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आरबीआई ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया, फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी
मौद्रिक नीति समिति ने 6-0 से बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया और रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया। समिति ने कहा कि निकट भविष्य में रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश नहीं है।

मुख्य बातें
- 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है।
- एमपीसी के सभी छह सदस्यों ने बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया, लेकिन इनमें से दो सदस्य रुख को कैलिब्रेटेड टाइटनिंग करने के बजाय न्यूट्रल रखना चाहते थे।
- आरबीआई का अनुमान है कि 2026-27 में सीपीआई महंगाई 5.2% रहेगी और अक्टूबर-दिसंबर में 6.0% के शिखर पर होगी, जबकि जीडीपी वृद्धि 7.1% रहेगी।
- बैठक का ब्योरा (मिनट्स) 21 अक्टूबर को आएगा और अगली नीति बैठक 2 से 4 दिसंबर 2026 को होगी।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 7 अक्टूबर 2026 को पॉलिसी रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है, जब मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने दर को 6.50% तक पहुंचाया था।
गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चली। समिति ने अपना नीतिगत रुख भी न्यूट्रल से बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” (नपी-तुली सख्ती) कर दिया। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी दर अब 5.25% है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर और बैंक रेट 5.75% हैं।
समिति ने कैसे वोट दिया
सभी छह सदस्यों ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया। सदस्य हैं गवर्नर मल्होत्रा, डॉ. पूनम गुप्ता, इंद्रनील भट्टाचार्य और तीन बाहरी सदस्य, डॉ. नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य और प्रो. राम सिंह।
रुख में बदलाव पर सहमति एकमत नहीं थी। प्रस्ताव में कहा गया है: “दो सदस्यों, डॉ. नागेश कुमार और प्रो. राम सिंह, की राय थी कि रुख न्यूट्रल ही रखा जाए।”
समिति ने कहा कि निकट भविष्य में दरों में कटौती “विचार में नहीं है”। यानी अगला कदम या तो एक और बढ़ोतरी होगा या दरों को जस का तस रखना।
आरबीआई ने यह कदम क्यों उठाया
प्रस्ताव के मुताबिक महंगाई और उसका परिदृश्य “पिछले साल की तरह नरम नहीं हैं”। खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन की वजह से हेडलाइन सीपीआई महंगाई जुलाई के 4.5% से बढ़कर अगस्त में 4.8% हो गई। कोर महंगाई बढ़कर 4.2% हो गई। भार के हिसाब से सीपीआई बास्केट के करीब 37% हिस्से में महंगाई 4% से ऊपर रही।
एमपीसी ने पश्चिम एशिया के संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और मज़बूत अल नीनो स्थितियों की ओर इशारा किया। समिति को उम्मीद है कि अगली तीन तिमाहियों में हेडलाइन महंगाई औसतन लगभग 5.8% रहेगी।
इस माहौल में नीतिगत दर को फिर से तय करना अनिवार्य है।
गवर्नर मल्होत्रा के बयान में यह भी कहा गया कि “मज़बूत अल नीनो स्थितियों के साथ कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून आगामी रबी सीज़न और ग्रामीण मांग पर असर डाल सकता है”।
2024 से रेपो रेट का सफ़र
रेपो रेट पूरे 2024 में 6.50% पर रहा। इसके बाद एमपीसी ने 2025 में तीन बार में कुल 100 बेसिस पॉइंट की कटौती की और जून तक दर 5.50% पर आ गई। फिर 5 दिसंबर 2025 को 25 बेसिस पॉइंट की और कटौती कर इसे 5.25% किया गया। अक्टूबर की बढ़ोतरी ने उस आखिरी कटौती को पलट दिया है।
| मद | मान |
|---|---|
| जनवरी 2024 | 6.50% |
| फरवरी 2025 | 6.25% |
| अप्रैल 2025 | 6.00% |
| जून 2025 | 5.50% |
| दिसंबर 2025 | 5.25% |
| अक्टूबर 2026 | 5.50% |
नए अनुमान
आरबीआई ने महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया है और उसे अब भी 7% से ज़्यादा वृद्धि की उम्मीद है। अप्रैल-जून में वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 7.8% बढ़ी, जिसे प्रस्ताव में “उम्मीद से ज़्यादा” बताया गया है। अगस्त के आखिर में एएनआई ने खबर दी थी कि आरबीआई का पूरे साल का वृद्धि अनुमान 6.7% है।
आरबीआई के अनुमान, अक्टूबर 2026
- 5.2%सीपीआई महंगाई, 2026-27
- 6.0%सीपीआई महंगाई, तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026)
- 4.4%कोर महंगाई, 2026-27
- 7.1%वास्तविक जीडीपी वृद्धि, 2026-27
तिमाही दर तिमाही देखें तो आरबीआई को जुलाई-सितंबर में 4.9%, अक्टूबर-दिसंबर में 6.0%, जनवरी-मार्च में 5.7% और अप्रैल-जून 2027 में 5.6% सीपीआई महंगाई की उम्मीद है। इन्हीं तिमाहियों के लिए उसके वृद्धि अनुमान 7.2%, 6.9%, 6.8% और 7.1% हैं। आरबीआई का कहना है कि वृद्धि के जोखिम बराबर संतुलित हैं।
कर्ज़ लेने वालों के लिए इसका मतलब
अक्टूबर 2019 से बैंकों को नए फ्लोटिंग रेट वाले रिटेल लोन, जैसे होम लोन और कार लोन, और सूक्ष्म व लघु उद्यमों को दिए जाने वाले कर्ज़ को किसी बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना होता है। ज़्यादातर बैंक रेपो रेट का इस्तेमाल करते हैं। इन लोन की दर कम से कम हर तीन महीने में एक बार दोबारा तय करनी होती है, इसलिए रेपो से जुड़े होम लोन की ब्याज दर आम तौर पर एक तिमाही के भीतर बदल जाएगी।
फैसले से पहले ही कर्ज़ की दरें धीरे-धीरे बढ़ रही थीं। गवर्नर के बयान में बताया गया कि जुलाई-अगस्त में नए रुपया लोन पर भारित औसत उधारी दर 8 बेसिस पॉइंट बढ़ी।
आगे क्या
बैठक के मिनट्स, जिनमें हर सदस्य का तर्क होगा, 21 अक्टूबर को प्रकाशित होंगे। एमपीसी की अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर 2026 को होगी। सितंबर के सीपीआई आंकड़े 12 अक्टूबर को आने हैं।
मूल दस्तावेज़
- Monetary Policy Statement, 2026-27: Resolution of the Monetary Policy Committee, October 5 to 7, 2026Reserve Bank of India, 7 अक्टूबर 2026
- Governor's Statement, October 7, 2026Reserve Bank of India, 7 अक्टूबर 2026
- Minutes of the Monetary Policy Committee Meeting, February 6-8, 2023Reserve Bank of India, 22 फरवरी 2023
- External Benchmark Based Lending (circular)Reserve Bank of India, 4 सितंबर 2019