LokVox

फैक्ट चेकयूपीआई

₹2,000 से ऊपर यूपीआई शुल्क पर जयराम रमेश का दावा ज़्यादातर सही

कानून बदला गया और सिर्फ ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतानों को कानूनी सुरक्षा बची। इससे ऊपर 15 अक्टूबर से मर्चेंट शुल्क शुरू होगा, पर यूज़र से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

दावा

सरकार "यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर शुल्क का दरवाज़ा खोल रही है", और संशोधित भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत एक नई अधिसूचना ने ₹2,000 से ऊपर के लेनदेन पर शुल्क के खिलाफ एक सुरक्षा हटा दी।

दावा किसका: जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी)
कहां दिखा: मीडिया को दिया बयान, यूएनआई की रिपोर्ट; कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल, पहली बार 15 सितंबर 2026

निष्कर्ष: ज़्यादातर सही

  1. सही
  2. ज़्यादातर सही
  3. भ्रामक
  4. गलत

हमने क्या पाया

जयराम रमेश का दावा ज़्यादातर सही है। संसद ने अगस्त 2026 में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन किया, ताकि केंद्र अधिसूचना के ज़रिए तय करे कि कौन से भुगतान शुल्क से सुरक्षित रहें। 14 सितंबर की अधिसूचना ने सिर्फ ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतानों और रुपे डेबिट कार्ड भुगतानों को सुरक्षा दी। अगले दिन एनपीसीआई ने 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतानों पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) तय किया।

दावे में यह बात छूट जाती है कि शुल्क कौन चुकाएगा। शुल्क मर्चेंट पर पड़ता है, व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांसफर किसी भी रकम पर मुफ्त रहते हैं, और एनपीसीआई के एफएक्यू के तहत मर्चेंट यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाल सकते।

यूपीआई शुल्क फिर कैसे चर्चा में आया

  1. 4 अगस्त 2026कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश
  2. 6 अगस्त 2026लोकसभा ने विधेयक पारित किया
  3. 10 अगस्त 2026राज्यसभा ने विधेयक पारित किया
  4. 14 सितंबर 2026वित्त मंत्रालय ने ₹2,000 तक के यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड को शुल्क-मुक्त माध्यम के रूप में अधिसूचित किया
  5. 15 सितंबर 2026एनपीसीआई ने ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतानों पर 0.4% एमडीआर की घोषणा की
  6. 15 अक्टूबर 2026एमडीआर लागू होने की तारीख

सबूत

रमेश ने क्या कहा

15 सितंबर 2026 को यूएनआई ने बताया कि कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) रमेश ने सरकार पर “यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर शुल्क का दरवाज़ा खोलने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नई अधिसूचना ने ₹2,000 से ऊपर के लेनदेन पर शुल्क के खिलाफ एक सुरक्षा हटा दी है, और इससे 6 अगस्त को दी गई उनकी चेतावनी सही साबित हुई।

स्रोत:यूएनआई, 15 सितंबर 2026

कानून अब केंद्र को सुरक्षित भुगतान चुनने देता है

पीआरएस के रिकॉर्ड के अनुसार, कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 4 अगस्त को पेश हुआ, 6 अगस्त को लोकसभा से और 10 अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ, और यह भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है। लाइवलॉ के अनुसार, धारा 10A पहले आयकर अधिनियम की धारा 269SU के तहत निर्धारित माध्यमों से होने वाले भुगतानों पर शुल्क लगाने से रोकती थी। संशोधन ने इस जुड़ाव की जगह ऐसे माध्यम रखे “जो केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे”। विधेयक ने खुद कोई शुल्क नहीं लगाया।

स्रोत:पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्चलाइवलॉ, 11 अगस्त 2026

सिर्फ ₹2,000 तक के भुगतानों को सुरक्षा बची

लाइवलॉ ने बताया कि वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर 2026 को अधिसूचना S.O. 5067(E) जारी की, जिसमें रुपे डेबिट कार्ड और ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतान शामिल हैं। उसने अधिसूचना को उद्धृत किया: “कोई भी बैंक या सिस्टम प्रदाता किसी व्यक्ति पर, चाहे प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से, कोई शुल्क नहीं लगाएगा”। न्यूज़ ऑन एयर के अनुसार, यह रोक भुगतान करने वाले और भुगतान पाने वाले, दोनों पर लागू है।

स्रोत:लाइवलॉ, 15 सितंबर 2026न्यूज़ ऑन एयर, 15 सितंबर 2026

15 अक्टूबर से मर्चेंट शुल्क शुरू

डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार, एनपीसीआई के नेतृत्व वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ऊपर के व्यक्ति से मर्चेंट भुगतानों पर 0.4% एमडीआर तय किया, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन पर ₹5 का एकमुश्त शुल्क है। महीने में ₹1 लाख तक पाने वाले छोटे मर्चेंट पर एमडीआर शून्य रहेगा, और पी2पी (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांसफर मुफ्त रहेंगे। एनपीसीआई के एफएक्यू के एससीसी ऑनलाइन के सारांश के अनुसार, मर्चेंट को “एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी”।

स्रोत:डेक्कन क्रॉनिकल, 15 सितंबर 2026एससीसी ऑनलाइन, 16 सितंबर 2026

यह दावा क्यों फैला

यूएनआई के अनुसार, रमेश ने यह मुद्दा तब उठाया था जब विधेयक संसद में था, और बाद में अपनी चेतावनी की तारीख 6 अगस्त बताई। बिज़नेस टुडे के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि यह संशोधन शायद भारत की शून्य-शुल्क यूपीआई और रुपे व्यवस्था पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की आलोचना से प्रेरित था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त को सार्वजनिक रूप से जवाब दिया। डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार, यूपीआई मर्चेंट भुगतानों पर जनवरी 2020 से एमडीआर शून्य रहा है, इसलिए सितंबर का ढांचा तब के बाद पहली बार कुछ यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट शुल्क वापस लाता है।

स्रोत:यूएनआई, 15 सितंबर 2026बिज़नेस टुडे, 6 अगस्त 2026

मूल दस्तावेज़