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अर्थव्यवस्थामहंगाई

प्याज़ के दाम दोगुने से ज़्यादा, सितंबर में खुदरा महंगाई उछलकर 5.54% पर

खाद्य महंगाई 7.74% पर पहुंची और गांवों में दाम शहरों से तेज़ी से बढ़े। अर्थशास्त्री अब दिसंबर में आरबीआई की ओर से एक और दर बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
भारत के एक सब्ज़ी बाज़ार में प्याज़ की बोरियां
भारत के एक सब्ज़ी बाज़ार में प्याज़ की बोरियांMcKay Savage from London, UK / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. सीपीआई महंगाई अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% हो गई, जो नई सीरीज़ शुरू होने के बाद सबसे ज़्यादा है।
  2. खाद्य महंगाई उछलकर 7.74% पर पहुंची, प्याज़ एक साल पहले के मुकाबले 108% महंगा रहा।
  3. पिछले हफ़्ते रेपो रेट 5.50% किए जाने के बाद कई अर्थशास्त्री अब दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।

देश की खुदरा महंगाई सितंबर में बढ़कर 5.54% हो गई, जो जनवरी में नई उपभोक्ता मूल्य सीरीज़ शुरू होने के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। खाने-पीने की चीज़ों के दाम तेज़ी से बढ़े। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सोमवार को जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक महंगाई अगस्त के संशोधित 4.83% से ऊपर गई।

यह लगातार आठवें महीने की बढ़ोतरी है। जनवरी में महंगाई 2.74% थी।

प्याज़ ने बढ़ाई खाद्य महंगाई

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक से मापी जाने वाली खाद्य महंगाई अगस्त के 5.97% से उछलकर 7.74% हो गई। प्याज़ एक साल पहले के मुकाबले 108.09% महंगा रहा, जबकि अगस्त में यह बढ़ोतरी 48.78% थी। लहसुन 54.62%, अदरक 62.85% और नींबू 36.41% महंगे हुए।

कुछ सब्ज़ियां सस्ती भी हुईं। आलू के दाम एक साल पहले से 11.50% और टमाटर के 8.62% कम रहे।

खाने के बाहर, चांदी के गहने 87.80% महंगे रहे, जिससे पर्सनल केयर, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं व सेवाओं वाला वर्ग 13.75% पर रहा। रेस्तरां और आवास सेवाएं 9.36% और परिवहन 5.01% महंगे हुए। सबसे कम बढ़ोतरी स्वास्थ्य में रही, 1.40%।

सीपीआई महंगाई, जनवरी से सितंबर 2026अखिल भारतीय, सालाना (%), आधार वर्ष 2024=100
सीपीआई महंगाई, जनवरी से सितंबर 2026. अखिल भारतीय, सालाना (%), आधार वर्ष 2024=100
मदमान
जन2.74%
फ़र3.21%
मार्च3.40%
अप्रै3.48%
मई3.93%
जून4.38%
जुल4.45%
अग4.83%
सित5.54%

गांवों पर ज़्यादा असर

ग्रामीण भारत में दाम ज़्यादा तेज़ी से बढ़े। सितंबर में ग्रामीण महंगाई 6.08% और शहरी 4.88% रही, यानी दोनों के बीच का अंतर अगस्त के 0.93 से बढ़कर 1.20 प्रतिशत अंक हो गया। ग्रामीण खाद्य महंगाई 8.06% और शहरी खाद्य महंगाई 7.18% पर पहुंची।

बड़े राज्यों में सबसे ज़्यादा महंगाई तमिलनाडु में 6.81% रही। इसके बाद ओडिशा (6.70%), मध्य प्रदेश (6.68%) और तेलंगाना (6.64%) रहे। तमिलनाडु में खाद्य महंगाई 10.62% थी।

आरबीआई के लिए इसका मतलब

महंगाई अब भी भारतीय रिज़र्व बैंक के 2% से 6% के सहनशीलता दायरे में है, पर 4% के लक्ष्य से काफ़ी ऊपर है। जुलाई से सितंबर का औसत करीब 4.9% बैठता है, जो मौद्रिक नीति समिति के उस अनुमान के अनुरूप है जो उसने 7 अक्टूबर को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% करते समय दिया था। समिति को उम्मीद है कि अक्टूबर-दिसंबर में महंगाई 6.0% तक जाएगी और 2026-27 में औसतन 5.2% रहेगी।

अर्थशास्त्रियों को आगे और दबाव दिख रहा है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि “अक्टूबर 2025 के खाद्य महंगाई के प्रतिकूल आधार प्रभाव से अक्टूबर 2026 में खाद्य महंगाई 9.1% तक जा सकती है।” उन्हें अक्टूबर में खुदरा महंगाई करीब 6.0% रहने की उम्मीद है।

बैंक ऑफ़ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में महंगाई 6% के शिखर पर होगी। उन्होंने कहा, “इसलिए हमारी यह राय कायम है कि दिसंबर में एक और दर बढ़ोतरी की ज़रूरत होगी।” बैंक ऑफ़ बड़ौदा के अनुमान में सितंबर में कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते, 4.3% रही।

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, “हमें उम्मीद है कि आरबीआई दिसंबर 2026 में एक और दर बढ़ोतरी का रास्ता खुला रखेगा।”

100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर का कच्चा तेल और कमज़ोर रुपया जोखिम बढ़ा रहे हैं, हालांकि आरबीआई के सप्ताहांत के कदमों के बाद सोमवार को रुपया सुधरकर 95.78 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

आगे क्या

अक्टूबर के महंगाई आंकड़े 12 नवंबर को आएंगे। आरबीआई का अगला नीतिगत फ़ैसला दिसंबर में होना है।

मूल दस्तावेज़