अर्थव्यवस्थामहंगाई
सितंबर में थोक महंगाई 11.39% पर, नई सीरीज़ का सबसे ऊंचा स्तर
ईंधन, खाने-पीने की चीज़ें और कारखानों का माल, सब महंगे हुए। थोक स्तर पर कच्चा तेल और गैस एक साल पहले से 57% महंगे रहे, और आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के अनुमान से ऊपर निकला।

मुख्य बातें
- थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई अगस्त के 9.92% से बढ़कर सितंबर में 11.39% हो गई।
- ईंधन और बिजली के दाम एक साल पहले से 25.85% ऊपर रहे, सबसे ज़्यादा उछाल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस में।
- सूचकांक में करीब दो-तिहाई हिस्सा रखने वाले विनिर्मित उत्पादों की महंगाई 9.76% पर, सीरीज़ में सबसे ऊंची रही।
भारत में थोक कीमतें सितंबर में मौजूदा सीरीज़ की सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ीं, क्योंकि महंगे ईंधन का असर खाने-पीने की चीज़ों और कारखानों के माल तक फैल गया। वाणिज्य मंत्रालय के बुधवार को जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई अगस्त के 9.92% से बढ़कर 11.39% हो गई।
यह सूचकांक के नए 2022-23 आधार वर्ष पर आने के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है, और अनुमानों से काफ़ी ऊपर है। अगस्त के आंकड़े के बाद इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने सितंबर के लिए 10.2% और इक्रा ने 9.5% से 10% का अनुमान लगाया था। सूचकांक खुद एक महीने पहले के 110.8 से बढ़कर 112.5 पर पहुंच गया।
सबसे आगे ईंधन
ईंधन और बिजली के दाम एक साल पहले से 25.85% ऊंचे रहे, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 22.93% था। इस समूह में कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई पिछले महीने के 34.41% से उछलकर 57.32% हो गई, और खनिज तेलों, यानी रिफ़ाइंड ईंधन समूह, में 40.02% की बढ़त रही। कोयला और लिग्नाइट की महंगाई 1.57% से बढ़कर 9.31% हो गई। इस समूह में सिर्फ़ बिजली एक साल पहले से सस्ती रही, 0.43% नीचे।
यह दबाव पश्चिम एशिया के युद्ध से जुड़ा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आसपास हफ़्तों से टैंकरों पर हमलों के बाद बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल करीब 106 डॉलर प्रति बैरल पर था।
खाद्य और कारखानों का माल
खाने-पीने की चीज़ें भी महंगी हुईं। डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक 7.05% से बढ़कर 8.66% हो गया, और खाद्य वस्तुओं, यानी थोक मंडियों में बिकने वाली कच्ची उपज, की महंगाई 5.67% से बढ़कर 8.14% पर पहुंची, जो 21 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। विनिर्मित खाद्य उत्पादों की महंगाई थोड़ी घटकर 9.44% रही।
अर्थशास्त्रियों की बड़ी चिंता कारखानों को लेकर है। सूचकांक में 63.1% भार वाले विनिर्मित उत्पादों की महंगाई 8.37% से बढ़कर 9.76% हो गई, जो सीरीज़ में सबसे ज़्यादा है। बुनियादी धातुएं 16.96%, रसायन 16.74%, कपड़ा 13.85% और रबर व प्लास्टिक उत्पाद 13.47% महंगे हुए। कई महीनों तक दाम घटने के बाद कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स भी 4% की बढ़त पर आ गए।
प्राथमिक वस्तुओं की कुल महंगाई 8.67% रही, यह भी सीरीज़ का सबसे ऊंचा स्तर है, जबकि खनिजों में 9.51% की बढ़त रही। गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई 14.79% से घटकर 10.28% रह गई।
मंत्रालय डब्ल्यूपीआई के साथ वस्तुओं का जो नया उत्पादक मूल्य सूचकांक जारी करता है, उसमें भी महंगाई अगस्त के 9.81% से बढ़कर 11.39% रही।
बाज़ार और आरबीआई
कारोबारियों ने इस आंकड़े को इस संकेत के रूप में देखा कि महंगाई का दबाव फैल रहा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “उम्मीद से ज़्यादा गर्म घरेलू डब्ल्यूपीआई आंकड़े ने बॉन्ड यील्ड ऊपर धकेल दी।” उन्होंने कहा कि इससे मौद्रिक नीति के और सख़्त होने की चिंता बढ़ी है। सेंसेक्स 252 अंक गिरकर बंद हुआ।
थोक आंकड़ा खुदरा महंगाई के उछलकर सितंबर में 4.83% से 5.54% होने के दो दिन बाद आया है। थोक कीमतों में बढ़त आम तौर पर कुछ समय बाद दुकानों तक पहुंचती है, क्योंकि निर्माता और व्यापारी बढ़ी लागत खरीदारों पर डालते हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया था, जो फ़रवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी थी। उसकी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर को है, तब तक उसके पास अक्टूबर के खुदरा और थोक आंकड़े भी होंगे।