दुनियापश्चिम एशिया
ईरान की संसद ने मेहरदाद अख़लाक़ी को रक्षा मंत्री चुना, होर्मुज़ में टैंकरों में आग
फरवरी में युद्ध के पहले दिन से खाली पड़ा पद अब भरा गया है। इसी बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि तेल से लदे दो टैंकर जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों से टकराए।

मुख्य बातें
- ईरान की संसद ने रविवार को मेहरदाद अख़लाक़ी को रक्षा मंत्री के रूप में मंज़ूरी दी।
- उनके पूर्ववर्ती फरवरी में अमेरिकी-इज़राइली हमलों के पहले ही दिन मारे गए थे।
- आईआरजीसी के मुताबिक लगभग 20 लाख बैरल तेल वाले दो-दो टैंकर होर्मुज़ में सुरंगों से टकराए।
ईरान की संसद ने रविवार को मेहरदाद अख़लाक़ी केताबची को देश का रक्षा मंत्री चुन लिया। यह पद फरवरी में युद्ध के पहले दिन अमेरिकी-इज़राइली हमलों में उनके पूर्ववर्ती के मारे जाने के बाद से खाली था।
सरकारी टेलीविज़न ने कहा, “इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के सदस्यों ने आज मेहरदाद अख़लाक़ी को विश्वास मत दिया।” राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इसी महीने उनका नाम आगे बढ़ाया था, यानी युद्ध शुरू करने वाले हमलों के करीब आठ महीने बाद।
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब युद्ध का केंद्र साफ़ तौर पर समुद्र की ओर खिसक गया है।
जलडमरूमध्य में सुरंगें और आग
कुछ घंटे पहले ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहे दो टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक बारूदी सुरंगों से टकरा गए। गार्ड्स के मुताबिक पहले धमाके से “भीषण आग” लगी, और सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने कहा कि दूसरा जहाज़ “भारी लपटों” में घिर गया।
इरना ने कहा कि दोनों जहाज़ों ने अपने पोज़िशनिंग और रडार सिस्टम बंद कर दिए थे और ऐसे रास्ते से गुज़रने की कोशिश की जिसकी ईरान ने अनुमति नहीं दी थी। गार्ड्स का दावा है कि एक टैंकर “अमेरिकी मदद से” पार करने की कोशिश कर रहा था, जबकि दूसरा बीच में ही ठप हो गया। जहाज़ों के नाम, उनके झंडे और माल का स्रोत नहीं बताया गया।
गार्ड्स के नौसेना कमांडर रियर एडमिरल अली अज़माई ने इसी हफ्ते चेतावनी दी थी कि नेविगेशन सिस्टम बंद करने वाले किसी भी जहाज़ को “शत्रु” माना जाएगा।
परेशानी सिर्फ होर्मुज़ तक सीमित नहीं रही। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने बताया कि जलडमरूमध्य के पास एक टगबोट पर दो प्रोजेक्टाइल गिरे, और यमन के तट के पास बंदूकधारियों ने एक एलएनजी टैंकर पर गोलियां चलाईं।
घुटती हुई जीवनरेखा
युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कर लिया और अब जहाज़ों से गुज़रने से पहले अनुमति मांगता है। जवाब में अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात की नौसैनिक नाकाबंदी कर रखी है। पिछले दो हफ्तों में जहाज़ों पर हमले तेज़ हुए हैं: पिछले रविवार को जलडमरूमध्य में या उसके आसपास छह जहाज़ों पर हमला हुआ, जो युद्ध शुरू होने के बाद एक दिन में सबसे ज़्यादा है।
तेल की आवाजाही पर असर साफ़ है। विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार 8 अक्टूबर को लगभग 2.08 करोड़ बैरल तेल जलडमरूमध्य से गुज़रा था। 11 अक्टूबर तक यह घटकर 29 लाख बैरल रह गया। युद्ध से पहले दुनिया की कुल तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से जाता था।
भारत अपना ज़्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और इस रास्ते के कई जहाज़ों पर भारतीय नाविक काम करते हैं। हर नया हमला भाड़े की लागत और चालक दल के जोखिम दोनों बढ़ाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद युद्ध खत्म करने का समझौता होने की उम्मीद है। इस हफ्ते ज़मीनी सैनिक भेजने के सवाल पर उन्होंने कहा, “नहीं, मुझे ऐसा नहीं दिखता, मुझे नहीं दिखता।”