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एसआईआर पर इंडिया गठबंधन की याचिका सुप्रीम कोर्ट में, पर एक याचिकाकर्ता को देनी होगी अपने आचरण पर सफाई

चुनाव आयोग और तीनों आयुक्तों को नोटिस गया। पीठ ने याचिका को लंबित एसआईआर मामलों के साथ जोड़ा और कहा कि एक याचिकाकर्ता के लिए नोटिस फिलहाल अस्थायी है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
सुप्रीम कोर्ट की इमारत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फ़ाइल फ़ोटो)
सुप्रीम कोर्ट की इमारत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Pinakpani / Wikimedia Commons; Zealaski / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 and CC0

मुख्य बातें

  1. अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को नोटिस जारी किया।
  2. याचिका को अलग-अलग राज्यों में एसआईआर को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया गया।
  3. पीठ ने कहा कि वह एक याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में पूछेगी, और उसकी याचिका अस्थायी रूप से सुनी।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) गुरुवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ इंडिया गठबंधन की याचिका सुनने को तैयार हो गया। उसने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी किया। साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि मामला लाने वाले विपक्षी नेताओं में से एक को सफाई देनी होगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, “हम नोटिस जारी कर रहे हैं... लंबित मामलों के साथ जोड़ रहे हैं। लेकिन हम एक याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे।” उस याचिकाकर्ता के मामले में नोटिस केवल अस्थायी रूप से, “उसके अपने आचरण की सफाई देने की शर्त पर” स्वीकार किया जाएगा।

पीठ ने आदेश में उनका नाम नहीं लिया। इस टिप्पणी को बड़े पैमाने पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जोड़कर देखा गया, जिन्होंने सोमवार को अदालत की ओर मार्च की अगुवाई की थी और याचिका दाखिल करने दूसरे नेताओं के साथ उसकी रजिस्ट्री में गए थे।

गठबंधन क्या चाहता है

यह याचिका 12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, तृणमूल के सौगत रॉय और दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ दाखिल की थी। इसमें मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर काटे जाने और एसआईआर में गड़बड़ियों का आरोप है। दाखिल करते समय इसमें मांग की गई थी कि मामले के निपटारे तक सभी राज्यों में पुनरीक्षण पर रोक लगे, आयोग अपने एसआईआर रिकॉर्ड सार्वजनिक करे, और नाम काटे जाने की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की अगुवाई में स्वतंत्र समिति बने।

अलग-अलग राज्यों में एसआईआर के खिलाफ पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़कर अदालत ने गठबंधन के मामले को अलग से सुनने के बजाय पुनरीक्षण पर चल रही बड़ी कानूनी लड़ाई का हिस्सा बना दिया है। पीठ ने कहा कि या तो कोई आयोग की ओर से नोटिस स्वीकार करे या याचिकाकर्ता खुद प्रतिवादियों को नोटिस तामील कराएं। अदालत ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और अन्य की चुनाव आयोग से जुड़ी याचिकाओं पर भी केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया।

सुनवाई से पहले

कांग्रेस दिन की शुरुआत में आश्वस्त दिखी। पार्टी नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष वोट के अधिकार की रक्षा के लिए अदालत गया है और उसे संविधान और सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, “SIR के नाम पर 13 करोड़ से ज्यादा वोट काट लिए गए हैं।”

गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को अपनी मुख्य मांग बनाया है। वे एक रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं, जिसके मुताबिक उन्होंने बाकी दोनों आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद एसआईआर से जुड़े कई फैसले अकेले लिए।

तनाव भरी पृष्ठभूमि

यह मामला गठबंधन और पीठ के बीच एक असहज हफ्ते के बाद अदालत पहुंचा। मुख्य न्यायाधीश ने 11 अक्टूबर को खड़गे और राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर उन्हें याचिका दाखिल करने को कहा था। एक दिन बाद, जब उन्होंने दिल्ली के प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था का मामला बताया, तो कांग्रेस की केरलम इकाई ने उनसे इस्तीफे की मांग वाली पोस्ट डाली और फिर हटा ली।

गुरुवार को भी वह प्रकरण पृष्ठभूमि में रहा। एक अलग मामले में अदालत ने अदालत तक हुए मार्च पर आपत्ति वाली याचिका पर कांग्रेस, राहुल गांधी और अन्य को नोटिस जारी किया और टिप्पणी की कि “कोई भी न्यायपालिका को धमका नहीं सकता”।

गुरुवार दोपहर तक अगली सुनवाई की कोई तारीख सामने नहीं आई थी।