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'बहाने नहीं चलेंगे': सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से श्रृंगेरी मतगणना का गुम वीडियो पेश करने को कहा

आयोग ने कहा कि वह 2023 की वह रिकॉर्डिंग नहीं ढूंढ पा रहा, जो दोबारा गिनती से तय हुई कर्नाटक की एक सीट के मामले के केंद्र में है। अदालत ने प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने की चेतावनी दी।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
कर्नाटक के श्रृंगेरी का विद्याशंकर मंदिर
कर्नाटक के श्रृंगेरी का विद्याशंकर मंदिरCalvinkrishy / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. चुनाव आयोग ने अदालत से कहा कि वह 2023 की श्रृंगेरी मतगणना का वीडियो नहीं ढूंढ पा रहा।
  2. पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पेश न होने पर वह आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालेगी।
  3. कांग्रेस विधायक टी डी राजेगौड़ा उस दोबारा गिनती को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें भाजपा के डी एन जीवराज विजयी घोषित हुए।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग को फटकार लगाई, जिसने अदालत से कहा था कि कर्नाटक के श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र की 2023 की मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिल रही। अदालत ने आयोग से उसके पास मौजूद सारे रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया।

जस्टिस संजीव सचदेवा के साथ बैठे जस्टिस संजय कुमार ने पूछा, “भारत निर्वाचन आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड खो गया है? आपका पूरा काम चुनाव कराना है, और इसके लिए आपके पास दस्तावेज होना चाहिए।”

आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील शेषाद्रि नायडू ने कहा कि वह फुटेज का पता नहीं लगा पाया है। पीठ इससे संतुष्ट नहीं हुई। उसने कहा, “हम इस तरह के बेतुके बहाने स्वीकार नहीं करेंगे। जो कुछ भी है, अगली सुनवाई तक पेश कीजिए। वरना हमें आपके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना होगा।”

एक सीट जो हाथ बदल गई

यह मामला 2023 के कर्नाटक चुनाव के सबसे करीबी नतीजों में से एक का है। कांग्रेस नेता टी डी राजेगौड़ा ने श्रृंगेरी सीट 201 वोटों से जीती थी। उनके भाजपा प्रतिद्वंद्वी डी एन जीवराज ने चुनाव याचिका से नतीजे को चुनौती दी, और इस साल 6 अप्रैल को कर्नाटक हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती का आदेश दिया, जिसमें खारिज किए गए 279 मतपत्रों की फिर से जांच भी शामिल थी।

3 मई को निर्वाचन अधिकारी ने संशोधित नतीजा घोषित किया। राजेगौड़ा के वोट 255 घट गए और जीवराज को निर्वाचित घोषित किया गया। इसके बाद राजेगौड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जिसने मई में उन्हें अपील लंबित रहने तक विधायक बने रहने की अनुमति दी।

राजेगौड़ा क्या चाहते हैं

राजेगौड़ा की दलील है कि निर्वाचन अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश से आगे चला गया। उनका कहना है कि अदालत ने सिर्फ खारिज 279 डाक मतपत्रों की दोबारा जांच को कहा था, लेकिन उनके पक्ष में गए 562 वैध डाक मतपत्रों पर भी फिर से विचार किया गया। उनका यह भी कहना है कि दोबारा गिनती जरूरी ही नहीं थी, क्योंकि जीवराज के भ्रष्ट आचरण के आरोपों पर हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में निष्कर्ष दिया था।

अपने दावों को परखने के लिए उन्होंने पर्यवेक्षक की रिपोर्ट और मूल गिनती व दोबारा गिनती, दोनों की वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी है। यही वह सामग्री है जिसके बारे में आयोग अब कह रहा है कि वह नहीं मिल रही।

पीठ ने आयोग के वकील से पूछा, “आपके यह कहने का सवाल ही कहां है कि ‘हां, हम इसे ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं’?”

डाक मतपत्रों से कथित छेड़छाड़ को लेकर जीवराज पर एक अलग आपराधिक मामला भी है, जिस पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने मई में रोक लगा दी थी। अपील पर अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को होगी, और तब तक आयोग को सभी उपलब्ध रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने होंगे।