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प्रशांत भूषण बोले, सत्ता परिवर्तन चाहना 'हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार'
वकील ने यह बात सीजेपी के अभिजीत दिपके के साथ प्रेस क्लब में कही। वहीं प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि फॉर्म 7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम चुपचाप हटाए जा रहे हैं।

मुख्य बातें
- वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सत्ता परिवर्तन चाहना संवैधानिक अधिकार है।
- अभिनेता प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि फॉर्म 7 से मुस्लिम मतदाताओं को "चुपचाप मिटाया" जा रहा है।
- आइसा की नेहा बोरा ने कहा कि पुलिस "एक खास राजनीतिक दल का साथ देती है"।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने गुरुवार को कहा कि सरकार बदलना चाहना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने वही शब्द उठाया जिसे लेकर भाजपा कुछ घंटे पहले विपक्ष पर हमला कर चुकी थी।
नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में भूषण ने कहा, “हम सब सत्ता परिवर्तन चाहते हैं, सत्ता परिवर्तन हासिल करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।” यह प्रेस कॉन्फ्रेंस कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कनॉट प्लेस में पार्टी के तिरंगा प्रदर्शन से एक दिन पहले बुलाई थी। भूषण का तर्क था कि संविधान के तहत सरकार के प्रति असंतोष पैदा करना तब तक अपराध नहीं है, जब तक उससे हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था को बढ़ावा न मिले। लाठीचार्ज के वीडियो का हवाला देते हुए उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को “गुंडा राज” कहा।
आइसा नेता नेहा बोरा ने बांग्लादेश के जेन-ज़ी आंदोलन की तारीफ की थी, जिसके बाद भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने उसी दिन पहले राहुल गांधी पर “सत्ता परिवर्तन” चाहने का आरोप लगाया था।
उसी मंच पर मौजूद बोरा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों को कवर कर रहे पत्रकारों के कैमरे छीने गए। उन्होंने कहा कि एक पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिला पत्रकार के खिलाफ ही जवाबी एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने कहा कि जब आम लोग इंसाफ मांगते हैं, तो पुलिस “एक खास राजनीतिक दल का साथ देती है और जनता पर ही कार्रवाई करती है।”
अभिनेता प्रकाश राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में किसी नाम पर आपत्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं को “चुपचाप मिटाया” जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के 23 जिलों के जो लोग दिल्ली नहीं आ सके, उनकी आवाज एक तरह से दबा दी गई है।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, एसएफआई नेता आइशी घोष और तेलंगाना के गिग वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन भी मौजूद थे। चुनाव आयोग कह चुका है कि मसौदा सूची से छूटे नाम अंतिम रूप से हटाए गए नाम नहीं हैं।