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डीपीडीपी: 13 नवंबर से सहमति प्रबंधक शुरू, लेकिन डेटा संरक्षण बोर्ड में एक भी सदस्य नहीं

भारत के डेटा संरक्षण नियमों का दूसरा चरण अगले महीने शुरू होगा। इसकी निगरानी करने वाले नियामक में आवेदन मंगाए जाने के पांच महीने बाद भी न अध्यक्ष है, न सदस्य।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
अपना स्मार्टफोन देखता एक व्यक्ति
अपना स्मार्टफोन देखता एक व्यक्तिBhullargraphic / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के तहत सहमति प्रबंधकों का ढांचा 13 नवंबर 2026 से शुरू होगा, यानी नियम अधिसूचित होने के एक साल बाद।
  2. लाइवलॉ और इंडिया डेटा लॉ ट्रैकर के मुताबिक भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड नवंबर 2025 में कानूनी रूप से गठित हो गया था, लेकिन उसमें कोई अध्यक्ष या सदस्य नहीं है।
  3. इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) ने 6 मई 2026 को एक अध्यक्ष और चार सदस्यों के लिए आवेदन मंगाए थे; अब तक किसी नियुक्ति का एलान नहीं हुआ है।
  4. कंपनियों पर ज़्यादातर दायित्व, और ₹250 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का बोर्ड का अधिकार, 13 मई 2027 से लागू होंगे।

भारत के डेटा संरक्षण कानून के तहत सहमति प्रबंधकों का ढांचा 13 नवंबर 2026 से शुरू हो रहा है। लाइवलॉ और इंडिया डेटा लॉ ट्रैकर के मुताबिक, जिस डेटा संरक्षण बोर्ड को इनकी निगरानी करनी है, उसमें अब भी न कोई अध्यक्ष है और न ही कोई सदस्य।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 नवंबर 2025 में अधिसूचित हुए थे और 18 महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू हो रहे हैं। बोर्ड के गठन से जुड़े प्रावधान अधिसूचना के साथ ही लागू हो गए थे। सहमति प्रबंधकों का ढांचा एक साल बाद शुरू हो रहा है, और कंपनियों पर ज़्यादातर दायित्व 13 मई 2027 से लागू होंगे।

सहमति प्रबंधक क्या करते हैं

सहमति प्रबंधक ऐसी कंपनियां हैं जो लोगों को एक ही प्लेटफॉर्म देती हैं, जहां वे अपने व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल के लिए सहमति दे सकें, उसे संभाल सकें, उसकी समीक्षा कर सकें और उसे वापस ले सकें। नियमों पर सरकार के पृष्ठभूमि दस्तावेज़ (बैकग्राउंडर) के मुताबिक, इनका भारत में स्थित कंपनी होना ज़रूरी है और ये बोर्ड की निगरानी में काम करते हैं।

बोर्ड सिर्फ़ कागज़ पर

नियम अधिसूचित होते ही बोर्ड कानूनी रूप से गठित हो गया था। इंडिया डेटा लॉ के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) ने 6 मई 2026 के एक सर्कुलर में एक अध्यक्ष और चार सदस्यों के लिए आवेदन मंगाए, और इसके बाद 6 जून को भर्ती का विज्ञापन आया।

लाइवलॉ की रिपोर्ट के मुताबिक नियुक्तियों के लिए दो सर्च-कम-सेलेक्शन समितियां काम कर रही हैं: अध्यक्ष के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति और सदस्यों के लिए मेइटी सचिव की अध्यक्षता वाली समिति। इंडिया डेटा लॉ के मुताबिक 12 अगस्त को लोकसभा में एक लिखित जवाब में विज्ञापन की पुष्टि की गई थी।

जिस बोर्ड में कोई सदस्य न हो, वह न बेंच बना सकता है, न किसी पक्ष की सुनवाई कर सकता है, और न ही कोई आदेश, तर्कसंगत या अन्यथा, पर हस्ताक्षर कर सकता है।

राघवेंद्र कुमार चौधरी, कानून के सहायक प्रोफेसर, क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), लाइवलॉ में लेख, 1 अगस्त 2026

बोर्ड की स्थिति की हर महीने जांच करने वाले इंडिया डेटा लॉ का कहना है कि बोर्ड “न कोई शिकायत ले सकता है और न ही कोई आदेश पारित कर सकता है”। लोकवॉक्स को 11 अक्टूबर 2026 तक किसी नियुक्ति की कोई खबर नहीं मिली।

डीपीडीपी नियम: चरणबद्ध घटनाक्रम

  1. नवंबर 2025नियम अधिसूचित; डेटा संरक्षण बोर्ड के गठन से जुड़े प्रावधान लागू
  2. 6 मई 2026मेइटी ने एक अध्यक्ष और चार सदस्यों के लिए आवेदन मंगाए
  3. 6 जून 2026भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित
  4. 13 नवंबर 2026सहमति प्रबंधकों का ढांचा शुरू
  5. 13 मई 2027कंपनियों पर ज़्यादातर दायित्व लागू, साथ ही बोर्ड के जांच करने और जुर्माना लगाने के अधिकार भी

मई 2027 से पहले यह क्यों अहम है

इंडिया डेटा लॉ के मुताबिक, 13 मई 2027 से उल्लंघनों की जांच करने और जुर्माना लगाने के बोर्ड के अधिकार लागू हो जाएंगे। पीआईबी के बैकग्राउंडर के मुताबिक, अधिनियम के तहत उचित सुरक्षा उपाय न रखने पर ₹250 करोड़ तक, और उल्लंघन (ब्रीच) की सूचना न देने या बच्चों के डेटा से जुड़े दायित्व पूरे न करने पर ₹200 करोड़ तक का जुर्माना लग सकता है।

कंपनियों को व्यक्तिगत डेटा के उल्लंघन की सूचना भी बोर्ड को देनी होगी। बोर्ड के फैसलों के खिलाफ अपील दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) में होगी।

डेटा संरक्षण बोर्ड

  • 1 + 4मई 2026 में मेइटी ने अध्यक्ष और सदस्य मांगे
  • 011 अक्टूबर 2026 तक घोषित नियुक्तियां
  • ₹250 करोड़अधिकतम जुर्माना, उचित सुरक्षा उपाय न रखने पर

क्या अब भी साफ़ नहीं है

लोकवॉक्स को मेइटी का ऐसा कोई सार्वजनिक बयान नहीं मिला, जिसमें बताया गया हो कि नियुक्तियां कब होंगी। सरकार कह चुकी है कि बोर्ड एक डिजिटल दफ़्तर की तरह काम करेगा, जहां शिकायतें एक पोर्टल और ऐप के ज़रिये ऑनलाइन दर्ज और ट्रैक होंगी; लेकिन जब तक सदस्य नियुक्त नहीं होते, यह व्यवस्था मामलों की सुनवाई नहीं कर सकती।

मूल दस्तावेज़