहीं, जिसे कोई भी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर प्रेस नोट संख्या 120 खोलकर जांच सकता है।
यह निष्कर्ष सिर्फ नोट हटाने के दावे पर है। फॉर्म 6 में बदलावों को किसने मंज़ूरी दी, इस अलग विवाद पर यह कुछ नहीं कहता, जो सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) के सामने है।
फॉर्म 6 प्रेस नोट विवाद
- 26 सितंबर 2026पूर्ण आयोग की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस नोट संख्या 120 जारी किया
- 5 अक्टूबर 2026सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि उसने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी
- 5 अक्टूबर 2026अदालत की टिप्पणी के बाद आशुतोष रांका ने पोस्ट किया कि नोट हटा दिया गया
- 5 अक्टूबर 2026चुनाव आयोग और पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि नोट अब भी ऑनलाइन है
सबूत
पोस्ट में क्या कहा गया
द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका ने एक्स पर पोस्ट किया कि अदालत की टिप्पणी चुनाव आयोग के 26 सितंबर के बयान के उलट है और प्रेस नोट बाद में हटा दिया गया। यह पोस्ट 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद आई।
चुनाव आयोग का कहना है कि नोट कभी नहीं हटाया गया
पीटीआई ने 5 अक्टूबर को बताया कि “चुनाव आयोग ने उन दावों को खारिज किया कि उसने 26 सितंबर का प्रेस नोट अपनी वेबसाइट से वापस ले लिया है” और “यह दिखाने के लिए प्रेस नोट का लिंक साझा किया कि बयान अब भी उपलब्ध है”। डेली जागरण के अनुसार, एक्स पर अपनी पोस्ट में आयोग ने 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट संख्या 120 का बिंदु 1(iii) उद्धृत किया: “एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ लगी घोषणा को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है।”
स्रोत:पीटीआई (द प्रिंट के ज़रिए), 5 अक्टूबर 2026डेली जागरण, 5 अक्टूबर 2026
पीआईबी फैक्ट चेक ने चालू लिंक साझा किया
आईएएनएस और द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, पीआईबी फैक्ट चेक ने फर्जी खबर का अलर्ट जारी कर कहा कि चुनाव आयोग ने नोट नहीं हटाया है, और नोट का आधिकारिक लिंक साझा किया। उसने सलाह दी: “बिना पुष्टि वाले वीडियो या दावे शेयर न करें।”
स्रोत:आईएएनएस (द हॉक के ज़रिए), 5 अक्टूबर 2026द इकोनॉमिक टाइम्स (inkl के ज़रिए), 5 अक्टूबर 2026
यह दावा क्यों फैला
यह पोस्ट मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ की इस टिप्पणी के बाद आई: “फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को हमने मंज़ूरी नहीं दी है।” डेली जागरण के अनुसार, उसी दिन राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर फॉर्म 6 बदलने का आरोप लगाया, और चुनाव आयोग ने उनकी पोस्ट को भ्रामक बताया। पीटीआई के अनुसार, आयोग इससे पहले उन राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से एसआईआर की अतिरिक्त घोषणा हटा चुका था जहां पुनरीक्षण पूरा हो गया था।
स्रोत:डेली जागरण, 5 अक्टूबर 2026पीटीआई (बिज़नेस स्टैंडर्ड के ज़रिए), 30 सितंबर 2026