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ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026: भारत 'गंभीर' श्रेणी में बरकरार, दक्षिण एशिया दुनिया से पीछे

भारत का स्कोर 24.1 और पाकिस्तान का 25.5 है, जबकि नेपाल और श्रीलंका मध्यम श्रेणी में हैं। दुनिया के दस सबसे बड़े खाद्य संकटों की एक अलग सूची में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान शामिल हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. 2026 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्कोर 24.1 है, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
  2. दक्षिण एशिया का स्कोर 23.5 है, जो दुनिया के 18.1 से काफी ऊपर है।
  3. एक्शन अगेंस्ट हंगर के मुताबिक 2026 में पाकिस्तान में 1.06 करोड़ लोगों को मदद की ज़रूरत है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स के 2026 संस्करण में भारत 24.1 के स्कोर के साथ “गंभीर” श्रेणी में बना हुआ है, और पूरा दक्षिण एशिया दुनिया के औसत से खराब हालत में है।

क्षेत्र का स्कोर 23.5 है, जो गंभीर श्रेणी में ही आता है, जबकि वैश्विक स्कोर 18.1 है। इस सूचकांक में कम स्कोर का मतलब है कम भूख। इसमें अल्पपोषण, बच्चों के ठिगनेपन, बच्चों के दुबलेपन और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के पैमाने जोड़े जाते हैं।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026: दक्षिण एशिया
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026: दक्षिण एशिया
मदमान
अफगानिस्तान28.6
पाकिस्तान25.5
भारत24.1
दक्षिण एशिया23.5
बांग्लादेश19.2
दुनिया18.1
नेपाल14.5
श्रीलंका10.2

पाकिस्तान 25.5 और अफगानिस्तान 28.6 के स्कोर के साथ गंभीर श्रेणी में हैं। नेपाल (14.5) और श्रीलंका (10.2) मध्यम श्रेणी में हैं।

बांग्लादेश की रफ्तार थमी

बांग्लादेश 19.2 के स्कोर के साथ 122 देशों में 84वें स्थान पर है और मध्यम श्रेणी में है। रिपोर्ट ने उसकी लंबी अवधि की प्रगति को “एक पीढ़ीगत उपलब्धि” कहा, लेकिन अब सुधार थम गया है: 2000 से 2018 के बीच स्कोर में 42% से ज़्यादा सुधार के बाद 2018 से अब तक सिर्फ करीब 4% सुधार हुआ है। लंबाई के हिसाब से बहुत दुबले बच्चों का अनुपात बढ़कर 12.9% हो गया है, जो 2000 के बाद सबसे ज़्यादा है। ठिगनापन घटकर 24% पर आ गया है।

सबसे बड़े संकट

विश्व खाद्य दिवस पर शुक्रवार को जारी चैरिटी संस्था एक्शन अगेंस्ट हंगर की एक अलग रिपोर्ट में दुनिया के दस सबसे बड़े खाद्य संकटों की सूची दी गई। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान तीनों इसमें हैं। इन दस देशों में करीब 17.7 करोड़ लोग रहते हैं, और पिछले दस साल में गंभीर भूख दोगुनी होकर 47 देशों के 26.6 करोड़ लोगों तक पहुंच गई है। संस्था के मुताबिक अकेले पाकिस्तान में इस साल 1.06 करोड़ लोगों को मानवीय मदद की ज़रूरत होगी।