समझिएडेटा संरक्षण
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम में आपके अधिकार
भारत का डेटा संरक्षण कानून आपको अपना डेटा देखने, सुधारने और मिटवाने, और दुरुपयोग होने पर शिकायत करने का हक देता है। इसका ज़्यादातर हिस्सा मई 2027 में लागू होगा, और नियामक में अभी कोई सदस्य नहीं है।
संक्षेप में
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और इसके 2025 के नियमों के तहत आप किसी संस्था से अपने व्यक्तिगत डेटा की कॉपी मांग सकते हैं, उसे सुधरवा या मिटवा सकते हैं, अपनी ओर से काम करने के लिए किसी को नामित कर सकते हैं, और डेटा संरक्षण बोर्ड से शिकायत कर सकते हैं। संस्थाओं को 90 दिन में जवाब देना होगा। ज़्यादातर ज़िम्मेदारियां 13 मई 2027 से लागू होंगी, और अक्टूबर 2026 की स्थिति में बोर्ड में कोई सदस्य नहीं है।
डीपीडीपी अधिनियम क्या है?
यह भारत का वह कानून है जो तय करता है कि संस्थाएं आपका डिजिटल व्यक्तिगत डेटा कैसे जुटाएं और इस्तेमाल करें। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम 2023 में पारित हुआ, और इसे व्यवहार में लागू करने वाले नियम सरकार ने नवंबर 2025 में अधिसूचित किए। नियम संस्थाओं को पालन के लिए चरणों में 18 महीने का समय देते हैं।
कानून आपको “डेटा प्रिंसिपल” कहता है और आपके डेटा के इस्तेमाल का फैसला करने वाली संस्था को “डेटा फिड्यूशरी”। जो भी संस्था डिजिटल रूप में व्यक्तिगत डेटा जुटाती और प्रोसेस करती है, और तय करती है कि उसका इस्तेमाल कैसे होगा, वह दूसरे समूह में आती है।
डीपीडीपी अधिनियम में मेरे क्या अधिकार हैं?
आप अपने डेटा की कॉपी मांग सकते हैं, उसे सुधरवा या अपडेट करवा सकते हैं, उसे मिटाने को कह सकते हैं, और अपनी ओर से काम करने के लिए किसी को नामित कर सकते हैं। नियमों पर सरकार की पृष्ठभूमि टिप्पणी में ये अधिकार गिनाए गए हैं:
- डेटा देखने का अधिकार: किसी संस्था से आपके बारे में उसके पास मौजूद व्यक्तिगत डेटा की कॉपी मांगना।
- सुधार और अपडेट: गलत या अधूरा डेटा ठीक करवाना, या नया पता जैसा कोई बदलाव दर्ज करवाना।
- मिटवाना: कुछ स्थितियों में अपना डेटा हटाने को कहना।
- नामांकन: अपनी ओर से इन अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए किसी को नियुक्त करना।
- शिकायत: संस्था के संपर्क अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराना, और डेटा संरक्षण बोर्ड में शिकायत करना।
डेटा देखने, सुधारने, अपडेट करने या मिटाने के अनुरोधों का जवाब संस्थाओं को 90 दिन के भीतर देना होगा।
मेरा डेटा लेने से पहले कंपनियों को मुझे क्या बताना होगा?
उन्हें एक अलग सहमति नोटिस देना होगा जिसमें साफ लिखा हो कि डेटा किस काम के लिए है। इसमें वह खास मकसद बताना होगा जिसके लिए डेटा जुटाया और इस्तेमाल किया जा रहा है। संस्थाओं को व्यक्तिगत डेटा से जुड़े सवालों के लिए संपर्क का ब्योरा भी दिखाना होगा, जैसे कोई नामित अधिकारी या डेटा संरक्षण अधिकारी।
आप सहमति प्रबंधक के ज़रिए भी सहमति दे सकते हैं, उसकी समीक्षा कर सकते हैं और उसे वापस ले सकते हैं। यह भारत में स्थित एक कंपनी होती है जो अलग-अलग सेवाओं में सहमति संभालने के लिए एक ही, पारदर्शी और आपस में जुड़ सकने वाला प्लेटफॉर्म चलाती है, और डेटा संरक्षण बोर्ड की निगरानी में काम करती है। सहमति प्रबंधक की व्यवस्था 13 नवंबर 2026 से शुरू होगी।
मेरा डेटा लीक हो जाए तो क्या होगा?
संस्था को आपको बिना देर किए, आसान भाषा में बताना होगा कि क्या हुआ और आपके लिए इसका क्या मतलब है। नोटिस में संभावित असर, उठाए गए कदम और मदद के लिए किससे संपर्क करें, यह सब होना चाहिए। संस्थाओं को डेटा उल्लंघन की जानकारी डेटा संरक्षण बोर्ड को भी देनी होगी।
अधिनियम में सबसे भारी जुर्माना सुरक्षा में चूक पर है।
डीपीडीपी अधिनियम में अधिकतम जुर्माना
- ₹250 करोड़उचित सुरक्षा उपाय न रखने पर
- ₹200 करोड़डेटा उल्लंघन की जानकारी न देने, या बच्चों के डेटा से जुड़ी ज़िम्मेदारियां तोड़ने पर
- ₹50 करोड़कोई अन्य उल्लंघन
बच्चों के डेटा के लिए क्या नियम हैं?
किसी बच्चे का डेटा प्रोसेस करने से पहले संस्थाओं को माता-पिता या कानूनी अभिभावक की ऐसी सहमति लेनी होगी जिसकी पुष्टि हो सके। सरकार की पृष्ठभूमि टिप्पणी के मुताबिक, नियम उन मामलों में छूट देते हैं जहां प्रोसेसिंग स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा या तत्काल सुरक्षा जैसी ज़रूरी सेवाओं से जुड़ी हो।
डेटा के दुरुपयोग की शिकायत कहां करें?
संस्था के नामित संपर्क अधिकारी और डेटा संरक्षण बोर्ड से; बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) में होती है। सरकार का कहना है कि बोर्ड पूरी तरह डिजिटल होगा, जहां शिकायतें एक पोर्टल और मोबाइल ऐप के ज़रिए ऑनलाइन दर्ज और ट्रैक होंगी।
लेकिन एक दिक्कत है। अक्टूबर 2026 की स्थिति में बोर्ड में न कोई अध्यक्ष है, न कोई सदस्य। लाइवलॉ के मुताबिक, बोर्ड नवंबर 2025 में कानूनी रूप से बना, और नियुक्तियों का काम दो खोज-सह-चयन समितियां देख रही हैं, जिनमें से एक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करते हैं। लाइवलॉ और इंडिया डेटा लॉ ट्रैकर के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मई 2026 में आवेदन मंगाए थे, लेकिन कोई नियुक्ति घोषित नहीं हुई है। बिना सदस्यों वाला बोर्ड न शिकायतें सुन सकता है, न आदेश दे सकता है।
क्या बड़ी कंपनियों पर ज़्यादा सख्त नियम लागू होते हैं?
हां, जिन संस्थाओं को सरकार महत्वपूर्ण डेटा फिड्यूशरी की श्रेणी में रखती है, उन पर अतिरिक्त ज़िम्मेदारियां हैं। सरकार की पृष्ठभूमि टिप्पणी के मुताबिक, उन्हें स्वतंत्र ऑडिट कराना होगा और असर का आकलन करना होगा, नई या संवेदनशील तकनीकों पर ज़्यादा सख्त जांच लागू करनी होगी, और प्रतिबंधित डेटा पर सरकार के निर्देश मानने होंगे, जिसमें ज़रूरत होने पर उसे भारत में ही रखना शामिल है।
कानून के दायरे में आने वाली सभी संस्थाओं को उचित सुरक्षा उपाय रखने होंगे, और इसी में चूक पर ₹250 करोड़ का सबसे ऊंचा जुर्माना लगता है।
डीपीडीपी अधिनियम के अधिकार असल में कब से लागू होंगे?
संस्थाओं की ज़्यादातर ज़िम्मेदारियां, और बोर्ड की जांच करने और जुर्माना लगाने की शक्तियां, 13 मई 2027 से लागू होंगी। नियमों के तहत बोर्ड अधिसूचना के साथ ही बन गया, सहमति प्रबंधक की व्यवस्था एक साल बाद शुरू होगी, और ज़्यादातर दूसरी ज़िम्मेदारियां 18 महीने बाद लागू होंगी।
डीपीडीपी नियम: क्या कब लागू होगा
- 2023डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम पारित
- नवंबर 2025नियम अधिसूचित; डेटा संरक्षण बोर्ड कानूनी रूप से गठित
- 13 नवंबर 2026सहमति प्रबंधक की व्यवस्था शुरू
- 13 मई 2027ज़्यादातर ज़िम्मेदारियां लागू, बोर्ड की जांच और जुर्माना लगाने की शक्तियां भी
मूल दस्तावेज़
- DPDP Rules, 2025 Notified (backgrounder)Press Information Bureau, 17 नवंबर 2025