दुनियापश्चिम एशिया
होर्मुज खोलने पर अमेरिकी जवाब नाकाफ़ी: ईरान, खाड़ी के डेटा सेंटरों को चेतावनी
ईरान के सुरक्षा प्रमुख ने कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान की सात में से कुछ ही शर्तें मानी हैं। हूती मिसाइलों ने फिर रियाद हवाई अड्डे को निशाना बनाया, और टैंकरों पर हमले जारी रहे।

मुख्य बातें
- मोहसिन रेज़ाई ने कहा कि ईरान की सात शर्तों पर अमेरिका का जवाब "नाकाफ़ी" है और शर्तें पूरी होने तक बातचीत नहीं होगी।
- उन्होंने चेताया कि भारी लड़ाई फिर शुरू हुई तो इलाके में केबल, डेटा सेंटर और एआई ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं।
- रियाद हवाई अड्डे पर हूतियों के ताज़ा हमले में एक पाकिस्तानी की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की अपनी शर्तों पर अमेरिका के ताज़ा जवाब को ठुकरा दिया है। उसका कहना है कि वॉशिंगटन आधे रास्ते तक ही आया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने रविवार को कहा कि अमेरिकी जवाब “नाकाफ़ी” है और जब तक तेहरान की सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, कोई बातचीत शुरू नहीं होगी।
ईरान ने करीब दो हफ़्ते पहले पाकिस्तान, क़तर और इराक़ के ज़रिए वॉशिंगटन को सात शर्तें भेजी थीं। अमेरिका ने क़तर के मध्यस्थों के ज़रिए जवाब दिया। रेज़ाई ने सरकारी मीडिया से कहा कि अमेरिकियों ने “हमारी कुछ शर्तें मान ली हैं, जबकि बाकी अभी साफ़ नहीं हैं”, और ईरान “अब अमेरिकियों को जवाब देने की प्रक्रिया में नहीं है”। उन्होंने कहा कि इन शर्तों के बिना “न उनके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा, न कोई बातचीत होगी।”
दोनों में से किसी पक्ष ने शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं। व्हाइट हाउस ने फ़ौरन कोई टिप्पणी नहीं की।
खाड़ी को चेतावनी
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व कमांडर रेज़ाई ने संभावित निशानों की सूची भी लंबी कर दी। उन्होंने कहा कि अगर भीषण लड़ाई फिर शुरू हुई, तो “इलाके में केबल, डेटा सेंटर, एआई ठिकाने और दूसरी जगहें” निशाने पर आ सकती हैं।
गार्ड्स की नौसेना ने अलग से चेतावनी दी कि जलडमरूमध्य में जो भी जहाज़ अपना नेविगेशन और पहचान सिस्टम बंद करेगा, उसे “दुश्मन माना जाएगा”। ईरान का पिछला प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद होर्मुज से गुज़रने वाले जहाज़ों पर हमले बढ़े हैं, और रविवार को भी एक हमले की खबर आई। उसी दिन ओमान के सोहार के पास एक टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ; उसके दो भारतीय चालक दल सदस्य अब भी लापता हैं।
बातचीत कैसे अटकी
युद्ध 28 फ़रवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों से शुरू हुआ था। तब से ईरान ने जहाज़ों पर हमले करके और बारूदी सुरंगें बिछाकर इस जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर रखा है। आम तौर पर दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) यहीं से गुज़रता है। जुलाई से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है।
जून में हुआ एक समझौता ज्ञापन कुछ ही दिनों में टूट गया, और 8 जुलाई को अमेरिका ने फिर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए। पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान ने पेशकश की थी कि शर्तें मानी जाएं तो वह सात दिनों में जलडमरूमध्य खोल देगा। वॉशिंगटन ने यह योजना ठुकरा दी। उसने ईरान और ओमान के मिलकर इस जलमार्ग का प्रबंधन करने का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाज़ों को बेरोकटोक गुज़रने का हक है।
रेज़ाई ने कहा कि ईरान बातचीत के पुराने ढर्रे पर नहीं लौटेगा। उन्होंने उन तीन पिछले दौरों का हवाला दिया जो अमेरिकी हमलों के साथ खत्म हुए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा, और नाकेबंदी “पूरी तरह लागू रहेगी”।
रियाद पर फिर हमला
युद्ध का दूसरा मोर्चा भी सुलगता रहा। रविवार को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक प्रोजेक्टाइल गिरा, उसी यात्री टर्मिनल पर जहां शनिवार को 12 लोग मारे गए थे। सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बताया कि एक पाकिस्तानी निवासी की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। यमन के ईरान समर्थित हूतियों ने दोनों हमलों की ज़िम्मेदारी ली है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी हवाई क्षेत्र में उड़ानों को लेकर “सभी से हमारी चेतावनियों को गंभीरता से लेने” को कहा। सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये ने एक संयुक्त बयान में इन हमलों को “अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन” बताया। शनिवार को जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका हूतियों पर सऊदी हमलों में शामिल होगा, तो उन्होंने कहा, “हो सकता है। हम इस पर विचार करेंगे।”
मूल दस्तावेज़
- Security chief: US response to Iran's 7 conditions 'insufficient'IRNA, 11 अक्टूबर 2026