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राजकोषीय घाटा क्या है और 4.3% का लक्ष्य क्यों अहम है

केंद्र के खर्च और कमाई के बीच का अंतर तय करता है कि उसे कितना उधार लेना होगा। 2026-27 के लिए लक्ष्य ₹16.96 लाख करोड़ यानी जीडीपी का 4.3% है।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

राजकोषीय घाटा केंद्र के कुल खर्च और उधार को छोड़कर उसकी कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है, इसलिए यह बताता है कि सरकार को एक साल में कितना उधार लेना है। 2026-27 के बजट में यह ₹16,95,768 करोड़ यानी जीडीपी का 4.3% रखा गया है। अगस्त 2026 तक सरकार इसका 41.9% इस्तेमाल कर चुकी थी, और इक्रा को लक्ष्य से ज़्यादा घाटे की आशंका है।

राजकोषीय घाटा क्या होता है?

राजकोषीय घाटा केंद्र के कुल खर्च और उसकी कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है, जिसमें उधार लिया गया पैसा शामिल नहीं होता। बजट इसे “कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (ऋण पूंजी प्राप्तियों को छोड़कर) के बीच का अंतर” बताता है।

आसान शब्दों में, यह वह रकम है जो सरकार को अपने बिल चुकाने के लिए एक साल में उधार लेनी पड़ती है। बजट दस्तावेज़ इसे “सरकार की कुल उधारी ज़रूरत को दर्शाने वाला” बताते हैं। इसे आम तौर पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के हिस्से के रूप में बताया जाता है, ताकि अलग-अलग सालों की तुलना हो सके।

2026-27 में राजकोषीय घाटा कितना है?

2026-27 का बजट अनुमान ₹16,95,768 करोड़ यानी जीडीपी का 4.3% है। सरकार ₹53,47,315 करोड़ खर्च करने की योजना बना रही है। उसे ₹35,33,150 करोड़ की राजस्व प्राप्तियों की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से कर हैं, और ₹1,18,397 करोड़ की गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों की। बाकी रकम उधार ली जाती है।

2026-27 का घाटा कैसे बनता हैबजट अनुमान (₹ लाख करोड़)
2026-27 का घाटा कैसे बनता है. बजट अनुमान (₹ लाख करोड़)
मदमान
कुल व्यय₹53.47 लाख करोड़
राजस्व प्राप्तियां₹35.33 लाख करोड़
गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां₹1.18 लाख करोड़
राजकोषीय घाटा (उधारी की ज़रूरत)₹16.96 लाख करोड़

सरकार का पैसा कहां से आता है और कहां जाता है?

केंद्र की ज़्यादातर आमदनी करों से आती है, और खर्च की सबसे बड़ी अकेली मद ब्याज है। 2026-27 के लिए बजट में राज्यों का हिस्सा देने के बाद ₹28,66,922 करोड़ के शुद्ध कर राजस्व और ₹6,66,228 करोड़ के गैर-कर राजस्व का अनुमान है। ब्याज भुगतान के लिए ₹14,03,972 करोड़ और पूंजीगत व्यय के लिए ₹12,21,821 करोड़ रखे गए हैं।

संपत्ति बनाने के लिए राज्यों को दिए जाने वाले अनुदान जोड़ें तो प्रभावी पूंजीगत व्यय ₹17,14,523 करोड़ है। बजट के अपने ब्योरे में, खर्च होने वाले हर रुपये में से 22 पैसे करों में राज्यों के हिस्से में जाते हैं, जो सबसे बड़ी अकेली मद है, और 20 पैसे ब्याज में।

राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटे और प्राथमिक घाटे से कैसे अलग है?

तीनों पैमाने एक ही खाते के अलग-अलग हिस्सों को देखते हैं। राजस्व घाटा रोज़मर्रा के (राजस्व) खर्च का राजस्व प्राप्तियों से ज़्यादा होना है। यह दिखाता है कि उधारी का कितना हिस्सा संपत्ति बनाने की जगह रोज़ के कामकाज की लागत में जा रहा है। 2026-27 में इसका बजट अनुमान जीडीपी का 1.5% है।

प्राथमिक घाटा, राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाने पर मिलता है, और इसका बजट अनुमान जीडीपी का 0.7% है। यह दिखाता है कि पुराने कर्ज़ का ब्याज चुकाने के अलावा दूसरे कामों के लिए सरकार कितना उधार ले रही है। प्रभावी राजस्व घाटा, जिसमें पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए राज्यों को दिए गए अनुदान भी घटाए जाते हैं, जीडीपी का 0.3% है।

बजट अनुमान 2026-27

  • 4.3%राजकोषीय घाटा, जीडीपी का %
  • 1.5%राजस्व घाटा, जीडीपी का %
  • 0.7%प्राथमिक घाटा, जीडीपी का %
  • ₹14.04 लाख करोड़ब्याज भुगतान

राजकोषीय घाटा क्यों मायने रखता है?

क्योंकि आज का उधार कल का ब्याज भुगतान बनता है। 2026-27 में ब्याज के लिए ₹14,03,972 करोड़ रखे गए हैं। बजट के अपने ब्योरे में, केंद्र के खर्च किए हर रुपये में से 20 पैसे ब्याज में जाते हैं, और उसे मिलने वाले हर रुपये में से 24 पैसे उधारी और अन्य देनदारियों से आते हैं।

पिछली उधारी का ब्याज बजट पर एक तय बोझ है, इसलिए इस साल ज़्यादा घाटा आने वाले सालों में दूसरे खर्चों की गुंजाइश कम कर देता है। इसीलिए बजट सालाना घाटे के लक्ष्य के साथ कुल कर्ज़ के स्तर का भी एक लक्ष्य रखता है।

सरकार का लक्ष्य क्या है?

इस साल जीडीपी के 4.3% का घाटा और पांच साल में कर्ज़ का बोझ कम करना। 2026-27 का लक्ष्य 2025-26 के 4.4% से कम है, और सरकार ने वह लक्ष्य हासिल कर लिया था: जून 2026 में बताए गए अस्थायी खातों के मुताबिक उस साल घाटा ₹15,19,169 करोड़ रहा।

बजट भाषण में 2030-31 तक केंद्र सरकार का कर्ज़ जीडीपी के “50±1 प्रतिशत” पर लाने का लक्ष्य रखा गया। पीआईबी के मुताबिक 2026-27 के बजट अनुमान में कर्ज़ जीडीपी का 55.6% है, जो 2025-26 में 56.1% था।

साल के दौरान घाटे पर नज़र कैसे रखी जाती है?

महालेखा नियंत्रक (सीजीए) हर महीने केंद्र के खाते जारी करता है, जिनसे पता चलता है कि पूरे साल के लक्ष्य का कितना हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है। अगस्त 2026 के अंत तक घाटा ₹7,10,249 करोड़ था, जो बजट अनुमान का 41.9% है, जबकि एक साल पहले इसी समय यह 38.1% था।

पिछले साल के उसी महीने से तुलना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि साल भर खर्च और कर प्राप्तियां बराबर नहीं रहतीं। उदाहरण के लिए, राज्यों को कर हस्तांतरण की एक बड़ी किस्त किसी एक महीने में घाटे को तेज़ी से बढ़ा सकती है।

क्या 2026-27 का लक्ष्य खतरे में है?

रेटिंग एजेंसी इक्रा ऐसा मानती है। अक्टूबर 2026 की स्थिति में उसका अनुमान है कि कमज़ोर कर राजस्व और ईंधन व उर्वरक पर अतिरिक्त सब्सिडी के कारण घाटा बजट अनुमान से ₹1.3 से 1.4 लाख करोड़ ज़्यादा रहेगा।

अप्रैल-अगस्त में सकल कर राजस्व 6.5% बढ़ा, जबकि बजट में पूरे साल के लिए 8.0% की बढ़त मानी गई थी, और मार्च में ईंधन पर शुल्क घटाए जाने के बाद उत्पाद शुल्क संग्रह 23% गिरा। सब्सिडी 24% बढ़ी। इक्रा कुछ राहत की बातें भी गिनाती है, जैसे सीमा शुल्क संग्रह का बजट से ऊपर चलना और लघु बचत में आने वाला पैसा, जिससे केंद्र को उधार लेने की ज़्यादा गुंजाइश मिल सकती है।

मूल दस्तावेज़