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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता 'ठहराव' पर, नए अमेरिकी कानून से 100% टैरिफ का रास्ता खुला
सीतारमण का कहना है कि अब दोनों पक्षों के लिए और रियायतें देना मुश्किल होगा। नया अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देता है, पर ऐसा कोई टैरिफ अभी लगाया नहीं गया है।

मुख्य बातें
- रॉयटर्स के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता ठहराव पर पहुंच गई है।
- फरवरी 2026 के ढांचे में तय 18% अमेरिकी टैरिफ दर कभी लागू नहीं हुई, और समझौते की पहली किस्त भी लागू नहीं है।
- 24 जुलाई 2026 से भारतीय सामान पर सामान्य शुल्कों के ऊपर 10% अमेरिकी सेक्शन 301 शुल्क लग रहा है, कुछ छूटों के साथ।
- 18 सितंबर को हस्ताक्षरित एक अमेरिकी कानून रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देता है, लेकिन खुद ये टैरिफ नहीं लगाता।
रॉयटर्स के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता एक ठहराव पर पहुंच गई है, जहां आगे रियायतें देना दोनों पक्षों के लिए “बहुत, बहुत मुश्किल” होगा। दोनों देश फरवरी 2025 से एक समझौते पर काम कर रहे हैं।
उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने पिछले हफ्ते कहा था कि समझौता जल्द होने वाला नहीं है। यह टिप्पणी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कानून पर हस्ताक्षर करने के 17 दिन बाद भी आई, जो उन्हें रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ (शुल्क) लगाने की इजाज़त देता है। भारत भी इन खरीदारों में शामिल है।
वार्ता कहां पहुंची
भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में एक ढांचे की घोषणा की थी। 10 फरवरी के एक अमेरिकी तथ्य पत्र में कहा गया कि अमेरिका भारत पर अपना जवाबी टैरिफ 25% से घटाकर 18% करेगा और राष्ट्रपति ने भारत की रूसी तेल खरीद से जुड़ा अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा दिया है। तथ्य पत्र के मुताबिक, भारत “और ज़्यादा अमेरिकी उत्पाद खरीदने और 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने का इरादा रखता है”।
18% की दर कभी लागू नहीं हुई। बिज़नेस टुडे के मुताबिक, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लगाए गए जवाबी टैरिफ रद्द कर दिए। वॉशिंगटन ने उनकी जगह व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 122 के तहत 10% का अस्थायी शुल्क लगाया, जो 24 फरवरी से लागू हुआ।
पीटीआई के मुताबिक, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 29 जुलाई को कहा कि समझौते की पहली किस्त को अंतिम रूप दे दिया गया है, लेकिन यह “जैसे ही अमेरिका यह सुनिश्चित कर पाएगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धियों पर तुलनात्मक बढ़त मिले” तभी लागू होगी। उन्होंने भारत के पड़ोस और आसियान के देशों का ज़िक्र किया।
रॉयटर्स के मुताबिक, सीतारमण ने कहा कि व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है और व्यापार असंतुलन ठीक करने के लिए टैरिफ के बढ़ते इस्तेमाल की आलोचना की। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अजय श्रीवास्तव ने भारत से आग्रह किया कि जब तक समझौता अधूरा है, वह रियायतें देना बंद करे।
क्या लागू है और क्या नहीं
भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ: 11 अक्टूबर 2026 की स्थिति
- 10%24 जुलाई 2026 से भारतीय सामान पर सामान्य शुल्कों के ऊपर सेक्शन 301 शुल्क, कुछ छूटों के साथ (लागू)
- 18%फरवरी 2026 के ढांचे में तय जवाबी दर (कभी लागू नहीं हुई)
- 100% तकरूसी तेल के बड़े खरीदारों पर टैरिफ, जिसकी प्रतिबंध कानून इजाज़त देता है (अधिकृत, लगाया नहीं गया)
- 42.79 अरब डॉलरअप्रैल-अगस्त 2026 में अमेरिका को भारत का माल निर्यात, एक साल पहले 40.39 अरब डॉलर था
10% का सेक्शन 301 शुल्क जबरन मज़दूरी को लेकर हुई एक अमेरिकी जांच से निकला है। आउटलुक बिज़नेस के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने जून में भारत के लिए 12.5% का प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारत के 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन मज़दूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने के बाद इसे 10% तय किया गया। अमेरिकी नोटिस के ईएलपी लॉ फर्म के सार के मुताबिक, जिन सामानों पर पहले से सेक्शन 232 शुल्क लगता है, जैसे स्टील, एल्युमिनियम और कुछ ऑटो पार्ट्स, उन्हें सेक्शन 301 शुल्क से छूट है। बिज़नेस टुडे ने फरवरी में बताया था कि सेक्शन 232 की दरें स्टील और एल्युमिनियम पर 50% और कुछ ऑटो पार्ट्स पर 25% थीं।
रूसी तेल से जुड़ा कानून क्या करता है
आउटलुक इंडिया की ओर से उद्धृत व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक, लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 (एच.आर. 5334) पर 18 सितंबर को हस्ताक्षर हुए। यह राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों से होने वाले आयात पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देता है। यह सूची हर 180 दिन में दोबारा तय होती है। दर राष्ट्रपति तय करते हैं, और कानून अपने आप कोई टैरिफ लागू नहीं करता। अल जज़ीरा के मुताबिक, यह कानून रूसी बैंकों, रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों और टैंकरों के “शैडो फ्लीट” पर भी प्रतिबंध लगाता है।
द पायनियर के मुताबिक, विधेयक के सह-लेखक डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने 16 सितंबर को प्रतिनिधि सभा से विधेयक पास होने के बाद कहा: “चीन और भारत से: बेहतर होगा कि आप अपना रवैया सुधार लें। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदिए।” अल जज़ीरा के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा में अल्पमत के नेता हकीम जेफ्रीज़ ने विधेयक का विरोध किया और चेतावनी दी कि इसकी टैरिफ शक्तियों से अमेरिकी परिवारों का खर्च बढ़ेगा।
आउटलुक इंडिया की ओर से उद्धृत केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात जुलाई के करीब 28.2 लाख बैरल प्रतिदिन (करीब 56%) से घटकर अगस्त में करीब 20.8 लाख बैरल प्रतिदिन (कच्चे तेल के आयात का करीब 45%) रह गया।
पीटीआई के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने 17 सितंबर को कहा कि भारत “अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध” है और “विविध स्रोतों से और बदलती बाज़ार परिस्थितियों के आधार पर ऐसा करता रहेगा”। मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाएगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ यह कानून उठाया और एक्स पर लिखा: “एसआरआईए (सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट) के संबंध में भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया।”
रॉयटर्स ने नई दिल्ली की दुविधा की ओर ध्यान दिलाया: रूस से खरीद घटाने से ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं या सरकारी खज़ाने पर दबाव पड़ सकता है, जबकि खरीद जारी रखने से भारत के सबसे बड़े बाज़ार अमेरिका को होने वाले निर्यात को नुकसान पहुंच सकता है।
मूल दस्तावेज़
- Fact Sheet: The United States and India announce historic trade dealUS Embassy in India, 10 फरवरी 2026