आरबीआई और ब्याज दरें
रिज़र्व बैंक की नीतिगत दर, इसे कौन तय करता है, और अक्टूबर 2026 की बढ़ोतरी के बाद यह कहां है। 11 अक्टूबर 2026 को अपडेट।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) रेपो रेट तय करता है, यानी वह दर जिस पर वह बैंकों को कर्ज़ देता है, ताकि उपभोक्ता मूल्य महंगाई 4% के लक्ष्य के आसपास रहे। गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यों की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) साल में कम से कम चार बार वोट से इसका फैसला करती है।
अभी क्या स्थिति है
7 अक्टूबर 2026 को एमपीसी ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। फैसला सर्वसम्मत था। समिति ने अपना रुख भी तटस्थ से बदलकर “नपी-तुली सख्ती” (कैलिब्रेटेड टाइटनिंग) कर दिया, हालांकि दो सदस्य तटस्थ रुख बनाए रखने के पक्ष में थे, और कहा कि दरों में कटौती “निकट भविष्य में विचार से बाहर” है।
आरबीआई ने बढ़ती महंगाई, पश्चिम एशिया संघर्ष, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों, कमज़ोर मानसून और अल नीनो का हवाला दिया। उसका अनुमान है कि 2026-27 में सीपीआई महंगाई 5.2% और जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 7.1% रहेगी।
अप्रैल-जून में वास्तविक जीडीपी 7.8% बढ़ी, यानी आरबीआई ऐसे समय सख्ती कर रहा है जब वृद्धि अब भी मज़बूत है। फैसले के तीन दिन बाद, जब रुपया डॉलर के मुकाबले 97 के करीब था, आरबीआई ने तीन सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर देने के लिए एक विंडो खोली और मुद्रा हेजिंग के नियम सख्त किए।
अहम आंकड़े, अक्टूबर 2026
- 5.50%7 अक्टूबर 2026 से रेपो रेट
- 5.25% / 5.75%एसडीएफ दर / एमएसएफ दर और बैंक दर
- 4% (2-6%)सीपीआई महंगाई का लक्ष्य, अप्रैल 2026 से मार्च 2031
- 6.0%अनुमानित सीपीआई महंगाई, अक्टूबर-दिसंबर 2026
अहम तारीखें
- 8 फरवरी 2023एमपीसी ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.50% किया
- फरवरी-जून 2025कुल 100 बेसिस पॉइंट की तीन कटौतियों से दर 5.50% पर
- 5 दिसंबर 202525 बेसिस पॉइंट की कटौती, दर 5.25%
- 7 अक्टूबर 202625 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी, दर 5.50%; रुख नपी-तुली सख्ती पर
- 10 अक्टूबर 2026तेल कंपनियों के लिए डॉलर विंडो और हेजिंग के सख्त नियमों की घोषणा
- 21 अक्टूबर 2026अक्टूबर बैठक का ब्योरा (मिनट्स) आना है
- 2-4 दिसंबर 2026एमपीसी की अगली बैठक
मुख्य सवाल
रेपो रेट बढ़ने पर मेरे लोन की दर कितनी जल्दी बदलेगी? ज़्यादातर नए फ्लोटिंग रेट वाले खुदरा लोन रेपो रेट से जुड़े होते हैं और इनकी दर कम से कम हर तीन महीने में एक बार दोबारा तय करनी होती है, इसलिए बदलाव आमतौर पर एक तिमाही के भीतर दिख जाता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति में कौन-कौन है? गवर्नर संजय मल्होत्रा (अध्यक्ष), आरबीआई के दो अन्य सदस्य, और तीन बाहरी सदस्य: डॉ. नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य और प्रो. राम सिंह।
क्या ब्याज दरें फिर बढ़ सकती हैं? एमपीसी का कहना है कि सख्ती कितनी लंबी और कितनी ज़्यादा होगी, यह बुनियादी महंगाई, कीमतों की बढ़त कितनी व्यापक है और आपूर्ति के झटके के दूसरे दौर के असर पर निर्भर करेगा। निकट भविष्य में उसने कटौती से इनकार किया है।
आरबीआई का महंगाई लक्ष्य क्या है? 4% सीपीआई महंगाई, 2% से 6% की सीमा के साथ, जिसे मार्च 2026 में अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक के लिए बरकरार रखा गया।
पूरी कवरेज 17 खबरें
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आरबीआई ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया, फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी
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भारत की अर्थव्यवस्था का डैशबोर्ड: ताज़ा आंकड़े एक जगह
मूल दस्तावेज़
- Monetary Policy Statement, 2026-27: Resolution of the MPC, October 5 to 7, 2026Reserve Bank of India, 7 अक्टूबर 2026
- Monetary policy: overview and policy ratesReserve Bank of India, 11 अक्टूबर 2026
- RBI announces special window for Public Sector Oil Marketing CompaniesReserve Bank of India, 10 अक्टूबर 2026
- Minutes of the MPC Meeting, February 6-8, 2023Reserve Bank of India, 22 फरवरी 2023
- External Benchmark Based Lending (circular RBI/2019-20/53)Reserve Bank of India, 4 सितंबर 2019