LokVox

नीतिविदेश मामले

मतदाता सूची पर अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणी 'अनुचित और अज्ञानपूर्ण': विदेश मंत्रालय

जयपाल ने 13 करोड़ मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश पर गहरी चिंता जताई थी। वॉशिंगटन में भारत के राजदूत ने इसे अस्वीकार्य दखल बताया।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: U.S. House Office of Photography / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जयपाल की टिप्पणी को "अनुचित और अज्ञानपूर्ण" बताया।
  2. जयपाल ने लिखा था कि भारत सरकार 13 करोड़ लोगों को मतदाता सूची से हटाना चाहती है।
  3. राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इसे अस्वीकार्य दखल कहा।

भारत ने शुक्रवार को मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण पर अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणी को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने इसे “अनुचित और अज्ञानपूर्ण” बताया।

वॉशिंगटन राज्य से डेमोक्रेट सांसद जयपाल ने एक्स पर लिखा था: “मैं भारत सरकार की उन कार्रवाइयों को लेकर बेहद चिंतित हूं जिनसे 13 करोड़ लोगों को मतदाता सूची से हटाया जा रहा है।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में ब्रीफिंग में कहा, “हम कांग्रेसवुमन की टिप्पणियों को अनुचित और अज्ञानपूर्ण मानते हैं।” उन्होंने इसे एक साथी लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया में दखल बताया और कहा, “यह ऐसा रवैया है जो खुद लोकतंत्र को कमज़ोर करता है।”

राजदूत का जवाब

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिकी समय के मुताबिक गुरुवार को ही एक्स पर जवाब दे दिया था। उन्होंने लिखा, “भारत की चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर प्रतिनिधि जयपाल की टिप्पणियां अस्वीकार्य दखल हैं।” उन्होंने कहा, “भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जिसकी संवैधानिक संस्थाएं मज़बूत और स्वतंत्र हैं,” और देश में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनावों के लंबे इतिहास का ज़िक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि वे जयपाल से रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार हैं।

जयपाल का जन्म चेन्नई में हुआ था और वे कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वे पहले भी नई दिल्ली से टकरा चुकी हैं, खासकर कश्मीर में संचार पाबंदियों पर 2019 के एक अमेरिकी संसद प्रस्ताव को लेकर।

देश में सूची पुनरीक्षण

चुनाव आयोग देशभर में चरणबद्ध तरीके से मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कर रहा है, और इस पर अदालतों से लेकर सड़कों तक विवाद हुआ है। आयोग का कहना है कि अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे मतदाताओं की सूचियां सार्वजनिक रूप से लगाई गईं और राजनीतिक दलों को दी गईं, और जिनका नाम हटा है वे कभी भी दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।