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अगस्त तक राजकोषीय घाटा सालाना लक्ष्य के 41.9% पर, इक्रा को लक्ष्य चूकने का अंदेशा
अप्रैल-अगस्त में केंद्र का घाटा ₹7.10 लाख करोड़ रहा। ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद कमज़ोर एक्साइज़ वसूली और बढ़ती सब्सिडी से 4.3% का लक्ष्य दबाव में है।

मुख्य बातें
- अप्रैल-अगस्त 2026 में केंद्र का राजकोषीय घाटा ₹7,10,249 करोड़ रहा, यानी बजट अनुमान का 41.9%, जबकि एक साल पहले यह 38.1% था।
- सकल कर राजस्व 6.5% बढ़ा, लेकिन ईंधन पर शुल्क में कटौती के बाद एक्साइज़ वसूली 23% घट गई।
- सब्सिडी 24% बढ़ी; पूंजीगत व्यय पांच महीनों में 18% बढ़ा, लेकिन अगस्त में 30% घट गया।
- इक्रा का अनुमान है कि पूरे साल का घाटा बजट अनुमान से ₹1.3 से 1.4 लाख करोड़ ज़्यादा रहेगा।
महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के 30 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त 2026 में केंद्र का राजकोषीय घाटा ₹7,10,249 करोड़ रहा, जो 2026-27 के बजट अनुमान (बीई) का 41.9% है। एक साल पहले इन्हीं पांच महीनों में घाटा उस साल के लक्ष्य का 38.1% था।
2026-27 के बजट में ₹16,95,768 करोड़ यानी जीडीपी के 4.3% घाटे का लक्ष्य रखा गया है, जो 2025-26 में 4.4% था। घाटा सरकार के खर्च और उसकी कमाई के बीच का अंतर है, जिसे वह उधार लेकर पूरा करती है।
अगस्त में तेज़ उछाल
जुलाई तक घाटा मोटे तौर पर पिछले साल की रफ़्तार के बराबर या उससे पीछे चल रहा था। जून के अंत में यह बजट अनुमान का 18.2% था (एक साल पहले 17.9%) और जुलाई के अंत में 26.8% (एक साल पहले 29.9%)।
अगस्त में तस्वीर बदल गई। कुल घाटा जुलाई के अंत के ₹4,55,144 करोड़ से बढ़कर अगस्त के अंत में ₹7,10,249 करोड़ हो गया। इक्रा के विश्लेषण पर आधारित डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह उछाल राज्यों को टैक्स हस्तांतरण की एक अतिरिक्त किस्त की वजह से आया।
दबाव कहां से आ रहा है
इक्रा के विश्लेषण के मुताबिक अप्रैल-अगस्त में सकल कर राजस्व 6.5% बढ़ा। बजट में पूरे साल के लिए 8.0% वृद्धि मानी गई है। सरकार ने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से तेल विपणन कंपनियों को राहत देने के लिए 27 मार्च को पेट्रोल और डीज़ल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज़ ड्यूटी) घटाया था, जिसके बाद एक्साइज़ वसूली 23% गिर गई। ज़्यादातर दूसरे टैक्स दो अंकों की दर से बढ़े।
खर्च की तरफ़ सब्सिडी 24% और राजस्व व्यय 8% बढ़ा, जबकि ब्याज भुगतान 3% घटा। ब्याज और सब्सिडी को छोड़कर राजस्व व्यय 12.5% बढ़ा।
पूरे साल के लिए बजट में ₹53,47,315 करोड़ के कुल खर्च और ₹35,33,150 करोड़ की राजस्व प्राप्तियों की योजना है। यह अंतर मुख्य रूप से उधार से पूरा किया जाता है।
पांच महीनों में पूंजीगत व्यय 18% बढ़ा। जून-जुलाई में इसमें 60% का उछाल आया था, लेकिन अगस्त में यह 30% घट गया।
अप्रैल-अगस्त 2026
- ₹7.10 लाख करोड़राजकोषीय घाटा, बजट अनुमान का 41.9% (एक साल पहले 38.1%)
- 6.5%सकल कर राजस्व में वृद्धि
- -23%एक्साइज़ वसूली में बदलाव
- 24%सब्सिडी खर्च में वृद्धि
इक्रा की चेतावनी: लक्ष्य से ऊपर जा सकता है घाटा
रेटिंग एजेंसी इक्रा का अनुमान है कि 2026-27 का घाटा बजट अनुमान से ₹1.3 से 1.4 लाख करोड़ ज़्यादा रहेगा। एजेंसी ने इसके लिए कर राजस्व में कमी और ईंधन व उर्वरकों पर अतिरिक्त सब्सिडी की ज़रूरत का हवाला दिया है। उसे उम्मीद है कि आयकर और एक्साइज़ वसूली बजट के स्तर से कम रहेगी।
इक्रा को कुछ राहत भी दिखती है। सोने और चांदी के आयात पर ऊंचे शुल्क की वजह से सीमा शुल्क वसूली बजट से ऊपर चल रही है, और लघु बचत योजनाओं में आने वाली रकम भी बजट के स्तर से ज़्यादा रहने की उम्मीद है। इससे साल की दूसरी छमाही में केंद्र को उधार लेने की ज़्यादा गुंजाइश मिलेगी।
पिछले साल का रिकॉर्ड
सरकार ने 2025-26 का लक्ष्य हासिल कर लिया था। 1 जून 2026 को सामने आए अनंतिम खातों के मुताबिक उस साल का घाटा ₹15,19,169 करोड़, यानी जीडीपी का 4.4% रहा। यह संशोधित अनुमान का 97.5% था।
बजट में मध्यम अवधि का एक लक्ष्य भी रखा गया है: 2030-31 तक केंद्र सरकार के कर्ज़ को जीडीपी के 50% पर लाना, जिसमें एक प्रतिशत अंक ऊपर-नीचे की गुंजाइश हो।
मूल दस्तावेज़
- Budget at a Glance 2026-2027Ministry of Finance, 1 फरवरी 2026
- Union Budget 2026-27: key highlights (macroeconomic framework)Press Information Bureau, 1 फरवरी 2026