दुनियादक्षिण-पूर्व एशिया
एमएससीआई के दर्जा घटाने के प्रस्ताव से इंडोनेशिया के शेयर बाज़ार में 1998 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट
जकार्ता कंपोज़िट 11% से ज़्यादा टूटा और आधे घंटे कारोबार रोकना पड़ा। सूचकांक कंपनी एमएससीआई ने इंडोनेशिया को उभरते बाज़ारों के समूह से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है।

मुख्य बातें
- शुक्रवार को जकार्ता कंपोज़िट 11% से ज़्यादा गिरा, जो जनवरी 1998 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।
- एमएससीआई ने इंडोनेशिया को उभरते बाज़ार से हटाकर स्टैंडअलोन दर्जे में डालने का प्रस्ताव रखा।
- यूबीएस के अनुमान के मुताबिक दर्जा घटा तो करीब 1,900 करोड़ डॉलर बाहर जा सकते हैं।
इंडोनेशिया के शेयर बाज़ार ने शुक्रवार को पच्चीस साल से भी ज़्यादा समय का सबसे बुरा दिन देखा। वैश्विक सूचकांक कंपनी एमएससीआई ने देश को अपने उभरते बाज़ारों के समूह से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है।
जकार्ता कंपोज़िट इंडेक्स 11% से ज़्यादा गिरा, जो जनवरी 1998 के बाद एक दिन की सबसे तेज़ गिरावट है। बाज़ार खुलने के कुछ ही देर बाद सूचकांक 8% टूटा तो इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज पर 30 मिनट के लिए कारोबार रोक दिया गया। डॉलर के मुकाबले रुपिया रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर फिसला।
इस गिरावट के बाद सूचकांक इस साल करीब 40% नीचे है। यह इस क्षेत्र के किसी भी बाज़ार का सबसे खराब प्रदर्शन है और सूचकांक छह साल के सबसे निचले स्तर पर है। यह सब उस दिन हुआ जब ज़्यादातर एशियाई बाज़ार संभल रहे थे। हफ्ते की शुरुआत में बिके टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेशक लौटे और एमएससीआई एशिया पैसिफिक सूचकांक 1.1% चढ़ा।
एमएससीआई क्या करना चाहता है
एमएससीआई ने गुरुवार को कहा कि वह इंडोनेशिया को इमर्जिंग मार्केट से स्टैंडअलोन मार्केट दर्जे में ले जाने पर निवेशकों से राय लेगा। उसने कहा कि जकार्ता के घोषित सुधारों से “बाज़ार के संचालन और नियमों के पालन में ठोस सुधार के पर्याप्त सबूत अभी नहीं मिले हैं।”
एमएससीआई की चिंता इस बात को लेकर है कि इंडोनेशियाई कंपनियों का असल मालिक कौन है, यह देखना कितना कठिन है, स्वामित्व कुछ हाथों में कितना सिमटा है, और कथित तौर पर मिलीभगत से होने वाला कारोबार। उसने कहा कि फ्रंटियर मार्केट श्रेणी में डालने से समस्या की गहराई नहीं झलकती, इसलिए उसने स्टैंडअलोन श्रेणी चुनी।
फैसला होने तक एमएससीआई इंडोनेशियाई शेयरों पर अपनी रोक जारी रखेगा। वह विदेशी समावेश अनुपात या शेयरों की गिनती नहीं बढ़ाएगा, अपने इंडोनेशिया सूचकांक में नई कंपनियां नहीं जोड़ेगा और शेयरों को ऊपरी श्रेणी में नहीं ले जाएगा। इंडोनेशिया के अपने ‘हाई शेयरहोल्डिंग कंसन्ट्रेशन’ नियमों के तहत चिह्नित शेयरों को हटाना भी जारी रहेगा।
निवेशक 30 अप्रैल 2027 तक राय दे सकते हैं और एमएससीआई 30 जून 2027 तक अंतिम फैसला देने की उम्मीद करता है। उसने कहा कि जब तक राय-मशविरे में असली सुधार के साफ सबूत न मिलें, वह इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ेगा।
कितनी कीमत चुकानी पड़ सकती है
दर्जा घटा तो एमएससीआई के उभरते बाज़ार सूचकांकों पर चलने वाले इंडेक्स फंडों को इंडोनेशियाई शेयर बेचने पड़ेंगे। यूबीएस का अनुमान है कि पैसिव फंड करीब 400 करोड़ डॉलर निकाल सकते हैं और सक्रिय रूप से संभाले जाने वाले पोर्टफोलियो करीब 1,500 करोड़ डॉलर का निवेश घटा सकते हैं, यानी कुल करीब 1,900 करोड़ डॉलर। बैंक ने इसे एक संभावित स्थिति बताया है, पक्की बिकवाली का अनुमान नहीं।
मूडीज़ और फिच दोनों पहले ही नीति-निर्माण की विश्वसनीयता पर शक जताते हुए इंडोनेशिया की क्रेडिट रेटिंग का आउटलुक घटाकर नकारात्मक कर चुके हैं।
जकार्ता का जवाब
स्टॉक एक्सचेंज ने कहा कि प्रस्ताव अंतिम नहीं है। उसके मुख्य कार्यकारी जेफ्री हेंड्रिक ने एमएससीआई से स्पष्टीकरण मांगा है।
इंडोनेशियाई अधिकारियों ने पिछले महीनों में कई सुधारों का ऐलान किया है। इनमें किसी कंपनी में 1% से ज़्यादा हिस्सेदारी रखने वाले हर शेयरधारक का खुलासा, निवेशकों की श्रेणियों की ज़्यादा विस्तृत जानकारी, हाई शेयरहोल्डिंग कंसन्ट्रेशन ढांचे के तहत रिपोर्टिंग और न्यूनतम 15% फ्री फ्लोट की ओर एक रोडमैप शामिल है।
एमएससीआई ने जून की समीक्षा के बाद चेताया था कि अगर नवंबर 2026 की समीक्षा तक पर्याप्त प्रगति न हुई तो वह राय-मशविरा शुरू करने पर विचार करेगा। उसने कहा कि निवेशक चाहते हैं कि नियम लगातार लागू हों और उनके असर के सबूत दिखें।