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एफसीआरए क्या है, और 2026 के संशोधन विधेयक में क्या प्रस्ताव है

विधेयक के तहत एफसीआरए लाइसेंस खोने वाले एनजीओ की विदेशी धन से बनी संपत्तियां एक सरकारी प्राधिकरण अपने हाथ में ले सकेगा, और जेल की अधिकतम सज़ा घटेगी। एक संयुक्त समिति इसकी जांच कर रही है।

संपादकीय डेस्क सेप्रकाशित

संक्षेप में

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 तय करता है कि भारत में कौन विदेशी चंदा ले सकता है और उसे कैसे खर्च कर सकता है। 2026 का संशोधन विधेयक एक नामित प्राधिकरण बनाएगा, जो उन संगठनों के विदेशी धन और संपत्तियों को अपने हाथ में लेगा जिनके एफसीआरए प्रमाणपत्र खत्म हो जाते हैं। इसमें प्रमुख पदाधिकारियों को अपराधों के लिए ज़िम्मेदार माना जाएगा और जेल की अधिकतम सज़ा पांच साल से घटाकर एक साल होगी। विधेयक संयुक्त संसदीय समिति के पास है, जिसे शीतकालीन सत्र 2026 के पहले हफ्ते में रिपोर्ट देनी है।

एफसीआरए क्या है?

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए), 2010 तय करता है कि भारत में कौन विदेशी चंदा ले सकता है, और उसे कैसे खर्च किया जा सकता है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के कानून के सारांश के अनुसार, यह व्यक्तियों, संघों और कंपनियों को मिलने वाले अनुदान और चंदे पर लागू होता है, और इसका मकसद विदेशी पैसे को “राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक” गतिविधियों में लगने से रोकना है।

एफसीआरए लाइसेंस किसे लेना पड़ता है?

जो भी संगठन नियमित रूप से विदेशी अंशदान लेना चाहता है, उसे एफसीआरए प्रमाणपत्र चाहिए, जो पांच साल के लिए वैध होता है और जिसका नवीनीकरण हो सकता है। जिस संगठन को सिर्फ एक बार विदेशी पैसा चाहिए, वह इसकी जगह पूर्व अनुमति के लिए आवेदन कर सकता है। यह रास्ता किसी खास उद्देश्य, स्रोत या रकम तक सीमित होता है।

सरकार गलत बयान देने, अधिनियम या पंजीकरण की शर्तें तोड़ने, जनहित में, या अगर संगठन ने दो साल तक कोई उचित गतिविधि नहीं दिखाई या निष्क्रिय हो गया हो, तो प्रमाणपत्र रद्द कर सकती है। 2020 के एक संशोधन ने संगठनों को अनुमति लेकर अपना प्रमाणपत्र सरेंडर करने की सुविधा दी।

मौजूदा कानून के तहत, जब कोई प्रमाणपत्र रद्द या सरेंडर होता है, तो विदेशी अंशदान और उससे बनी संपत्तियां सरकार द्वारा तय किए गए प्राधिकरण के पास चली जाती हैं।

एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 क्या बदलेगा?

यह उन मामलों का दायरा बढ़ाता है जिनमें विदेशी धन से बनी संपत्तियां सरकार के पास जाती हैं, और उनके प्रबंधन के लिए एक नया प्राधिकरण बनाता है। गृह मंत्रालय ने 25 मार्च 2026 को लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। पीआरएस के सारांश के अनुसार इसके मुख्य प्रावधान ये हैं:

  • प्रमाणपत्र का खत्म होना: अगर समय सीमा से पहले नवीनीकरण न हो, नवीनीकरण का आवेदन ही न किया जाए, या नवीनीकरण ठुकरा दिया जाए, तो प्रमाणपत्र खत्म हो जाएगा।
  • नामित प्राधिकरण: एक नई संस्था, जो ऐसे संगठनों के विदेशी अंशदान और संपत्तियों को अपने हाथ में लेगी, उनका प्रबंधन करेगी और उनका निपटारा करेगी। इनमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं जो सिर्फ आंशिक रूप से विदेशी पैसे से बनी हों।
  • दो चरणों में अधिग्रहण: संपत्तियां पहले अस्थायी रूप से प्राधिकरण के पास जाएंगी। अगर संगठन तय अवधि में अपना प्रमाणपत्र दोबारा हासिल कर ले, तो बिना इस्तेमाल हुए धन और संपत्तियां लौटा दी जाएंगी। ऐसा न होने पर अधिग्रहण स्थायी हो जाएगा।
  • संपत्तियों का इस्तेमाल: स्थायी रूप से अधिग्रहित संपत्तियों का इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। उन्हें केंद्र या राज्य की संस्थाओं को सौंपा या बेचा जा सकता है। बिक्री से मिली रकम और बिना इस्तेमाल हुआ धन भारत की संचित निधि में जाएगा।
  • पूजा स्थल: अगर कोई पूजा स्थल स्थायी रूप से प्राधिकरण के पास जाता है, तो प्राधिकरण को उसके प्रबंधन की व्यवस्था करनी होगी और उसका धार्मिक स्वरूप बनाए रखना होगा।

अपराधों के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा?

“प्रमुख पदाधिकारियों” को ज़िम्मेदार माना जाएगा, जब तक वे यह न दिखा दें कि उन्हें अपराध की जानकारी नहीं थी या उन्होंने पूरी सावधानी बरती थी। विधेयक इनकी परिभाषा में निदेशक, साझेदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता, पदाधिकारी, गवर्निंग बॉडी के सदस्य और प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार अन्य लोग शामिल करता है। अगर किसी संगठन का प्रमाणपत्र खत्म हो जाए या वह निष्क्रिय हो जाए, तो उसके आखिरी प्रमुख पदाधिकारियों को सरकार को सूचित करना होगा। ऐसा न करने पर संपत्तियां स्थायी रूप से प्राधिकरण के पास चली जाएंगी।

एफसीआरए में सज़ा बढ़ेगी या घटेगी?

घटेगी। विधेयक अधिनियम के तहत अपराधों के लिए जेल की अधिकतम सज़ा पांच साल से घटाकर एक साल करता है। साथ ही अधिनियम के तहत किसी भी अपराध की जांच से पहले केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी ज़रूरी करता है।

एफसीआरए: मौजूदा कानून और 2026 का विधेयक

  • 5 सालनवीनीकरण से पहले एफसीआरए प्रमाणपत्र की वैधता
  • 5 साल से 1 सालजेल की अधिकतम सज़ा, मौजूदा अधिनियम से विधेयक तक
  • ₹10 लाखएफसीआरए संशोधन नियम, 2026 के तहत नवीनीकरण के लिए सक्रिय माने जाने हेतु किसी संगठन को दो वित्त वर्षों में इस्तेमाल करना ज़रूरी विदेशी अंशदान
  • 31विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य (21 लोकसभा, 10 राज्यसभा)

पीआरएस ने किन चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया है?

कि संगठन विदेशी पैसा लेना बंद करने के बाद भी अपनी संपत्तियां खो सकते हैं। पीआरएस ने संसद के विचार के लिए कई मुद्दे गिनाए हैं:

  • जो संगठन नवीनीकरण बंद कर दे और अब घरेलू धन से चलता हो, वह भी पहले मिले विदेशी धन से बनी संपत्तियां खो सकता है।
  • बाहर निकलने का कोई साफ रास्ता नहीं है: ऐसी संपत्तियां अपने पास रखने के लिए प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराते रहना और खर्च करते रहना पड़ सकता है।
  • 2026 के नियमों में ₹10 लाख की गतिविधि सीमा के कारण छोटे संगठन अपने प्रमाणपत्र और संपत्तियां खो सकते हैं, भले ही वे अब भारतीय पैसे से चलते हों।
  • आंशिक रूप से विदेशी पैसे से बनी संपत्तियां पूरी की पूरी प्राधिकरण के पास जाती हैं, और घरेलू हिस्से की वापसी इस पर निर्भर है कि वह “अलग या पता लगाने योग्य” हो।
  • पूर्व अनुमति के रास्ते से मिली संपत्तियां नवीनीकरण न होने पर प्राधिकरण के पास नहीं जातीं, जबकि प्रमाणपत्र धारकों की संपत्तियां जाती हैं।
  • न तो अधिनियम में और न ही विधेयक में नवीनीकरण ठुकराए जाने से पहले अपील या सुनवाई का प्रावधान है।

एफसीआरए विधेयक पर पार्टियां क्या कह रही हैं?

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने विधेयक वापस लेने की मांग की है; सरकार का कहना है कि यह अल्पसंख्यकों को निशाना नहीं बनाता। ThePrint ने 12 अगस्त को बताया कि विधेयक को समिति के पास भेजे जाते समय कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने इसे वापस लेने की मांग की, और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसका विरोध किया। उसी रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विधेयक में कुछ भी अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना नहीं बनाता।

एफसीआरए विधेयक अभी किस स्थिति में है?

यह संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास है। लोकसभा ने मानसून सत्र के आखिर में, 12 अगस्त 2026 को इसे समिति को भेजा। ThePrint के अनुसार, समिति को शीतकालीन सत्र 2026 के पहले हफ्ते के आखिरी दिन तक रिपोर्ट देनी है। 11 अक्टूबर 2026 तक शीतकालीन सत्र की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ था।

एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026

  1. 25 मार्च 2026गृह मंत्रालय ने लोकसभा में पेश किया।
  2. 12 अगस्त 202631 सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया।
  3. शीतकालीन सत्र 2026समिति की रिपोर्ट सत्र के पहले हफ्ते के अंत तक आनी है। तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ।

मूल दस्तावेज़