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बेलगावी में मतदाताओं के नाम कटवाने के मामले में भाजपा के रवि पाटिल के खिलाफ जांच पर हाईकोर्ट की रोक

पाटिल और उनके दो समर्थकों पर एसआईआर के दौरान 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम सूची से हटवाने की कोशिश का आरोप है। अदालत ने मिलते-जुलते मामलों में पहले के आदेश का हवाला दिया, अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को।

संपादकीय डेस्क से · बेंगलुरुप्रकाशित
कर्नाटक हाईकोर्ट, बेंगलुरु
कर्नाटक हाईकोर्ट, बेंगलुरुPhoto: Moheen Reeyad / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. हाईकोर्ट ने रवि पाटिल और दो समर्थकों के खिलाफ पुलिस जांच पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।
  2. एफआईआर में एसआईआर के दौरान बेलगावी उत्तर में 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश का आरोप है।
  3. मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।

कर्नाटक हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने मंगलवार को भाजपा नेता रवि पाटिल और उनके दो समर्थकों के खिलाफ पुलिस जांच पर रोक लगा दी। उन पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बेलगावी में 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश का आरोप है।

जस्टिस वेंकटेश नाइक टी ने कहा कि तथ्य उन मामलों से मिलते-जुलते हैं जिनमें अदालत की एक दूसरी पीठ पहले ही जांच रोक चुकी है। उन्होंने कहा, “उक्त आदेश और मौजूदा मामले के तथ्य व परिस्थितियां एक जैसी हैं,” और न्यायिक अनुशासन का हवाला देते हुए 29 अक्टूबर की अगली सुनवाई तक जांच पर रोक लगा दी। राज्य सरकार आदेश में बदलाव या उसे हटाने की मांग कर सकती है।

आरोप

बूथ लेवल एजेंट मीरासाब सनदी की शिकायत पर बेलगावी मार्केट थाने में दर्ज एफआईआर में पाटिल, दो समर्थकों और 20 से 25 अन्य लोगों पर बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने की साजिश का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने 198 मतदाताओं के खिलाफ फॉर्म 7, जिससे सूची से नाम हटाने की मांग की जाती है, भरे और साथ में ऐसे दस्तावेज लगाए जिन्हें झूठे तौर पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के जारी किए हुए बताया गया।

सनदी का आरोप है कि इन आवेदनों में उनका और उनके परिवार का नाम भी शामिल था।

बेलगावी में एक अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर पाटिल ने आरोपों से इनकार किया है। इस महीने की शुरुआत में स्थानीय अदालत से सशर्त अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्होंने कहा, “मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। मैंने किसी खास समुदाय के वोट हटाने की मांग नहीं की है।” उन्होंने आरोपों को “झूठा और मनगढ़ंत” बताया और कहा कि उन्होंने सिर्फ अधिकारियों से उन मतदाताओं की जांच करने को कहा था जिन्हें वे संदिग्ध मानते थे।

बड़ा विवाद

बेलगावी कर्नाटक के उन कई जिलों में है जहां एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म 7 आवेदनों को लेकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की हैं। बीदर, मैसूरु और बल्लारी में भी ऐसी शिकायतें आई हैं। 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट की एक दूसरी पीठ ने पाटिल और उनके समर्थकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी, और 9 अक्टूबर को एक समन्वय पीठ ने मिलते-जुलते मामलों में जांच रोक दी थी। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम अरुणा श्याम ने उसी आदेश का सहारा लिया।