राज्यपश्चिम बंगाल
तृणमूल किसकी? ममता और ऋतब्रत गुटों के विवाद पर चुनाव आयोग 30 अक्टूबर को करेगा सुनवाई
पिछले महीने के उपचुनावों के लिए आयोग ने पार्टी का नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न फ्रीज़ कर दिया था। अब वह बड़े सवाल पर सुनवाई करेगा कि तृणमूल कांग्रेस किस गुट की है।

मुख्य बातें
- चुनाव आयोग 30 अक्टूबर को नई दिल्ली में तृणमूल के स्वामित्व विवाद पर सुनवाई करेगा।
- लड़ाई ममता बनर्जी के गुट और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के गुट के बीच है।
- उपचुनावों में दोनों गुट 'ममता ऑल तृणमूल कांग्रेस' और 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' के नाम से लड़े।
तृणमूल कांग्रेस किसकी है, इस विवाद पर चुनाव आयोग 30 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। इससे ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच लड़ाई का अगला दौर शुरू होगा।
दोनों गुटों को तारीख की जानकारी दे दी गई है। सुनवाई नई दिल्ली में आयोग के मुख्यालय में शीर्ष अधिकारियों के सामने होगी, और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के भी बैठने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी पार्टी के नाम और “फूल और घास” चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं। उनका गुट कहता है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठन में बहुमत उनके साथ है। ममता बनर्जी का गुट, जिसे कालीघाट गुट कहा जाता है, कहता है कि पार्टी को उनके नेतृत्व से अलग नहीं किया जा सकता।
17 सितंबर को दूसरी सुनवाई के बाद आयोग ने फैसला दिया था कि उपचुनावों में “दोनों में से किसी भी गुट को पार्टी का नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं होगी”, और न ही आरक्षित चुनाव चिह्न की। ममता का गुट “ममता ऑल तृणमूल कांग्रेस” नाम और फुटबॉल चिह्न के साथ लड़ा, जबकि ऋतब्रत का गुट “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस” नाम और लिफाफा चिह्न के साथ। नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव 6 अक्टूबर को हुए थे।
सितंबर की सुनवाई के बाद ऋतब्रत ने कहा था, “हमने आयोग के सामने तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा है।” उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल “किसी परिवार की पुश्तैनी जायदाद नहीं है”।
एक अलग मामले में लोकसभा अध्यक्ष ने तृणमूल के 20 बागी सांसदों को उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं का जवाब देने के लिए 20 अक्टूबर तक का समय दिया है।