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डेटा संरक्षण

भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम और नियम, चरणबद्ध समय-सीमाएं, और वह नियामक जिसमें अब तक नियुक्तियां नहीं हुईं।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (डीपीडीपी), 2023 तय करता है कि संस्थाएं लोगों का डिजिटल रूप में मौजूद व्यक्तिगत डेटा कैसे इकट्ठा और इस्तेमाल करें। इसके नियम नवंबर 2025 में अधिसूचित हुए और ये कानून को 18 महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू करते हैं।

अभी क्या स्थिति है

भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड के गठन से जुड़े प्रावधान नियम अधिसूचित होते ही लागू हो गए थे। लेकिन बोर्ड में अब भी न अध्यक्ष है, न सदस्य। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 6 मई 2026 को एक अध्यक्ष और चार सदस्यों के लिए आवेदन मांगे, और 6 जून को इन पदों का विज्ञापन निकला। 11 अक्टूबर 2026 तक किसी नियुक्ति की खबर नहीं आई थी।

सहमति प्रबंधक की व्यवस्था 13 नवंबर 2026 से शुरू होगी। इसके ज़रिए लोग एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग सेवाओं को दी गई अपनी सहमति संभाल सकेंगे। संस्थाओं पर ज़्यादातर ज़िम्मेदारियां, और बोर्ड की जांच करने व जुर्माना लगाने की ताकत, 13 मई 2027 से लागू होंगी।

लाइवलॉ के मुताबिक, बोर्ड की नियुक्तियों के लिए दो खोज-सह-चयन समितियां काम कर रही हैं, जिनमें से एक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव कर रहे हैं। कानून के तहत कम से कम एक सदस्य का कानूनी विशेषज्ञ होना ज़रूरी है। जब तक सदस्य नियुक्त नहीं होते, बोर्ड न कोई शिकायत सुन सकता है, न आदेश दे सकता है। बोर्ड काम शुरू करने के बाद जो फैसले देगा, उनके खिलाफ अपील दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) में होगी।

अहम तारीखें

  1. 2023डीपीडीपी अधिनियम पारित
  2. नवंबर 2025नियम अधिसूचित; कानूनन बोर्ड का गठन
  3. 6 मई 2026MeitY ने बोर्ड के पदों के लिए आवेदन मांगे
  4. 13 नवंबर 2026सहमति प्रबंधक की व्यवस्था शुरू
  5. 13 मई 2027ज़्यादातर ज़िम्मेदारियां और बोर्ड की जुर्माना लगाने की ताकत लागू

अहम आंकड़े

  • 90 दिनकिसी अधिकार संबंधी अनुरोध का जवाब देने के लिए संस्था के पास अधिकतम समय
  • ₹250 करोड़अधिकतम जुर्माना, सुरक्षा उपाय न रखने पर
  • 0ताज़ा खबरों तक नियुक्त बोर्ड सदस्य
  • 18 महीनेनियमों के तहत चरणबद्ध अनुपालन की अवधि

मुख्य सवाल

डीपीडीपी कानून में मुझे क्या अधिकार मिलते हैं? आप अपने डेटा की कॉपी मांग सकते हैं, उसे सुधरवा या अपडेट करवा सकते हैं, उसे मिटाने को कह सकते हैं, अपनी ओर से काम करने के लिए किसी को नामित कर सकते हैं, और संस्था व बोर्ड से शिकायत कर सकते हैं।

क्या अभी डेटा संरक्षण बोर्ड में शिकायत कर सकते हैं? व्यवहार में नहीं। जैसा लाइवलॉ और इंडिया डेटा लॉ बताते हैं, बिना सदस्यों वाला बोर्ड शिकायतें नहीं सुन सकता और आदेश नहीं दे सकता।

सहमति प्रबंधक क्या होता है? भारत में स्थित एक कंपनी, जो एक प्लेटफॉर्म चलाती है जिस पर लोग अलग-अलग सेवाओं के लिए सहमति दे सकते हैं, देख सकते हैं और वापस ले सकते हैं। यह बोर्ड की निगरानी में काम करती है।

बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील कहां होगी? दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण में।

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