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'कोई न्यायपालिका को धमका नहीं सकता': मार्च पर सुप्रीम कोर्ट का कांग्रेस और राहुल गांधी को नोटिस

एक याचिका में सोमवार को अदालत तक हुए इंडिया गठबंधन के मार्च और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति है। अखिलेश यादव और अन्य को भी नोटिस गया है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
सुप्रीम कोर्ट की इमारत और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फ़ाइल फ़ोटो)
सुप्रीम कोर्ट की इमारत और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Pinakpani / Wikimedia Commons; Rahul Gandhi / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 and CC BY 3.0

मुख्य बातें

  1. अदालत ने मार्च से जुड़ी याचिका पर कांग्रेस, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य को नोटिस जारी किया।
  2. पीठ ने कहा, "कोई भी न्यायपालिका को धमका नहीं सकता। हम हाथीदांत की मीनारों में नहीं बैठे हैं।"
  3. एक वकील ने हटाई गई कांग्रेस पोस्ट पर स्वतः संज्ञान से आपराधिक अवमानना की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने गुरुवार को सोमवार को अदालत तक हुए इंडिया गठबंधन के मार्च पर आपत्ति वाली एक याचिका पर कांग्रेस, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य को नोटिस जारी किया। साथ ही न्यायपालिका पर दबाव को लेकर तीखी टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, “कोई भी न्यायपालिका को धमका नहीं सकता। हम हाथीदांत की मीनारों में नहीं बैठे हैं।”

याचिका 12 अक्टूबर के विपक्षी मार्च से जुड़ी है, जब नेता मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ याचिका दाखिल करने कनॉट प्लेस से अदालत की ओर पैदल चले थे। इसमें मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ एक्स पर की गई एक पोस्ट पर भी आपत्ति है। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने अदालत में सुप्रीम कोर्ट के पास जुलूसों और उसके परिसर के भीतर के आचरण पर आपत्ति जताई।

विवाद के केंद्र में रही पोस्ट कांग्रेस की केरलम इकाई की थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफा देने को कहा गया था, जब उन्होंने दिल्ली के प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था का मामला बताया था। यह पोस्ट उसी शाम हटा ली गई थी।

अवमानना की मांग

वकील विनीत जिंदल ने मुख्य न्यायाधीश से उस पोस्ट और मार्च पर अदालत की ओर से खुद आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार करने को कहा है। उन्होंने याचिका दाखिल किए जाने के दौरान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में हुए कथित प्रदर्शन की जांच की भी मांग की है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश नियंत्रण के लॉग और सुरक्षा रिकॉर्ड शामिल हैं।

मार्च वाली याचिका उसी दिन सुनी गई जब अदालत ने एसआईआर के खिलाफ गठबंधन की याचिका पर सुनवाई की और कहा कि वह एक याचिकाकर्ता से उसके आचरण पर सफाई चाहती है।