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माल ढुलाई सस्ती करने के लिए शैडो फ्लीट टैंकरों पर प्रतिबंधों में ढील पर विचार कर रहा ट्रंप प्रशासन

इस योजना से प्रतिबंधित जहाज़ ऐसा तेल ढो सकेंगे जिस पर खुद अमेरिकी प्रतिबंध नहीं है। मध्यावधि चुनाव से पहले रिकॉर्ड शिपिंग दरें और ईंधन की कीमतें रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता बनी हुई हैं।

संपादकीय डेस्क से · वॉशिंगटनप्रकाशित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Daniel Torok / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. वॉशिंगटन प्रतिबंधित 'शैडो फ्लीट' टैंकरों को वैध तेल ढोने देने पर विचार कर रहा है।
  2. ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि ढील से ऊंची माल ढुलाई दरें घटेंगी।
  3. योजना के तहत रूसी और ईरानी तेल पर प्रतिबंध बने रहेंगे।

ट्रंप प्रशासन कथित तौर पर “शैडो फ्लीट”, यानी रूस, ईरान और वेनेज़ुएला का तेल और ईंधन ढोते रहे जहाज़ों, पर प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है, ताकि दुनिया भर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची माल ढुलाई दरें नीचे आएं।

एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक यह चर्चा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूसी डीज़ल पर प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने के कुछ दिन बाद शुरू हुई। इसका केंद्र पहले से प्रतिबंधित जहाज़ों को “वैध तेल” ढोने देना है, यानी ऐसा माल जिस पर खुद अमेरिकी प्रतिबंध नहीं है। रूसी और ईरानी तेल पर रोक बनी रहेगी, और मकसद खाड़ी से ज़्यादा कच्चा तेल और ईंधन बाहर निकालना है। इन जहाज़ों का इस्तेमाल करने की इच्छुक कंपनियों को ट्रेज़री विभाग में आवेदन करना होगा।

ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने रियाद में वर्ल्ड पेट्रोलियम कांग्रेस को वीडियो संबोधन में यह तर्क रखा कि प्रतिबंधों में ढील से माल ढुलाई दरें घटेंगी, जिनकी वजह से अमेरिकी तेल की मांग कमज़ोर पड़ी है। ऊर्जा विभाग का कहना है कि इससे रूस को अपना तेल भेजने में कोई मदद नहीं मिलेगी।

3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले ईंधन की ऊंची कीमतें ट्रंप के लिए राजनीतिक चिंता हैं, जब रिपब्लिकन कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश में हैं।

शिपिंग उद्योग के लोगों को संदेह है। उनका कहना है कि ज़्यादातर प्रतिबंधित टैंकर पुराने और खस्ताहाल हैं, इसलिए क्षमता जल्दी नहीं बढ़ेगी, और बीमा कंपनियों को अब भी ईयू और ब्रिटेन के नियम मानने पड़ते हैं, जिससे दरों में बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम है।

नई दिल्ली वॉशिंगटन के तेल से जुड़े कदमों पर करीबी नज़र रखे हुए है। बुधवार को अमेरिका-रूस डीज़ल सौदे पर पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने व्यावसायिक इंतज़ामों पर टिप्पणी से इनकार किया, लेकिन कहा, “हमने हमेशा वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में स्थिरता की वकालत की है।”