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आरबीआई का नया नियम: बैंकों को रोज़ रखना होगा तय सीआरआर का 99%

16 अक्टूबर से बैंक किसी भी दिन अपने नकद आरक्षित अनुपात से ज़्यादा नीचे नहीं जा सकेंगे। आरबीआई 13 अक्टूबर को ₹25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड भी बेचेगा।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
मुंबई में भारतीय रिज़र्व बैंक के मुख्यालय की इमारत
मुंबई में भारतीय रिज़र्व बैंक के मुख्यालय की इमारतGangaasoonu / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े से बैंकों को हर दिन तय सीआरआर का कम से कम 99% रखना होगा, अभी यह सीमा 90% है।
  2. पूरे पखवाड़े का औसत अब भी 3% के तय सीआरआर के बराबर होना चाहिए, और इस रकम पर बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलता।
  3. रेपो रेट 5.50% होने के अगले दिन, 8 अक्टूबर को ₹3.88 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी आरबीआई के पास जमा थी।
  4. आरबीआई 13 अक्टूबर को ₹25,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियां बेचेगा और नकदी सोखने के लिए कई रिवर्स रेपो नीलामियां कर चुका है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों से कहा है कि उन्हें रिपोर्टिंग पखवाड़े के हर दिन अपने तय नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) का कम से कम 99% रखना होगा। अभी यह न्यूनतम सीमा 90% है। नया नियम 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े से लागू होगा।

आरबीआई ने यह बदलाव 9 अक्टूबर को अधिसूचित किया। इससे दो दिन पहले मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया था। उसी दिन आरबीआई ने 13 अक्टूबर को खुले बाज़ार परिचालन (ओएमओ) के ज़रिए ₹25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने का भी ऐलान किया। दोनों कदमों का मकसद बैंकिंग व्यवस्था से अतिरिक्त नकदी निकालना है।

बैंकों के लिए क्या बदलेगा

हर बैंक को अपनी जमा राशि का एक तय हिस्सा नकद के रूप में आरबीआई के पास रखना होता है। इसे सीआरआर कहते हैं। यह अभी 3% है और इस पर बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलता।

यह 3% पूरे पखवाड़े के औसत के रूप में गिना जाता है। अब तक बैंक कुछ दिनों में अपना बैलेंस ज़रूरत के 90% तक गिरने दे सकते थे, बशर्ते औसत पूरा रहे। 16 अक्टूबर से रोज़ की यह न्यूनतम सीमा 99% हो जाएगी। पखवाड़े का औसत अब भी कम से कम 3% होना चाहिए।

यानी बैंकों के पास किसी एक दिन सीआरआर बैलेंस घटाकर वह पैसा दूसरी जगह इस्तेमाल करने की गुंजाइश कम रह जाएगी।

आरबीआई ऐसा क्यों कर रहा है

बैंकों के पास ज़रूरत से कहीं ज़्यादा नकदी है। 8 अक्टूबर को आरबीआई की चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकों की ₹3.88 लाख करोड़ की अतिरिक्त राशि जमा थी।

इस अतिरिक्त नकदी के कारण अल्पकालिक ब्याज दरें रेपो रेट से नीचे बनी हुई हैं। 9 अक्टूबर को भारित औसत कॉल दर, यानी वह दर जिस पर बैंक एक-दूसरे को रातभर के लिए कर्ज़ देते हैं, 5.31% थी, जो 5.50% के रेपो रेट से कम है। अगस्त की नीति समीक्षा के बाद से यह औसतन नीतिगत दर से करीब 14 बेसिस पॉइंट नीचे रही है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर के अपने नीति वक्तव्य में कहा था कि आरबीआई कॉल दर को रेपो रेट के अनुरूप लाने के लिए चलनिधि के कई उपायों का इस्तेमाल करेगा।

नकदी सोखने के दूसरे कदम

आरबीआई कई हफ़्तों से नकदी निकाल रहा है। सितंबर में उसने ओएमओ के ज़रिए ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचे, जो 17, 21 और 28 सितंबर को तीन किस्तों में बिके। 13 अक्टूबर की बिक्री में 2030 से 2034 के बीच परिपक्व होने वाली छह प्रतिभूतियां शामिल हैं।

आरबीआई ने वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामियां भी की हैं, जिनमें बैंक तय अवधि के लिए केंद्रीय बैंक के पास पैसा रखते हैं। तीन दिन की एक नीलामी में ₹1.5 लाख करोड़ की पेशकश के मुकाबले करीब ₹1.4 लाख करोड़ आए। 10 दिन की नीलामी में ₹18,170 करोड़ आए। 12 अक्टूबर को ₹2 लाख करोड़ की तीन दिन की नीलामी तय है।

पहले भी ऐसा हो चुका है

आरबीआई ने पिछली बार जुलाई 2013 में रोज़ की न्यूनतम सीमा 99% की थी। तब अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व के बॉन्ड ख़रीद घटाने के संकेत के बाद वह विदेशी मुद्रा बाज़ार को संभालने की कोशिश कर रहा था।

रोज़ाना न्यूनतम सीआरआर

  1. जुलाई 2013विदेशी मुद्रा बाज़ार में उतार-चढ़ाव के दौरान ज़रूरत का 99% किया गया
  2. सितंबर 2013घटाकर 95% किया गया
  3. अप्रैल 2016घटाकर 90% किया गया
  4. 9 अक्टूबर 2026आरबीआई ने फिर 99% करने की अधिसूचना जारी की
  5. 16 अक्टूबर 2026इस पखवाड़े से 99% की नई सीमा लागू

कर्ज़ लेने वालों पर असर

इस कदम से पहले ही कर्ज़ की दरें बढ़ने लगी थीं। रेपो रेट बढ़ने के बाद कई सरकारी बैंकों ने अपनी रेपो-आधारित उधार दरें 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा दीं। बैंक ऑफ़ बड़ौदा की दर 7.90% से 8.15% हो गई। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ़ इंडिया और इंडियन ओवरसीज़ बैंक की दर 8.10% से 8.35% और इंडियन बैंक की 7.95% से 8.20% हो गई।

बाहरी बेंचमार्क से जुड़े मौजूदा कर्ज़ आम तौर पर तीन महीने के भीतर नई दर पर आ जाते हैं।

आगे क्या

ओएमओ बिक्री 13 अक्टूबर को है। सीआरआर की नई सीमा 16 अक्टूबर से लागू होगी। अक्टूबर की नीति बैठक का ब्योरा (मिनट्स) 21 अक्टूबर को आएगा और एमपीसी की अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर 2026 को होगी।

मूल दस्तावेज़