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होर्मुज़ से खाद ले जाने की योजना अटकी, संयुक्त राष्ट्र ने एशिया-अफ़्रीका में खाद्य संकट की चेतावनी दी

अवर महासचिव जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि ईरान और अमेरिका राज़ी हों तो खाद ढोने वाले जहाज़ों का संयुक्त राष्ट्र गलियारा 10 दिन में शुरू हो सकता है। वरना अगली बुआई ख़तरे में है।

संपादकीय डेस्क से · बैंकॉकप्रकाशित
संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा (फ़ाइल फ़ोटो)
संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Xavier Lejeune / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. संयुक्त राष्ट्र की योजना में रोज़ क़रीब पांच जहाज़ होर्मुज़ से खाद ले जा सकेंगे।
  2. युद्ध से पहले दुनिया के यूरिया शिपमेंट का लगभग एक-तिहाई इसी जलडमरूमध्य से गुज़रता था।
  3. आयात पर निर्भर दक्षिण एशिया के किसान पहले से बढ़ी लागत और किल्लत झेल रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान और अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य से खाद ले जाने की संयुक्त राष्ट्र समर्थित योजना पर जल्द सहमत नहीं हुए, तो एशिया और अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में खाद्य संकट खड़ा हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने बुधवार को कहा कि बुआई का मौसम क़रीब है और ऐसे में दोनों पक्षों का कुछ हफ़्तों के भीतर सहमत होना “बेहद ज़रूरी” है। बैंकॉक में आईएमएफ़ और विश्व बैंक की बैठकों से इतर उन्होंने कहा, “अगर हम वह बुआई का मौसम चूक गए, तो खेती की उत्पादकता काफ़ी गिर जाएगी।”

मार्च में तैयार की गई इस योजना के तहत ओमान में संयुक्त राष्ट्र कर्मियों वाला एक समन्वय केंद्र बनेगा, जो जहाज़ों का पंजीकरण करेगा और उनकी आवाजाही पर नज़र रखेगा। संयुक्त राष्ट्र के निगरानीकर्ता खाड़ी के बंदरगाहों पर स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर लदान के समय माल की जांच करेंगे, और जलडमरूमध्य से गुज़रते जहाज़ों को ट्रैक किया जाएगा। किसी देश को आपत्ति हो तो अतिरिक्त जांच भी हो सकेगी। मोरेरा दा सिल्वा ने कहा कि समझौता होने के सात से 10 दिन में यह व्यवस्था शुरू हो सकती है, और रोज़ क़रीब पांच जहाज़ों की आवाजाही ज़रूरतमंद देशों तक खाद पहुंचाते रहने के लिए काफ़ी होगी।

उन्होंने यह नहीं बताया कि तेहरान और वॉशिंगटन अब तक राज़ी क्यों नहीं हुए। दोनों के बीच व्यापक बातचीत ईरान की शर्तों और अमेरिका के इस आग्रह पर अटकी है कि पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बात हो। उन्होंने कहा, “हमें काम करने दीजिए, हमें अपना काम करने दीजिए,” और दलील दी कि यह गलियारा उन वार्ताओं के साथ-साथ चल सकता है।

युद्ध से पहले दुनिया के लगभग एक-तिहाई यूरिया, जो सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली नाइट्रोजन खाद है, और समुद्र के रास्ते जाने वाले लगभग आधे सल्फ़र की आवाजाही होर्मुज़ से होती थी। दक्षिण एशिया में, जहां ज़्यादातर किसान आयातित खाद पर निर्भर हैं, लागत पहले ही आसमान छू रही है और आपूर्ति कम पड़ रही है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने मई में चेताया था कि यह किल्लत 2026 के आख़िर से 2027 तक खाद्य आपूर्ति पर दबाव डाल सकती है।