दुनियापश्चिम एशिया
ईरान का दावा, होर्मुज़ में सुपरटैंकर बारूदी सुरंग से टकराया; सऊदी तट के पास एक और टैंकर पर हमला
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि बीस लाख बैरल से ज़्यादा कच्चा तेल ले जा रहे जहाज़ में आग लग गई, और दोहराया कि जलडमरूमध्य बंद है। जुबैल के पास एक टैंकर पर रॉकेट से दागा गया ग्रेनेड लगा।

मुख्य बातें
- आईआरजीसी के मुताबिक बीस लाख बैरल से ज़्यादा कच्चा तेल ले जा रहा सुपरटैंकर बारूदी सुरंग से टकराया और उसमें आग लग गई।
- सऊदी अरब के जुबैल के पास एक छोटी नाव से दागा गया रॉकेट-चालित ग्रेनेड एक टैंकर पर लगा।
- जहाजरानी मंत्री ने कहा कि शुक्रवार को होर्मुज़ में निशाना बने टैंकर पर सवार 15 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने शनिवार को कहा कि बीस लाख बैरल से ज़्यादा कच्चा तेल ले जा रहा एक सुपरटैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग से टकराया और उसमें आग लग गई। गार्ड्स ने फिर चेतावनी दी कि तेहरान के नियम न मानने वाले जहाज़ों के लिए यह समुद्री रास्ता बंद है।
गार्ड्स के मुताबिक टैंकर उस रास्ते से “गैरकानूनी तरीके से” निकलने की कोशिश कर रहा था, जिसकी इजाज़त नहीं दी गई थी। बयान में कहा गया कि जहाज़ “सुरंग से टकराया, जिससे विस्फोट हुआ और भीषण आग लग गई।” बयान में न जहाज़ का नाम बताया गया, न उसका झंडा, न यह कि जलडमरूमध्य में कहां हमला हुआ। चालक दल के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई। ईरान के सरकारी मीडिया ने आग का वीडियो जारी किया।
इससे कुछ घंटे पहले खाड़ी के भीतर सऊदी तट के पास एक टैंकर पर हमला हुआ। ब्रिटेन के मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस केंद्र (यूकेएमटीओ) ने बताया कि शनिवार को भारतीय समय के अनुसार रात 12:52 बजे जुबैल से करीब 78 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक छोटी नाव से दागा गया रॉकेट-चालित ग्रेनेड जहाज़ के पिछले बाएं हिस्से पर लगा।
भारतीय नाविक सुरक्षित
शुक्रवार देर रात जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि उसी दिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक प्रोजेक्टाइल की चपेट में आए कच्चे तेल के टैंकर पर सवार 15 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। जहाज़ का नाम नहीं बताया गया।
हमलों का एक हफ्ता
यूकेएमटीओ के मुताबिक 16 अक्टूबर तक के हफ्ते में कम से कम 12 जहाज़ों पर हमले हुए। केंद्र ने कहा कि उसे “हमलों की असली संख्या सही-सही बताने में मुश्किल हो रही है”, क्योंकि ज़्यादातर जहाज़ अब उसे सूचना नहीं देते। इन 12 में से छह बंदरगाह पहुंच गए या आगे बढ़ गए, एक डूब गया, दो नाकाम हो गए और तीन क्षतिग्रस्त हुए या उनकी स्थिति साफ नहीं है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इज़राइल युद्ध शुरू होने के बाद से किसी भी दौर की तुलना में अक्टूबर के पहले पखवाड़े में जहाज़ों पर सबसे ज़्यादा हमले हुए हैं।
ब्रेंट कच्चा तेल शुक्रवार को 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, मई के बाद पहली बार। जहाज़ों पर नज़र रखने वाली फर्म केप्लर के मुताबिक 13 अक्टूबर तक के सात दिनों में इस रास्ते से रोज़ औसतन 1.16 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुज़रा, जो युद्ध से पहले के 1.71 करोड़ बैरल के स्तर का करीब दो-तिहाई है।
नियंत्रण के दो दावे
दोनों पक्ष कहते हैं कि जलडमरूमध्य उनके नियंत्रण में है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने एक वीडियो संदेश में कहा, “होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिका और हमारे क्षेत्रीय साझेदारों का नियंत्रण है, ईरान का नहीं।” वॉशिंगटन का कहना है कि उसने रास्ते से सुरंगें साफ कर दी हैं और जहाज़ों पर सुरंगों से नहीं, प्रोजेक्टाइल से हमले हो रहे हैं। गार्ड्स का कहना है कि जो जहाज़ युद्ध के दौरान बनाए गए उनके पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी से तालमेल नहीं करता, उसके लिए यह रास्ता सुरक्षित नहीं है।
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री माजिद इब्न रज़ा ने शनिवार को कहा कि युद्ध का अंत अमेरिकी बम नहीं, ईरानी मिसाइलें तय करेंगी। वॉशिंगटन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आपके बम कहीं और फटेंगे: आपकी वैश्विक साख में, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में और आपके चुनावी हिसाब-किताब में भी!” शुक्रवार रात सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने दावा किया कि अमेरिकी युद्धपोतों को ईरान के तट से 500 किलोमीटर से ज़्यादा दूर रहने पर मजबूर होना पड़ा है।
पाकिस्तान और क़तर अब भी दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचा रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई बड़ी सफलता नज़र नहीं आ रही।