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रूस पर प्रतिबंधों से बचाने वालों पर ईयू की कार्रवाई, भारत-यूएई की कंपनियां भी सूची में
ब्रसेल्स ने गुरुवार को तीन लोगों और नौ कंपनियों को प्रतिबंध सूची में डाला। इनमें एक ऐसा कारोबारी भी है जिस पर भारत को रूसी मूल का कच्चा तेल बेचने का आरोप है।

मुख्य बातें
- रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद के लिए ईयू ने तीन लोगों और नौ संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए।
- सूची में शामिल हुरुस ट्रेड एफज़ेडई को भारत को रूसी मूल का कच्चा तेल सप्लाई करने वाला बताया गया।
- काया कालास ने कहा कि प्रतिबंधों से बचाना रूस के युद्ध में "मदद और उकसावे के बराबर" है।
यूरोपीय संघ ने गुरुवार को व्यापार, तेल और भुगतान पर लगे मौजूदा प्रतिबंधों से मॉस्को को बचने में मदद करने के आरोप में तीन लोगों और नौ कंपनियों को अपनी रूस प्रतिबंध सूची में जोड़ा। इनमें से चार कंपनियां संयुक्त अरब अमीरात, भारत और सेशेल्स की हैं, और एक को भारत को रूसी मूल का कच्चा तेल बेचने वाला बिचौलिया बताया गया है।
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने कहा, “ईयू प्रतिबंधों से बचाना रूस के अवैध आक्रामक युद्ध में मदद और उकसावे के बराबर है।”
सूची में कौन
तीन निशाने रूसी कंपनियां और उनके पीछे के लोग हैं: पैरलल इंपोर्ट में शामिल कार्गो कंपनी मूवर्स ग्रुप एलएलसी और उसके जनरल डायरेक्टर दिमित्री चुडोव्स्की; लाइसेंसशुदा कस्टम ब्रोकर और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर एलएलसी डीटी इनियर और उसकी बहुसंख्यक शेयरधारक इवाना सावचुक; और भुगतान एजेंट यूनाइटेड स्ट्रीम एलएलसी तथा उसकी संस्थापक और डायरेक्टर स्वेतलाना गुमेन्युक।
तुर्किये की दो ट्रेडिंग कंपनियों, बेगलर टेक्सटिल इंसात एलेक्ट्रोनिक वे दिश तिजारेत लिमिटेड और मेडसे ग्रुप एलएलसी, को एक वैश्विक नेटवर्क के ज़रिए प्रतिबंधित सामान रूस पहुंचाने के लिए सूची में डाला गया।
तेल से जुड़ी सूची में यूएई, भारत और सेशेल्स की चार कंपनियां हैं। ईयू ने डीआईएस लॉजिस्टिक्स डीएमसीसी, विगोर मरीन सर्विसेज एलएलपी और शिवा शिपिंग लिमिटेड को रूस के टैंकरों के “शैडो फ्लीट” का हिस्सा बताया। हुरुस ट्रेड एफज़ेडई को भारत को रूसी मूल का कच्चा तेल सप्लाई करने वाला ट्रेडिंग बिचौलिया बताया गया।
भारत के लिए मायने
यह सूची ऐसे वक्त आई है जब रूसी तेल की भारतीय खरीद पर वॉशिंगटन से भी दबाव है। अमेरिका का नया कानून, सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, राष्ट्रपति चाहें तो रूसी ऊर्जा खरीदते रहने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देता है। बुधवार को विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत ने इस कानून को लेकर “अमेरिकी पक्ष को अपनी चिंताएं बता दी हैं।”
मूल दस्तावेज़
- Closing loopholes: Council lists individuals and entities for circumventing EU sanctions (press release, not opened)Council of the EU, 15 अक्टूबर 2026