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भारत में महंगाई कैसे मापी जाती है: नई सीपीआई सीरीज़ को समझिए

फरवरी 2026 से भारत की खुदरा महंगाई का आंकड़ा आधार वर्ष 2024 वाले नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से आता है। टोकरी बड़ी हुई है, खाने का वज़न घटा है और कुछ कीमतें अब ऑनलाइन जुटाई जाती हैं।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

भारत खुदरा महंगाई को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) से मापता है, जो परिवारों द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की एक तय टोकरी की कीमतों पर नज़र रखता है। आधार वर्ष 2024=100 वाली नई सीरीज़ ने जनवरी 2026 के आंकड़ों से 2012 की सीरीज़ की जगह ली, जो 12 फरवरी 2026 को जारी हुए। इसमें 358 वस्तुएं हैं, खाद्य और पेय पदार्थों का वज़न 36.75% है, और यह 2023-24 के घरेलू उपभोग सर्वे के खर्च के पैटर्न पर आधारित है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) क्या मापता है?

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) यह देखता है कि परिवारों द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की एक तय टोकरी की कीमतें समय के साथ कैसे बदलती हैं। खुदरा महंगाई, यानी हर महीने सुर्खियों में आने वाला आंकड़ा, पिछले साल के उसी महीने के मुकाबले सूचकांक में हुआ प्रतिशत बदलाव है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) के तहत आने वाला राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ग्रामीण भारत, शहरी भारत और पूरे देश के लिए अलग-अलग सूचकांक जारी करता है। भारतीय रिज़र्व बैंक अखिल भारतीय संयुक्त आंकड़े को लक्ष्य बनाकर चलता है।

मोस्पी ने सीपीआई सीरीज़ क्यों बदली?

क्योंकि एक दशक से भी ज़्यादा पुराने खर्च के पैटर्न पर बनी पुरानी टोकरी अब भारतीयों के खर्च करने के तरीके से मेल नहीं खाती थी। मोस्पी ने कहा कि 2012 के बाद उपभोग, आमदनी, शहरीकरण, सेवाओं और डिजिटल खर्च में आए ढांचागत बदलावों को दिखाने के लिए यह संशोधन ज़रूरी था।

मंत्रालय यह भी चाहता था कि वज़न तय करने की अवधि (2023-24) कीमतों के संदर्भ वर्ष (2024) के करीब हो, और अंतरराष्ट्रीय COICOP 2018 वर्गीकरण अपनाया जाए ताकि भारत के आंकड़ों की तुलना दूसरे देशों से हो सके। आरबीआई, शिक्षाविदों, मंत्रालयों और सांख्यिकीविदों वाले एक विशेषज्ञ समूह ने इस संशोधन पर सलाह दी।

नई सीपीआई टोकरी में क्या बदला?

टोकरी में अब 299 की जगह 358 वस्तुएं हैं, और सेवाएं ज़्यादा हैं। सामान 259 से बढ़कर 308 और सेवाएं 40 से बढ़कर 50 हो गईं। वज़न घरेलू उपभोग व्यय सर्वे 2023-24 से लिए गए हैं।

COICOP 2018 के तहत वस्तुओं को 12 डिवीज़न, 43 समूहों, 92 वर्गों और 162 उपवर्गों में बांटा गया है। पुरानी सीरीज़ में छह बड़े समूह थे। नए डिवीज़न परिवहन, सूचना और संचार, मनोरंजन, शिक्षा, और रेस्तरां व ठहरने जैसे खर्चों को अलग से दिखाते हैं।

नई सीपीआई टोकरी में क्या-क्या हैडिवीज़न के वज़न, अखिल भारतीय संयुक्त, आधार 2024 (%)
नई सीपीआई टोकरी में क्या-क्या है. डिवीज़न के वज़न, अखिल भारतीय संयुक्त, आधार 2024 (%)
मदमान
खाद्य और पेय पदार्थ36.75%
आवास, पानी, बिजली, गैस, ईंधन17.67%
परिवहन8.80%
कपड़े और जूते6.38%
स्वास्थ्य6.10%
निजी देखभाल, सामाजिक सुरक्षा, विविध5.04%
फर्नीचर और घरेलू उपकरण4.47%
सूचना और संचार3.61%
रेस्तरां और ठहरना3.35%
शिक्षा सेवाएं3.33%
पान, तंबाकू और नशीले पदार्थ2.99%
मनोरंजन, खेल और संस्कृति1.52%

महंगाई के आंकड़े में अब खाने का वज़न कितना है?

नई टोकरी में खाद्य और पेय पदार्थों का हिस्सा 36.75% है। एक ही वर्गीकरण पर मापें तो यह साफ गिरावट है। 2012 के पुराने वर्गीकरण में खाद्य और पेय पदार्थों का वज़न 45.86% था, और 2024 की टोकरी को पुराने तरीके से समूहबद्ध करने पर यह 40.10% आता है।

नए वर्गीकरण पर परिवहन का वज़न 6.39% से बढ़कर 8.80% हो गया, और आवास, पानी, बिजली और ईंधन का 16.89% से बढ़कर 17.67%। खाने का वज़न कम होने का मतलब है कि खराब फसल या सब्ज़ियों की कीमतों में उछाल अब मुख्य आंकड़े को पहले से कम हिलाएगा। आउटलुक बिज़नेस ने जनवरी में रिपोर्ट किया था कि इस बदलाव से महंगाई के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव कम होने की उम्मीद है।

पुरानी और नई सीपीआई एक नज़र में

  • 2024=100नया आधार वर्ष (पहले 2012=100)
  • 358टोकरी में वस्तुएं (पहले 299)
  • 36.75%खाद्य और पेय पदार्थों का वज़न, नया वर्गीकरण
  • 12खर्च के डिवीज़न (पहले 6 समूह)

सीपीआई के लिए कीमतें कैसे जुटाई जाती हैं?

फील्ड कर्मचारी हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ऑनलाइन बाज़ारों समेत 1,407 शहरी बाज़ारों और 1,465 गांवों में हाथ में रखे उपकरणों पर कीमतें दर्ज करते हैं। कागज़ी फॉर्म की जगह कंप्यूटर की मदद से इंटरव्यू का तरीका नई सीरीज़ के साथ आया।

पहली बार 25 लाख से ज़्यादा आबादी वाले 12 बड़े शहरों में ई-कॉमर्स की कीमतें एक अतिरिक्त बाज़ार के रूप में जुटाई जा रही हैं, और हवाई किराए, स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन और फोन शुल्क के लिए ऑनलाइन स्रोतों का इस्तेमाल होता है। ऑनलाइन कीमतें हर हफ्ते जुटाई जाती हैं। कुछ कीमतें सरकारी रिकॉर्ड से आती हैं: रेल किराया रेलवे से, डाक शुल्क इंडिया पोस्ट से, और पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी, सीएनजी और पाइप वाली गैस की खुदरा कीमतें पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल से। अब ग्रामीण मकानों का किराया भी शामिल है।

क्या नई सीपीआई के आंकड़ों की तुलना पुराने आंकड़ों से कर सकते हैं?

सीधे तौर पर नहीं। आधार वर्ष, टोकरी, वज़न और वर्गीकरण, सब बदल गए हैं, इसलिए नई सीरीज़ पर 4% का आंकड़ा पुरानी सीरीज़ के 4% जैसा माप नहीं है।

मोस्पी ने जनवरी 2025 से नई सीरीज़ के सूचकांक जारी किए हैं, इसलिए नए आधार पर साल-दर-साल महंगाई जनवरी 2026 से शुरू होती है। पुरानी सीरीज़ का आखिरी आंकड़ा दिसंबर 2025 के लिए 1.33% था। नई सीरीज़ का पहला आंकड़ा, जनवरी 2026 के लिए, 2.75% जारी हुआ था और बाद में इसे अंतिम रूप से 2.74% किया गया।

सीपीआई का ब्याज दरों से क्या संबंध है?

आरबीआई का महंगाई लक्ष्य इसी सूचकांक के आधार पर तय होता है। सरकार ने अप्रैल 2026 से मार्च 2031 के लिए 4% सीपीआई महंगाई का लक्ष्य रखा है, जिसमें 2% से 6% का दायरा है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति महंगाई को इस लक्ष्य के करीब रखने के लिए रेपो रेट तय करती है।

अक्टूबर 2026 में, ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, सीपीआई महंगाई 4.82% (अगस्त, अस्थायी) थी, और आरबीआई ने 2026-27 के लिए 5.2% का अनुमान लगाया। 7 अक्टूबर को उसने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया।

महंगाई के आंकड़े कब जारी होते हैं?

मोस्पी हर महीने के सीपीआई आंकड़े अगले महीने के बीच में जारी करता है। अगस्त 2026 के आंकड़े 14 सितंबर को आए, और सितंबर के आंकड़े 12 अक्टूबर 2026 को जारी होने हैं। हर महीने का पहला आंकड़ा अस्थायी होता है और एक महीने बाद उसे अंतिम रूप दिया जाता है।

मूल दस्तावेज़