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म्यांमार के स्कैम सेंटर: चीन ने कोकांग सरगना वेई हुआइरेन समेत तीन को मौत की सजा सुनाई

फुजियान की एक अदालत ने कहा कि वेई परिवार का गिरोह उत्तरी म्यांमार से 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा की ठगी, ड्रग्स और जुए का धंधा चलाता था और उसने कम से कम दो चीनी नागरिकों की हत्या की।

संपादकीय डेस्क से · बीजिंगप्रकाशित
उत्तरी म्यांमार का कोकांग कस्बा लाउक्काई
उत्तरी म्यांमार का कोकांग कस्बा लाउक्काईPhoto: Phyo WP / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. क्वानझोउ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने वेई हुआइरेन, चेन दावेई और लियाओ जिंगफांग को मौत की सजा सुनाई।
  2. गिरोह के तीन और सदस्यों को उम्रकैद और 55 अन्य को 3 साल 3 महीने से 24 साल तक की जेल हुई।
  3. अदालत के मुताबिक गिरोह के धंधे से 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई।

दक्षिण-पूर्वी चीन की एक अदालत ने म्यांमार के अपराध सरगना वेई हुआइरेन और उसके परिवार के गिरोह के दो सदस्यों को सीमा पार स्कैम कंपाउंड चलाने के लिए मौत की सजा सुनाई है। दक्षिण-पूर्व एशिया के ठगी नेटवर्क के खिलाफ बीजिंग की मुहिम में यह ताजा मामला है।

फुजियान प्रांत की क्वानझोउ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वेई, चेन दावेई और लियाओ जिंगफांग को मौत की सजा दी जाएगी। अदालत ने जिसे “वेई परिवार आपराधिक गिरोह” कहा, उसके सरगना वेई को हत्या समेत कई अपराधों में दोषी ठहराया गया। तीन अन्य सदस्यों को उम्रकैद मिली, और 55 और को तीन साल तीन महीने से 24 साल तक की जेल हुई।

अदालत ने कहा कि गिरोह ड्रग्स की तस्करी, संगठित वेश्यावृत्ति, अवैध कसीनो और टेलीकॉम ठगी में लिप्त था, और उसके सदस्यों ने कम से कम दो चीनी नागरिकों की हत्या की। इसके धंधों से 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई। खबरों के मुताबिक यह गिरोह 14 बड़े कंपाउंड चलाता था और ऊंची तनख्वाह का लालच देकर हजारों चीनी नागरिकों को म्यांमार ले गया।

वेई परिवार उन “चार परिवारों” में से एक है जिनका चीन की सीमा से लगे म्यांमार के कोकांग इलाके पर दबदबा था। वेई हुआइरेन को जनवरी 2024 में गिरफ्तार किया गया था। मई में उसके मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि 2019 से परिवार ने कोकांग में अपने सैन्य और राजनीतिक असर का इस्तेमाल कर ऐसे कंपाउंड चलाए, जिन्होंने चीन के लोगों से 24 अरब युआन (3.5 अरब डॉलर) से ज्यादा की ठगी की।

चीन इन स्कैम सेंटरों पर सख्ती बढ़ा रहा है, जहां काम करने वाले कई लोग तस्करी कर लाए गए विदेशी होते हैं और जेल जैसे हालात में रखे जाते हैं। जुलाई में अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने चेतावनी दी थी कि इस इलाके के ऐसे केंद्रों में 3 लाख तक लोग काम करते हैं।