अर्थव्यवस्थामहंगाई
थोक महंगाई सितंबर में 10% पार कर सकती है, आंकड़े बुधवार को
ईंधन और बिजली के थोक दाम सालाना 20% से ज़्यादा की रफ़्तार से बढ़ रहे हैं। अर्थशास्त्रियों को थोक महंगाई के दहाई अंक में पहुंचने की उम्मीद है।

मुख्य बातें
- वाणिज्य मंत्रालय 14 अक्टूबर को सितंबर के थोक मूल्य आंकड़े जारी करेगा।
- अगस्त में थोक महंगाई 9.92% रही, जो जुलाई में 9.78% थी। ईंधन और बिजली की महंगाई 22.93% रही।
- इंडिया रेटिंग्स को सितंबर में 10.2% थोक महंगाई का अनुमान है, वजह पश्चिम एशिया संकट और प्रतिकूल आधार।
वाणिज्य मंत्रालय बुधवार, 14 अक्टूबर को सितंबर के आंकड़े जारी करेगा और थोक महंगाई के 10% पार करने की उम्मीद है, क्योंकि महंगा ईंधन लगातार कारख़ाने के स्तर पर दाम बढ़ा रहा है।
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई अगस्त में 9.92% रही, जो जुलाई में 9.78% थी। ईंधन और बिजली के दाम एक साल पहले से 22.93% ज़्यादा रहे, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 20.05% था। खाद्य सूचकांक 7.05% बढ़ा, जो 20 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई 8.37% रही।
मंत्रालय ने अगस्त में महंगाई बढ़ाने वाले मुख्य कारणों में खनिज तेल, खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पाद, बुनियादी धातुएं और रसायन गिनाए।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान
अगस्त के आंकड़ों के बाद इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने अनुमान लगाया कि सितंबर में थोक महंगाई बढ़कर 10.2% होगी और साल के बाकी महीनों में ऊंची बनी रहेगी, “जब तक लंबे खिंच रहे पश्चिम एशिया संकट का कोई स्थायी हल नहीं निकलता।”
उन्होंने बताया कि कपड़ा, रसायन, बुनियादी धातु और बिजली उपकरण समेत सात विनिर्माण समूहों में अगस्त में दहाई अंक की महंगाई रही। सूचकांक में इनका कुल वज़न 26.3% है, जिससे उनके मुताबिक संकेत मिलता है कि दबाव ज़्यादा ढांचागत होता जा रहा है।
इक्रा के प्रधान अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने सितंबर और अक्टूबर में थोक महंगाई 9.5-10% या उससे ज़्यादा रहने का अनुमान जताया, जिसके बाद “अनुकूल आधार के चलते यह नरम होगी”, बशर्ते वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी कीमतें और न बढ़ें।
यह क्यों अहम है
थोक आंकड़े सोमवार को आए खुदरा महंगाई के आंकड़े के बाद आएंगे, जो अगस्त के 4.83% से उछलकर सितंबर में 5.54% हो गई। ब्रेंट क्रूड रात में 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ और रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 97 पर है। दोनों से आयातित ईंधन और कच्चे माल की लागत बढ़ती है।
7 अक्टूबर को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% करने वाला भारतीय रिज़र्व बैंक इन दोनों आंकड़ों पर क़रीबी नज़र रखेगा।