LokVox

राजनीतिप्रेस की आजादी

महिला पत्रकार उत्पीड़न के आरोप सीलबंद लिफाफे में दे सकेंगी: सुप्रीम कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली प्रदर्शनों की शिकायतों की जांच करने वाली समिति में ज्यादातर या सिर्फ महिलाएं हों। सरकार ने पत्रकारों के फोन जब्त करने से इनकार किया।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत (फ़ाइल फ़ोटो)
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Rogers49 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0

मुख्य बातें

  1. महिला पत्रकार अपने आरोप अदालत के सामने सीलबंद लिफाफे में रख सकेंगी।
  2. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जांच समिति में ज्यादातर या सिर्फ महिलाएं हों।
  3. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि पत्रकारों के कोई उपकरण जब्त नहीं किए गए।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने गुरुवार को उन महिला पत्रकारों को अपने आरोप सीलबंद लिफाफे में देने की अनुमति दी, जिनका कहना है कि दिल्ली के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने उनका यौन उत्पीड़न किया। अदालत ने कहा कि शिकायतों की जांच के लिए बनने वाली किसी भी समिति में ज्यादातर या सिर्फ महिलाएं होनी चाहिए।

नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने एक महिला की अध्यक्षता वाली समिति और ब्योरा गोपनीय रूप से दाखिल करने की अनुमति मांगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दोनों बातें मान लीं। याचिका उन महिला पत्रकारों से जुड़ी है जिनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान उनसे धक्कामुक्की और उत्पीड़न हुआ। इनमें वे तीन पत्रकार भी हैं जिन्होंने 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास एक प्रदर्शन के बाद शिकायत की थी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार महिला पुलिसकर्मियों समेत सभी महिलाओं की सुरक्षा के पक्ष में है। उन्होंने दलील दी कि प्रदर्शनों में कुछ लोग मुख्य रूप से सोशल मीडिया रील बनाने आए थे, जिससे पत्रकारों और ऑनलाइन कंटेंट बनाने वालों में फर्क करना मुश्किल हो गया।

फोन और कैमरे

वरिष्ठ वकील अरविंद दातार के जरिए दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने पत्रकारों से लिए गए उपकरण लौटाने की मांग की। यूनियन की याचिका में आरोप है कि 10 और 11 अक्टूबर को पत्रकारों को हिरासत में लिया गया, उनसे मारपीट हुई और उन्हें रिकॉर्डिंग से रोका गया। यूनियन स्वतंत्र जांच और फ्रीलांस व डिजिटल पत्रकारों की सुरक्षा चाहती है।

मेहता ने पीठ से कहा कि कोई उपकरण जब्त नहीं किया गया। अदालत ने यूनियन की याचिका पर नोटिस जारी किया, लेकिन कोई निर्देश नहीं दिया।

पत्रकारों की याचिकाएं हिरासत से जुड़े बड़े मामलों के साथ सुनी गईं, जिनमें अदालत ने सभी एजेंसियों को प्रदर्शनों की सीसीटीवी फुटेज और दूसरी डिजिटल सामग्री सुरक्षित रखने का आदेश दिया।