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SL3, SH6, T44: एशियाई पैरा खेलों में वर्गीकरण कैसे तय करता है कि कौन किससे मुकाबला करेगा

भारत के पैरा खिलाड़ियों ने शुक्रवार को आइची में मुकाबले शुरू कर दिए, और लगभग हर स्पर्धा के नाम में एक कोड जुड़ा है। ये अक्षर और अंक पैरा खेलों की बुनियाद हैं: ये खिलाड़ियों को इस आधार पर समूहों में बांटते हैं कि उनकी अक्षमता खेल पर कितना असर डालती है, ताकि नतीजा हुनर से तय हो।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

वर्गीकरण वह व्यवस्था है जो तय करती है कि कौन से पैरा खिलाड़ी आपस में मुकाबला करेंगे। खिलाड़ी में दस मान्य प्रकार की अक्षमताओं में से कम से कम एक होनी चाहिए, वह हर खेल की तय न्यूनतम अक्षमता की शर्त पूरी करे, और फिर उसे इस आधार पर एक स्पोर्ट क्लास दी जाती है कि अक्षमता उस खेल पर कितना असर डालती है। इसी वजह से 18 खेलों वाले एशियाई पैरा खेलों में 492 पदक स्पर्धाएं हैं, और सुहास यतिराज SL4 वर्ग में बैडमिंटन खेलते हैं जबकि कृष्णा नागर SH6 में।

वर्गीकरण क्या है?

यह वह व्यवस्था है जो तय करती है कि कौन से पैरा खिलाड़ी एक-दूसरे से मुकाबला करेंगे।

सामान्य खेलों में खिलाड़ियों को मुख्य रूप से लिंग के आधार पर, और कभी-कभी उम्र या वजन के आधार पर बांटा जाता है। पैरा खेलों में खिलाड़ियों की अक्षमताएं बहुत अलग-अलग होती हैं, और उनका प्रदर्शन पर असर भी। घुटने के नीचे एक कृत्रिम पैर वाले धावक और दोनों पैरों की मांसपेशियों पर कमज़ोर नियंत्रण वाले धावक को एक ही पदक के लिए नहीं दौड़ना चाहिए।

पैरालंपिक्स न्यूज़ीलैंड के शब्दों में, वर्गीकरण खिलाड़ियों को इस तरह बांटता है कि “खिलाड़ी की सफलता हुनर, फिटनेस, ताकत, सहनशक्ति, रणनीतिक क्षमता और मानसिक एकाग्रता से तय हो”, न कि अक्षमता की मात्रा से।

कौन पात्र है?

सिर्फ वे खिलाड़ी जिनमें दस मान्य प्रकार की अक्षमताओं में से कम से कम एक हो।

ये दस हैं: मांसपेशियों की कमज़ोर ताकत, जोड़ों में सीमित गति, किसी अंग का न होना या अधूरा होना, पैरों की लंबाई में अंतर, छोटा कद, मांसपेशियों में अकड़न, असंतुलित हरकत, अनैच्छिक हरकतें, दृष्टि बाधा और बौद्धिक अक्षमता। कुछ खेल इनमें से कुछ ही अक्षमताओं वाले खिलाड़ियों को लेते हैं। ब्लाइंड फुटबॉल, जिसमें भारत ने शुक्रवार सुबह दक्षिण कोरिया से मुकाबला किया, दृष्टि बाधित खिलाड़ियों के लिए है।

सिर्फ मान्य अक्षमता होना काफी नहीं है। हर खेल न्यूनतम अक्षमता का एक स्तर भी तय करता है, ताकि खिलाड़ी पर उसका इतना असर हो कि उस खेल में फर्क पड़े।

खिलाड़ी का वर्ग कौन तय करता है?

प्रशिक्षित क्लासिफायर्स के पैनल, जिनमें चिकित्सा और तकनीकी विशेषज्ञ होते हैं।

वे खिलाड़ी की जांच करते हैं और देखते हैं कि वह खेल की बुनियादी हरकतें कैसे करता है, जैसे रैकेट पकड़ना, कोर्ट पर घूमना या बैठकर फेंकना। इसके बाद खिलाड़ी को एक स्पोर्ट क्लास दी जाती है। चूंकि आकलन खेल से जुड़ा होता है, इसलिए एक ही खिलाड़ी एक खेल में पात्र हो सकता है और दूसरे में नहीं, या दो खेलों में अलग-अलग वर्गों में हो सकता है।

बैडमिंटन में इन कोड का क्या मतलब है?

ये बताते हैं कि खिलाड़ी कोर्ट पर कैसे चलता-फिरता है। पैरा बैडमिंटन में छह वर्ग हैं, और आइची में भारत के खिलाड़ी इनमें बंटे हुए हैं।

पैरा बैडमिंटन के छह वर्ग

कौन खेलता हैआइची में भारतीय नाम
WH1
गंभीर अक्षमता वाले व्हीलचेयर खिलाड़ी
पहले दिन के नामों में कोई नहीं
WH2
कम अक्षमता वाले व्हीलचेयर खिलाड़ी
पहले दिन के नामों में कोई नहीं
SL3
खड़े होकर, पैरों में गंभीर अक्षमता
मानसी जोशी
SL4
खड़े होकर, पैरों में कम अक्षमता
सुहास यतिराज
SU5
खड़े होकर, हाथ या बांह में अक्षमता
SL3 और SL4 खिलाड़ियों के साथ डबल्स
SH6
खड़े होकर, छोटा कद
कृष्णा नागर

पहले दिन सुहास ने SL4 एकल में बांग्लादेश के जे. धर के खिलाफ शुरुआत की, मानसी जोशी SL3 में चीन की एल. युएमेई से भिड़ीं, और कृष्णा नागर SH6 में चीनी ताइपे के जे. लिन के सामने उतरे। पुरुषों के SL3-SU5 डबल्स में भारत का एक आपसी मुकाबला भी था। यह ऐसी स्पर्धा है जिसमें एक जोड़ी में खड़े होकर खेलने वाले अलग-अलग वर्गों के खिलाड़ी होते हैं।

टेबल टेनिस और एथलेटिक्स में क्या होता है?

टेबल टेनिस में 11 वर्ग हैं, एथलेटिक्स में एक अक्षर और एक अंक।

पैरा टेबल टेनिस में वर्ग 1 से 5 व्हीलचेयर पर बैठकर खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए हैं, 6 से 10 खड़े होकर खेलने वालों के लिए, और 11 बौद्धिक अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिए। भारत की ध्वजवाहकों में से एक भाविना पटेल महिलाओं के क्लास 4-5 एकल में उतरी हैं। जब किसी वर्ग में निष्पक्ष स्पर्धा के लिए खिलाड़ी कम हों, तो आयोजक पास-पास के वर्गों को मिलाकर एक स्पर्धा बना सकते हैं।

पैरा एथलेटिक्स में T का मतलब ट्रैक और कूद स्पर्धाएं है और F का मतलब फील्ड स्पर्धाएं। अंक अक्षमता का समूह बताता है: दृष्टि बाधा के लिए 11 से 13, बौद्धिक अक्षमता के लिए 20, तालमेल से जुड़ी अक्षमताओं के लिए 31 से 38, छोटे कद या अंगों की अक्षमता के लिए 40 से 47, व्हीलचेयर रेस और बैठकर फेंकने के लिए 51 से 58, और कृत्रिम पैर इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ियों के लिए 61 से 64।

इतनी पदक स्पर्धाएं क्यों हैं?

क्योंकि हर वर्ग का अपना पोडियम होता है।

आइची-नागोया खेलों में 18 खेल हैं लेकिन 492 पदक स्पर्धाएं, और 45 देश हिस्सा ले रहे हैं। अकेले एथलेटिक्स में कई वर्गों की अलग-अलग 100 मीटर दौड़ होती है। इसी वजह से भारत का 168 खिलाड़ियों का दल, जिसमें सबसे बड़ा समूह पैरा एथलेटिक्स के 62 खिलाड़ियों का है, अपने आकार के हिसाब से सामान्य खेलों की तुलना में कहीं ज़्यादा पदक जीत सकता है।

क्या इस व्यवस्था पर कभी विवाद होता है?

हां, और यह पैरा खेलों का सबसे ज़्यादा बहस वाला हिस्सा है।

जिस खिलाड़ी को कम अक्षमता वाले प्रतिद्वंद्वियों के वर्ग में रखा जाए, वह नुकसान में रहता है, और जिसे ज़्यादा अक्षमता वाले प्रतिद्वंद्वियों के साथ रखा जाए, उसे बढ़त मिलती है। चूंकि वर्ग इस बात का आकलन है कि अक्षमता किसी खेल पर कैसे असर डालती है, इसलिए करीबी मामलों पर खिलाड़ी और प्रतिद्वंद्वी टीमें हमेशा बहस करेंगी। आइची में भी, पैरालंपिक की तरह, लक्ष्य कहने में आसान और हासिल करने में मुश्किल है: ऐसी दौड़ या रैली जो क्षमता के दम पर जीती जाए।

मूल दस्तावेज़