LokVox

दुनियापश्चिम एशिया

ईरान ने पाकिस्तान के आसिम मुनीर से कहा, शर्तें माने बिना अमेरिका से बात नहीं

युद्ध शुरू होने के बाद पांचवीं बार तेहरान पहुंचे पाकिस्तानी सेना प्रमुख को ईरानी नेताओं ने साफ कहा कि पहले वॉशिंगटन को सात शर्तें पूरी करनी होंगी।

संपादकीय डेस्क से · तेहरानप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मंगलवार को तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और दूसरे शीर्ष नेताओं से मुलाकात की।
  2. स्पीकर मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ ने कहा कि भरोसा लौटाने के लिए अमेरिका को सात शर्तें माननी होंगी।
  3. सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने कहा कि संवर्धित परमाणु सामग्री ईरान में ही रहेगी।

ईरान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से कहा है कि जब तक वॉशिंगटन उसकी मांगें पूरी नहीं करता, वह अमेरिका के साथ बातचीत की मेज़ पर नहीं बैठेगा। यह सख्त रुख ऐसे समय आया है जब इस्लामाबाद लड़ाई के नए दौर को टालने की कोशिश में लगा है।

मुनीर, जो पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज़ भी हैं, मंगलवार शाम गृह मंत्री मोहसिन नक़वी के साथ तेहरान पहुंचे। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमले के बाद यह उनकी पांचवीं ईरान यात्रा थी। पिछली बार वे सितंबर में आए थे।

ईरानी नेताओं ने क्या कहा

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक मुनीर ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से मुलाकात की, जिन्होंने उनसे पाकिस्तान की मध्यस्थता और क्षेत्र के हालात पर चर्चा की। मुनीर ने संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ से भी मुलाकात की, जिन्होंने अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई अमेरिका से बातचीत में ईरान की अगुवाई की थी। वे सुरक्षा प्रमुख मेजर जनरल मोहसिन रेज़ाई से भी मिले।

ग़ालिबाफ़ ने मुनीर से कहा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के अमेरिकी उल्लंघनों और बार-बार की धमकियों ने ईरान का भरोसा और कम किया है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन तब तक यह भरोसा वापस नहीं पा सकता, जब तक वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए पिछले महीने न्यूयॉर्क में रखी गई तेहरान की सात शर्तें पूरी नहीं करता।

रेज़ाई ने कहा कि ईरान की सारी संवर्धित परमाणु सामग्री राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देश में ही रहेगी। उन्होंने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा ख़ामेनेई के इस रुख को दोहराया कि हथियार-स्तर के करीब का यूरेनियम विदेश नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका ईरान की शर्तें पूरी करके भरोसा नहीं बनाता, कोई बातचीत नहीं होगी।

ईरान की मांगों में उसके बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना, सभी क्षेत्रीय मोर्चों पर लड़ाई रोकना और संवर्धित सामग्री को ईरान में ही रखना शामिल है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि मुनीर की यात्रा का मुख्य मकसद “द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग को मज़बूत करना” है। मुनीर के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मिलने की उम्मीद थी।

बातचीत में पाकिस्तान की जगह

युद्ध शुरू होने के बाद से पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ रहा है। उसकी कोशिशों से 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ और जून में 14 बिंदुओं वाला समझौता ज्ञापन बना, जिसके तहत अमेरिका को नाकेबंदी हटानी थी, होर्मुज़ खुलना था और ईरान की ज़ब्त संपत्तियां चरणों में जारी होनी थीं। यह समझौता अगस्त के मध्य में खत्म हो गया और तब से ईरान ने जलडमरूमध्य बंद रखा है। उसका कहना है कि अमेरिका ने अपना वादा पूरा नहीं किया।

वॉशिंगटन का रुख अब भी काफी अलग है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि करीब आठ महीने पुराने युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता में “सार्थक” कटौती करनी होगी।

तेहरान का व्यस्त हफ्ता

मुनीर की यात्रा सोमवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के तेहरान दौरे के ठीक बाद हुई। इसी दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मिलने अचानक इज़राइल पहुंचे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा, हालांकि नौसैनिक नाकेबंदी जारी है। इज़राइल में 27 अक्टूबर को मतदान है। मंगलवार देर रात तक पाकिस्तान ने मुनीर की बैठकों के नतीजों पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।