अर्थव्यवस्थारुपया
कच्चा तेल 100 डॉलर पार, रुपया 97 के करीब; आरबीआई ने तेल कंपनियों के लिए खोली डॉलर विंडो
लगातार चार हफ़्ते विदेशी मुद्रा भंडार घटने के बाद आरबीआई 12 अक्टूबर से तीन सरकारी तेल कंपनियों की रोज़ की पूरी डॉलर ज़रूरत पूरी करेगा। उसने करेंसी हेजिंग के नियम भी सख्त कर दिए हैं।

मुख्य बातें
- 9 अक्टूबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.72 (अनंतिम) पर बंद हुआ, जो एक दिन पहले 96.88 था; ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 102.95 डॉलर पर थे।
- 12 अक्टूबर से अगले आदेश तक आरबीआई नामित बैंकों के ज़रिये इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल को सीधे डॉलर बेचेगा।
- बिना अंतर्निहित एक्सपोज़र का सबूत दिए हेजिंग की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है और एक फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिज़र्व बनाया गया है।
- 2 अक्टूबर को खत्म हफ़्ते में विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 734.6 अरब डॉलर रह गया, जो सितंबर की शुरुआत के रिकॉर्ड से 51.1 अरब डॉलर कम है।
हफ़्ते के आखिर में डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के करीब रहा। पीटीआई के मुताबिक शुक्रवार, 9 अक्टूबर को यह अनंतिम तौर पर 96.72 पर बंद हुआ, जो गुरुवार के 96.88 से 16 पैसे मज़बूत है। उस दिन ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 102.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे थे।
एक दिन बाद, शनिवार को, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये पर दबाव कम करने के लिए दो तरह के उपायों का एलान किया।
तेल कंपनियों के लिए डॉलर विंडो
आरबीआई तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम, की “रोज़ की पूरी डॉलर ज़रूरत” पूरी करने के लिए डॉलर बेचेगा। यह बिक्री सोमवार, 12 अक्टूबर से एक या एक से ज़्यादा नामित बैंकों के ज़रिये होगी।
यह सुविधा “अगले आदेश तक लागू रहेगी”। आरबीआई ने कहा कि यह फैसला बाज़ार की मौजूदा स्थितियों के उसके आकलन पर आधारित है। नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विंडो से तेल कंपनियों की आयात मांग स्पॉट बाज़ार से बाहर हो जाती है।
हेजिंग के नियम सख्त
उसी दिन जारी दो सर्कुलर में आरबीआई ने रुपये से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव के नियम भी सख्त कर दिए।
विदेशी मुद्रा बाज़ार के लिए आरबीआई के उपाय, 10 अक्टूबर 2026
- 50 लाख डॉलरबिना अंतर्निहित एक्सपोज़र का सबूत दिए हेजिंग की नई सीमा (पहले 10 करोड़ डॉलर)
- 20%फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिज़र्व, 20 लाख डॉलर से ऊपर के पात्र कॉन्ट्रैक्ट पर, आरबीआई के पास नकद के रूप में
- दोबारा बुकिंग नहींरद्द किए गए रुपया डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की
अब कोई उपयोगकर्ता रद्द हो चुके रुपया डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक नहीं कर सकेगा, हालांकि मैच्योरिटी पर रोलओवर की इजाज़त है। बिना दस्तावेज़ी एक्सपोज़र के हेजिंग की सीमा बैंकों और स्टॉक एक्सचेंजों, दोनों जगह 10 करोड़ डॉलर से घटकर 50 लाख डॉलर हो गई है।
बैंकों को आरबीआई के पास नकद में एक नया फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिज़र्व भी रखना होगा। यह 20 लाख डॉलर से ऊपर के उन कॉन्ट्रैक्ट के नोशनल मूल्य का 20% होगा, जिनमें कोई उपयोगकर्ता चालू खाते के एक्सपोज़र की हेजिंग के लिए रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीदता है। आरबीआई ने कहा कि इन उपायों का मकसद “विदेशी मुद्रा बाज़ार का व्यवस्थित कामकाज सुनिश्चित करना” है।
तेल से जुड़ाव
बिज़नेस स्टैंडर्ड ने इस साल रुपये की गिरावट को तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से जोड़ा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अप्रैल को जब ब्रेंट 126 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, जो जून 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर था, तब रुपया 95.32 के उस समय के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था। तब तक विदेशी निवेशक 2026 में भारतीय बाज़ारों से 20 अरब डॉलर से ज़्यादा निकाल चुके थे।
बिज़नेस स्टैंडर्ड ने लिखा कि तेल की ऊंची कीमतें भारत का आयात बिल बढ़ाती हैं, चालू खाते का घाटा बढ़ाती हैं और आयातकों की डॉलर मांग में इज़ाफ़ा करती हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक सितंबर की शुरुआत से रुपया डॉलर के मुकाबले 1.62% कमज़ोर हुआ है। पीटीआई के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अकेले 8 अक्टूबर को ₹12,943.58 करोड़ के शेयर बेचे।
तीन दिन की कमज़ोरी के बाद भारतीय रुपया मज़बूत हुआ और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चढ़ा
परमार ने कहा कि निकट अवधि में उन्हें 97 के आसपास रेज़िस्टेंस और 95.30 पर सपोर्ट की उम्मीद है।
घट रहा है भंडार
2 अक्टूबर को खत्म हफ़्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.95 अरब डॉलर घटकर 734.6 अरब डॉलर रह गया। यह लगातार चौथी साप्ताहिक गिरावट है। भंडार अब 4 सितंबर को खत्म हफ़्ते के 785.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड से 51.1 अरब डॉलर कम है। 25 सितंबर को खत्म हफ़्ते में 18.3 अरब डॉलर की रिकॉर्ड साप्ताहिक गिरावट आई थी।
बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, बाज़ार से जुड़े लोगों का अनुमान है कि आरबीआई ने सितंबर में शुद्ध रूप से करीब 30 अरब डॉलर बेचे। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने आखिरी दर्ज हफ़्ते में आरबीआई की बिक्री करीब 7.5 अरब डॉलर आंकी, और कहा कि बाकी गिरावट का ज़्यादातर हिस्सा मूल्यांकन में बदलाव की वजह से है।
गर्मियों में एफसीएनआर(बी) जमा के लिए एक रियायती स्वैप विंडो के ज़रिये भंडार फिर से भरा गया था। यह विंडो 8 जून को खुली और 31 अगस्त को बंद हुई। 18 सितंबर तक इससे 143.6 अरब डॉलर आए, जिनमें से 132.98 अरब डॉलर एफसीएनआर(बी) जमा से आए।
आरबीआई ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया था और महंगाई के जोखिमों में पश्चिम एशिया के संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का हवाला दिया था।
मूल दस्तावेज़
- RBI announces special window for Public Sector Oil Marketing Companies to meet dollar requirementsReserve Bank of India, 10 अक्टूबर 2026
- RBI Announces Regulatory Measures for the Foreign Exchange MarketReserve Bank of India, 10 अक्टूबर 2026