अर्थव्यवस्थामहंगाई
अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर, लगातार सातवें महीने बढ़ी
खाने-पीने की चीज़ों के दाम बढ़ने से सीपीआई महंगाई जुलाई के 4.45% से ऊपर गई, और गांवों में महंगाई शहरों से काफ़ी ज़्यादा रही। 2024 आधार वाली नई सीरीज़ के सितंबर के आंकड़े 12 अक्टूबर को आएंगे।

मुख्य बातें
- अगस्त 2026 में सीपीआई महंगाई 4.82% (अनंतिम) रही, जो जुलाई में 4.45% और जनवरी में 2.74% थी।
- खाद्य महंगाई 5.52% से बढ़कर 5.95% हो गई।
- ग्रामीण महंगाई 5.23% और शहरी महंगाई 4.31% रही।
- रेस्तरां और आवास सेवाएं (8.38%) तथा पर्सनल केयर और विविध वस्तुएं (15.17%) सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले वर्ग रहे।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से 14 सितंबर को जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई जुलाई के 4.45% से बढ़कर 4.82% हो गई। यह लगातार सातवां महीना है जब महंगाई बढ़ी है। जनवरी में यह 2.74% थी।
ये आंकड़े उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई सीरीज़ के हैं, जिसका आधार वर्ष 2024=100 है। इस साल इसने 2012 वाली सीरीज़ की जगह ली है।
खाने-पीने की चीज़ों से बढ़ी महंगाई
उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक अगस्त में एक साल पहले के मुकाबले 5.95% बढ़ा, जबकि जुलाई में यह बढ़ोतरी 5.52% थी। खाद्य और पेय पदार्थ वर्ग, जो इससे थोड़ा व्यापक पैमाना है, 5.66% बढ़ा।
गांवों में महंगाई कस्बों और शहरों से ज़्यादा रही। ग्रामीण सीपीआई 5.23% और शहरी सीपीआई 4.31% बढ़ा। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 6.13% रही, जबकि शहरी इलाकों में 5.64%।
यह अंतर पूरे साल बढ़ता रहा है। जनवरी में दोनों लगभग बराबर थे, ग्रामीण 2.73% और शहरी 2.75%। फरवरी से हर महीने ग्रामीण महंगाई आगे रही है और अगस्त तक यह अंतर बढ़कर लगभग एक पूरा प्रतिशत अंक हो गया। अखिल भारतीय सूचकांक अगस्त में 108.74 पर रहा, जो जुलाई में 107.95 था।
| मद | मान |
|---|---|
| जनवरी | 2.74% |
| फरवरी | 3.21% |
| मार्च | 3.40% |
| अप्रैल | 3.48% |
| मई | 3.93% |
| जून | 4.38% |
| जुलाई | 4.45% |
| अगस्त | 4.82% |
और क्या महंगा हुआ
नई सीरीज़ में खर्च को 12 वर्गों में बांटा गया है। अगस्त में सबसे तेज़ बढ़ोतरी पर्सनल केयर, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुएं व सेवाएं (15.17%) तथा रेस्तरां और आवास सेवाएं (8.38%) वर्ग में हुई।
परिवहन 4.60% महंगा हुआ। इसके भीतर निजी वाहन चलाने का खर्च 7.40% और माल ढुलाई सेवाओं का खर्च 14.64% बढ़ा। बिजली, गैस और अन्य ईंधन 3.09% और मकान किराया 2.27% बढ़ा।
सबसे कम बढ़ोतरी स्वास्थ्य (1.34%), मनोरंजन (1.74%) और सूचना व संचार (2.01%) में हुई।
अगस्त 2026 की सीपीआई
- 4.82%हेडलाइन महंगाई (जुलाई: 4.45%)
- 5.95%खाद्य महंगाई (जुलाई: 5.52%)
- 5.23%ग्रामीण महंगाई
- 4.31%शहरी महंगाई
आरबीआई इसे कैसे देखता है
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% करते समय अगस्त के आंकड़ों का हवाला दिया। समिति के प्रस्ताव में कहा गया है कि यह बढ़ोतरी खाद्य और ईंधन की वजह से हुई, और कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते, बढ़कर 4.2% हो गई। कीमती धातुओं को छोड़ दें तो कोर महंगाई 2.9% रही।
आरबीआई ने कहा कि अगस्त में भार के हिसाब से सीपीआई बास्केट के करीब 37% हिस्से में महंगाई 4% से ऊपर रही। उसका अनुमान है कि जुलाई-सितंबर में महंगाई 4.9% रहेगी, अक्टूबर-दिसंबर में बढ़कर 6.0% होगी और पूरे 2026-27 में 5.2% रहेगी। आरबीआई का लक्ष्य 4% है, जिसमें 2% से 6% तक की गुंजाइश (टॉलरेंस बैंड) है।
नई सीरीज़ के बारे में
2024 आधार वाला सूचकांक घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के खर्च के पैटर्न पर आधारित है। इसमें 358 वस्तुएं शामिल हैं, जो पहले 299 थीं, और खाद्य व पेय पदार्थों का भार 36.75% है। कीमतें 1,407 शहरी बाज़ारों, जिनमें ऑनलाइन बाज़ार भी शामिल हैं, और 1,465 गांवों से जुटाई जाती हैं।
आधार और बास्केट दोनों बदल गए हैं, इसलिए नए आंकड़ों की सीधी तुलना पुरानी 2012 सीरीज़ के हेडलाइन आंकड़ों से नहीं की जानी चाहिए।
आगे क्या
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) 12 अक्टूबर 2026 को सितंबर के सीपीआई आंकड़े जारी करेगा। अगस्त का आंकड़ा अनंतिम है और उस रिलीज़ में इसमें संशोधन हो सकता है।
मूल दस्तावेज़
- Press Release of CPI for August 2026 (base 2024=100)Ministry of Statistics and Programme Implementation (NSO), 14 सितंबर 2026
- First Press Release of CPI with base 2024=100Ministry of Statistics and Programme Implementation (via PIB), 12 फरवरी 2026
- Monetary Policy Statement, 2026-27: Resolution of the MPC, October 5 to 7, 2026Reserve Bank of India, 7 अक्टूबर 2026