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आईएसआई विधेयक पर सांख्यिकी मंत्रालय का पक्ष सुनेगी संसद की वित्त समिति

भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति उस विधेयक की जांच कर रही है जो भारतीय सांख्यिकी संस्थान से जुड़ा 1959 का कानून बदलेगा और कोलकाता के इस संस्थान को निगमित निकाय बनाएगा।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
वित्त समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता (फ़ाइल फ़ोटो)
वित्त समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: St. sisamar / Wikimedia Commons; Ravi Dwivedi / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0 and CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. वित्त संबंधी स्थायी समिति को गुरुवार को भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 पर सांख्यिकी मंत्रालय का पक्ष सुनना था।
  2. यह विधेयक भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 को रद्द करेगा।
  3. राष्ट्रपति द्वारा नामित अध्यक्ष वाला बोर्ड ऑफ गवर्नर्स संस्थान की मुख्य नीति-निर्माता संस्था होगा।

संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को गुरुवार को भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधिकारियों का पक्ष सुनना था। यह विधेयक देश के सबसे जाने-माने शोध संस्थानों में से एक को चलाने वाले कानून को नए सिरे से लिखने की सरकार की योजना है।

3 अगस्त को लोकसभा में पेश होने के बाद समिति को भेजा गया यह विधेयक भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 को रद्द करेगा, जिसने कोलकाता के इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया था। सरकार का कहना है कि पुराना कानून शासन, प्रशासन, वित्त और जवाबदेही के बारे में बहुत कम कहता है।

विधेयक के तहत संस्थान एक निगमित निकाय बनेगा और भारत के राष्ट्रपति इसके विज़िटर होंगे। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स मुख्य नीति-निर्माता संस्था होगा, जिसकी अध्यक्षता शिक्षा जगत, उद्योग, शिक्षा, सार्वजनिक नीति या सांख्यिकी विज्ञान की कोई प्रतिष्ठित हस्ती करेगी, और यह बोर्ड केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह होगा। निदेशक की अध्यक्षता वाली अकादमिक परिषद पढ़ाई और शोध से जुड़े मामले देखेगी।

भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने 9 सितंबर को पहली बार मंत्रालय का पक्ष सुना था और इस महीने की शुरुआत में विशेषज्ञों और संगठनों से सुझाव मांगे थे।

महताब का कहना है कि संस्थान को डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए क्षेत्रों में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने सितंबर में कहा था, “मूल मुद्दा यह है कि सांख्यिकीय डेटा को कैसे बेहतर बनाया जाए, और यह सिर्फ सांख्यिकी, गणित और अर्थशास्त्र तक सीमित नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा है कि पूरी तरह केंद्र से वित्तपोषित यह संस्थान अपनी स्वायत्तता नहीं खोएगा। उनके शब्दों में, “सोसाइटी का स्वायत्त स्वरूप बना रहेगा।”

मंत्रालय और बाहरी विशेषज्ञों को सुनने के बाद समिति विधेयक पर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी।