दुनियादक्षिण एशिया
नेपाल के वित्त मंत्री बोले 'भारत-विरोधी राष्ट्रवाद' का दौर खत्म, कमल थापा ने जताई आपत्ति
स्वर्णिम वाग्ले ने नई दिल्ली में एक सम्मेलन में कहा कि भारत-विरोध से परिभाषित राष्ट्रवाद का दौर बीत चुका है। पूर्व विदेश मंत्री का कहना है कि यह नेपाली भावना को कम आंकना है और सरकार सफाई दे।

मुख्य बातें
- वाग्ले ने नई दिल्ली में कहा कि भारत-विरोधी भावना से जुड़ा राष्ट्रवाद अब खत्म हो चुका है।
- पूर्व विदेश मंत्री कमल थापा ने कहा कि यह टिप्पणी नेपाली राष्ट्रीय भावना को कम आंकती है।
- वाग्ले के मुताबिक प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 2026 के अंत तक भारत आ सकते हैं।
नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री कमल थापा ने वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले की नई दिल्ली में की गई इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है कि नेपाल में “भारत-विरोधी राष्ट्रवाद” का दौर खत्म हो गया है, और सरकार से इस पर सफाई मांगी है।
वाग्ले शुक्रवार को भारत की राजधानी में “ए वर्ल्ड बिटवीन ऑर्डर्स” विषय पर हुए एक सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, “एक समय था जब नेपाल में राष्ट्रवाद को भारत-विरोधी भावना से जोड़ा जाता था। लेकिन वह दौर अब खत्म हो चुका है।”
उन्होंने दोनों पड़ोसियों के रिश्तों को गहरा बताया। उन्होंने कहा, “भारत और नेपाल के रिश्ते बहुत गहरे हैं। कभी-कभार दिक्कतें आती हैं, लेकिन हम मजबूती से जुड़े हुए हैं।” उन्होंने जोड़ा, “औपचारिक बातचीत और आधिकारिक संवाद में भारत ने लगातार मदद के लिए तत्परता दिखाई है।”
“वफादारी, दुश्मनी नहीं”
थापा ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि यह टिप्पणी नेपाली राष्ट्रीय भावना को कम आंकती है। उनका तर्क था कि राष्ट्रवाद किसी देश के विरोध पर निर्भर नहीं करता, लेकिन देश की सीमाओं की रक्षा करना और नाकेबंदी का विरोध करना वफादारी है, दुश्मनी नहीं। उन्होंने सरकार से अपना रुख साफ करने को कहा।
यह बयान नेपाली राजनीति की एक दुखती रग को छूता है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन व्यापार, पारगमन, सीमा और संप्रभुता के सवालों पर दोनों के रिश्तों में समय-समय पर तनाव आता रहा है।
यात्रा की तैयारी
वाग्ले ने कहा कि नई सरकार रिश्तों को नए स्तर पर ले जाना चाहती है, और संकेत दिया कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह इस साल के अंत तक भारत आ सकते हैं। कोई तारीख तय नहीं हुई है, हालांकि शुरुआती तैयारी शुरू हो चुकी है।
उन्होंने 2015 के भूकंप और अगस्त की बाढ़ के बाद भारत की मदद को याद किया और कहा कि बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाह को फोन कर नेपाल को जो भी मदद चाहिए, उसकी पेशकश की थी। थापा की आपत्ति पर सरकार की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।