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फैक्ट चेकयूपीआई

सीतारमण का यह दावा ज़्यादातर सही कि यूपीआई एमडीआर सिर्फ मर्चेंट पर लगता है

एनपीसीआई का ढांचा नया शुल्क मर्चेंट पर डालता है और व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांसफर मुफ्त रखता है। पर ₹2,000 से ऊपर यह सुरक्षा कानून पर नहीं, एनपीसीआई के नियमों पर टिकी है।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

दावा

"मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) सिर्फ मर्चेंट पर लागू होता है, अंतिम उपयोगकर्ताओं/ग्राहकों पर नहीं।" यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहेगा।

दावा किसका: निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री
कहां दिखा: जयराम रमेश को सार्वजनिक जवाब, बिज़नेस टुडे की रिपोर्ट; राज्यसभा में दोहराया, पहली बार 6 अगस्त 2026

निष्कर्ष: ज़्यादातर सही

  1. सही
  2. ज़्यादातर सही
  3. भ्रामक
  4. गलत

हमने क्या पाया

निर्मला सीतारमण का दावा ज़्यादातर सही है। एनपीसीआई ने 15 सितंबर को जो ढांचा घोषित किया, उसके तहत ₹2,000 से ऊपर के यूपीआई भुगतानों पर नया 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) मर्चेंट चुकाते हैं, व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांसफर मुफ्त रहते हैं, और मर्चेंट यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाल सकते।

दो शर्तें लागू होती हैं। यूज़र से शुल्क लेने पर कानूनी रोक अब सिर्फ ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतानों पर है, इसलिए उससे ऊपर उपभोक्ता की सुरक्षा एनपीसीआई के नियमों पर टिकी है। और बड़े मर्चेंट जो लागत उठाते हैं, वह कीमतों के ज़रिए फिर भी खरीदारों तक पहुंच सकती है।

वित्त मंत्री का आश्वासन और उसके बाद

  1. 6 अगस्त 2026सीतारमण का जयराम रमेश को जवाब: एमडीआर सिर्फ मर्चेंट पर लागू होता है
  2. 8 अगस्त 2026वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया कि यूपीआई नागरिकों के लिए मुफ्त रहेगा
  3. 10 अगस्त 2026वित्त मंत्री के आश्वासन के बाद राज्यसभा ने विधेयक पारित किया
  4. 14 सितंबर 2026₹2,000 तक के यूपीआई भुगतानों के लिए शुल्क-मुक्त सुरक्षा अधिसूचित
  5. 15 सितंबर 2026एनपीसीआई ने 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर 0.4% मर्चेंट एमडीआर तय किया

सबूत

सीतारमण ने क्या कहा

6 अगस्त 2026 को जयराम रमेश को जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा: “मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) सिर्फ मर्चेंट पर लागू होता है, अंतिम उपयोगकर्ताओं/ग्राहकों पर नहीं।” बिज़नेस टुडे के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि एनपीसीआई के नेतृत्व वाली संचालन समिति ने अभी एमडीआर पर फैसला नहीं किया है। मनीलाइफ के अनुसार, उन्होंने राज्यसभा को आश्वासन दिया कि यह कानून यूपीआई इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाता।

स्रोत:बिज़नेस टुडे, 6 अगस्त 2026मनीलाइफ

एनपीसीआई का ढांचा शुल्क मर्चेंट पर डालता है

एएनआई ने एनपीसीआई के हवाले से बताया कि “उपभोक्ता यूपीआई से बिना किसी शुल्क के लेनदेन करते रहेंगे”। ₹300 की अधिकतम सीमा वाला 0.4% शुल्क 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ऊपर के व्यक्ति से मर्चेंट भुगतानों पर लागू होता है, और पी2पी ट्रांसफर इसके दायरे से बाहर हैं। एनपीसीआई के एफएक्यू के एससीसी ऑनलाइन के सारांश के अनुसार, मर्चेंट को “एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी”, और यूपीआई ऐप प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं जोड़ सकते।

स्रोत:एएनआई (खलीज टाइम्स के ज़रिए), 16 सितंबर 2026एससीसी ऑनलाइन, 16 सितंबर 2026

यूज़र से शुल्क पर कानूनी रोक ₹2,000 पर रुक जाती है

लाइवलॉ के अनुसार, 14 सितंबर की अधिसूचना (S.O. 5067(E)) बैंकों और सिस्टम प्रदाताओं को ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतानों और रुपे डेबिट कार्ड पर कोई भी शुल्क, “चाहे प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से”, लगाने से रोकती है। ₹2,000 से ऊपर के भुगतान इस सूची में नहीं हैं, इसलिए वहां यूज़र से शुल्क पर रोक अधिसूचना से नहीं, एनपीसीआई के ढांचे से आती है।

स्रोत:लाइवलॉ, 15 सितंबर 2026

लागत फिर भी कीमतों में आ सकती है

डेक्कन क्रॉनिकल ने लिखा कि यह “देखना बाकी है” कि बड़े मर्चेंट यह लागत ऊंची खुदरा कीमतों के ज़रिए आगे बढ़ाएंगे या नहीं। सरचार्ज पर रोक इसे नहीं रोकती।

स्रोत:डेक्कन क्रॉनिकल, 15 सितंबर 2026

यह दावा क्यों फैला

बिज़नेस टुडे के अनुसार, यह बयान जयराम रमेश को सीधा सार्वजनिक जवाब था, जिसमें उन्हें और कांग्रेस को टैग किया गया था। दो दिन बाद वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई लेनदेन “नागरिकों के लिए पूरी तरह मुफ्त रहेंगे”, जो बिज़नेस टुडे के शब्दों में मंत्रालय की बात का सार है, और इन सुझावों को कि नीति “बाहरी प्रभावों” से चल रही है, “निराधार, पूरी तरह झूठा और भ्रामक” बताया। डेस्क के पास इस बारे में कोई स्रोत-आधारित आंकड़ा नहीं है कि मंत्री का बयान कितना व्यापक रूप से शेयर हुआ।

स्रोत:बिज़नेस टुडे, 8 अगस्त 2026

मूल दस्तावेज़