संसदमानसून सत्र
मानसून सत्र 2026: इस कार्यकाल में लोकसभा का सबसे कम कामकाज
पीआरएस के आकलन में लोकसभा ने तय समय का 15% काम किया, सरकार के आंकड़े में 19%। लोकसभा से पारित 11 में से नौ विधेयकों पर मंत्री के अलावा किसी ने नहीं बोला।

मुख्य बातें
- पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक लोकसभा का कामकाज (उत्पादकता) 15% और राज्यसभा का 33% रहा; सरकार के आंकड़े 19% और 39% हैं।
- पीआरएस के मुताबिक, लोकसभा से पारित 11 में से नौ विधेयक ऐसे थे जिन पर मंत्री के अलावा किसी सांसद ने नहीं बोला।
- पूरे सत्र में लोकसभा में प्रश्नकाल सिर्फ नौ मिनट चला, और दो सवालों के मौखिक जवाब दिए गए।
- एफसीआरए संशोधन विधेयक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया, जिसे शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते में रिपोर्ट देनी है।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, 2026 के मानसून सत्र में लोकसभा ने अपने तय समय के 15% हिस्से में और राज्यसभा ने 33% हिस्से में कामकाज किया। मौजूदा 18वीं लोकसभा के जिन सत्रों के पीआरएस आंकड़े हमें उपलब्ध थे, उनमें यह लोकसभा का सबसे कम आंकड़ा है। इससे पहले सबसे कम आंकड़ा 2025 के मानसून सत्र का था, 29%, जिसे पीआरएस ने तब “18वीं लोकसभा में अब तक का सबसे कम कामकाज” बताया था।
सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चला, और दोनों सदनों की 19 बैठकें हुईं। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक पर हुए विरोध प्रदर्शनों और छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई ने सत्र का ज़्यादातर समय ले लिया। आउटलुक के मुताबिक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया। उसी रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने बार-बार नीट-यूजी विवाद पर चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग की।
मानसून सत्र 2026 एक नज़र में
- 19हर सदन की बैठकें, 20 जुलाई से 13 अगस्त
- 15% / 33%लोकसभा / राज्यसभा का कामकाज, तय समय के हिस्से के रूप में
- 19% / 39%लोकसभा / राज्यसभा का कामकाज, सरकारी आंकड़े
- 9 मिनटपूरे सत्र में लोकसभा का प्रश्नकाल
आंकड़ों के दो सेट
सरकार के आंकड़े ज़्यादा हैं। आउटलुक ने 13 अगस्त को रिपोर्ट किया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा का कामकाज 19% और राज्यसभा का 39% बताया। पीटीआई के मुताबिक, राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उच्च सदन का आंकड़ा 39.17% बताया, यानी 37 घंटे 49 मिनट की बैठक।
पीआरएस यह मापता है कि हर सदन ने वास्तव में कितने समय काम किया, उस समय के मुकाबले जितना उसे बैठना था। हमने जो रिपोर्टें पढ़ीं, उनमें यह नहीं बताया गया कि सरकार के आंकड़े कैसे निकाले जाते हैं, इसलिए यह रिपोर्ट दोनों आंकड़े देती है।
विधेयकों की गिनती में भी अंतर है। रिजिजू ने कहा, “हमने कुल 12 विधेयक पारित किए”, और राज्यसभा के सभापति ने भी 12 विधेयक पारित या लौटाए गए गिनाए। पीआरएस 11 गिनता है, क्योंकि वह वित्त और विनियोग विधेयकों को इसमें नहीं गिनता। पीआरएस अपनी अगस्त की नीति समीक्षा में कहता है कि सत्र के दौरान 12 विधेयक पेश हुए और 11 पारित हुए। जो एक बचा, भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026, उसे बाद में स्थायी समिति को भेज दिया गया।
कम बहस में पारित हुए कानून
पीआरएस ने पाया कि लोकसभा से पारित 11 में से नौ विधेयक ऐसे थे जिन पर मंत्री के अलावा किसी सांसद ने नहीं बोला। सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक लोकसभा में चार मिनट में पारित हुआ। राज्यसभा ने इसी विधेयक पर 2 घंटे 21 मिनट लगाए, और 33 सांसदों ने इस पर बात रखी।
सिर्फ एक विधेयक पर दोनों सदनों में विस्तार से बहस हुई। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026, जो पेपर लीक पर सज़ा कड़ी करता है, उस पर लोकसभा में 10 घंटे 54 मिनट बहस हुई और 48 सांसद बोले, और राज्यसभा में 6 घंटे 39 मिनट, जिसमें 35 सांसद बोले।
सत्र के अंत में रिजिजू ने इस कमी को माना।
“हालांकि, बहस और चर्चा के लिहाज़ से यह उतना सफल नहीं रहा।”
आउटलुक के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि यह “संसदीय लोकतंत्र के लिए स्वस्थ नहीं” है।
राज्यसभा का सत्र समाप्त करते हुए राधाकृष्णन ने कहा: “राज्यसभा का 271वां सत्र समाप्त होने पर, मैं इसकी कार्यवाही पर गहरी चिंता के साथ विचार करता हूं।” पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने आगे कहा कि “बार-बार के व्यवधान आखिरकार लोगों के भरोसे और आकांक्षाओं पर असर डालते हैं”।
सवाल पूछे ही नहीं गए
पीआरएस के मुताबिक, लोकसभा में प्रश्नकाल अपने तय समय का 1% ही चला: कुल नौ मिनट, जिसमें दो सवालों के मौखिक जवाब दिए गए। राज्यसभा में यह 12% चला। तुलना के लिए, 2025 के शीतकालीन सत्र में लोकसभा ने प्रश्नकाल के समय का 67% और राज्यसभा ने 80% इस्तेमाल किया था।
पीटीआई के मुताबिक, राज्यसभा में 285 में से 16 तारांकित प्रश्न लिए गए, साथ ही शून्यकाल के 380 में से 52 मामले और 380 में से 93 विशेष उल्लेख। पीआरएस के रिकॉर्ड के मुताबिक, सत्र के दौरान लोकसभा में कोई बहस, चर्चा या निजी सदस्य कार्य नहीं हुआ।
आगे क्या बचा है
लोकसभा ने 12 अगस्त को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को 31 सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया। दिप्रिंट के मुताबिक, समिति को शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते के अंत तक रिपोर्ट देनी है। पीआरएस के मुताबिक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 (उच्च शिक्षा के लिए प्रस्तावित एकल नियामक) पर बनी संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है।
पीआरएस के मुताबिक, 18वीं लोकसभा ने अब तक अपने 21% विधेयक समितियों को भेजे हैं, जबकि 17वीं लोकसभा में यह आंकड़ा 16% था। कार्यकाल के दो साल बाद भी सदन ने उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं किया है।
दोनों सदन 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने 23 अगस्त को रिपोर्ट किया कि सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ था। 11 अक्टूबर तक शीतकालीन सत्र की तारीखें घोषित नहीं हुई थीं।
मूल दस्तावेज़
- Functioning of Parliament during Monsoon Session 2026PRS Legislative Research, 11 अक्टूबर 2026
- Monsoon Session 2026: vital statsPRS Legislative Research, 10 अक्टूबर 2026
- Parliament functioning in Monsoon Session 2025PRS Legislative Research
- Parliament functioning in Winter Session 2025PRS Legislative Research
- Parliament functioning in Budget Session 2026PRS Legislative Research
- Parliament functioning in Budget Session 2025PRS Legislative Research
- Parliament functioning in Winter Session 2024PRS Legislative Research
- Both Houses of Parliament adjourned sine die with passage of 12 bills during Monsoon SessionNews On AIR (Prasar Bharati), 13 अगस्त 2026
- PRS Monthly Policy Review, August 2026PRS Legislative Research