संसदसमितियां
लोक लेखा समिति ने एससी छात्रवृत्ति पर केंद्र और छह राज्यों से जवाब मांगा
संसद की खर्च पर नज़र रखने वाली समिति को कैग ऑडिट के आधार पर अनुसूचित जाति के छात्रों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति पर गवाही लेनी थी। कई नई समितियों ने इसी हफ्ते अपना काम शुरू किया है।

मुख्य बातें
- लोक लेखा समिति को गुरुवार को अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति योजनाओं की जांच करनी थी।
- सामाजिक न्याय मंत्रालय और छह राज्य सरकारों के अधिकारियों को गवाही के लिए बुलाया गया।
- शिक्षा समिति को उसी दिन स्कूल और उच्च शिक्षा सचिवों को सुनना था।
संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) को गुरुवार को दलित छात्रों के लिए केंद्र की दो शिक्षा योजनाओं, अनुसूचित जाति के छात्रों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, पर अधिकारियों से सवाल-जवाब करने थे।
संसद से मंज़ूर पैसे को सरकार कैसे खर्च करती है, इसकी जांच करने वाली यह समिति पहले ऑडिट पक्ष से ब्रीफिंग लेने और फिर मौखिक गवाही लेने वाली थी। विषय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2025 की रिपोर्ट संख्या 36 का पैराग्राफ 2.13 है, जो इन दोनों छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़ा है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, ओडिशा, बिहार और मध्य प्रदेश सरकारों के अधिकारियों को भी बुलाया गया।
पीएसी उन कई समितियों में से है जो अपना साल शुरू कर रही हैं। उसी दिन शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति को अपने कार्यकाल में जांच के विषय चुनने थे और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिवों से उनकी योजनाओं के कामकाज की जानकारी लेनी थी। वित्त समिति को भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक पर गवाही लेनी थी।
शिक्षा समिति शुक्रवार को फिर बैठेगी और खेल विभाग व युवा मामलों के विभाग के सचिवों को सुनेगी। कार्मिक, विधि और न्याय संबंधी समिति भी शुक्रवार को दोनों मंत्रालयों के सचिवों को सुनेगी, और वाणिज्य समिति की परिचय बैठक होगी।
समितियों की बैठकें बंद कमरे में होती हैं। उनके निष्कर्ष तभी सार्वजनिक होते हैं जब रिपोर्ट संसद में पेश की जाती है।