दुनियारूस-यूक्रेन
ट्रंप बोले, समझौता ज़ेलेंस्की को 'चाहना होगा'; लावरोव का दावा, शांति से खत्म होगा उनका शासन
मंगलवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन के लोग अब यह युद्ध ज़्यादा दिन 'बर्दाश्त' नहीं करेंगे। रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि कीव बार-बार बातचीत बिगाड़ता है। विटकॉफ आज रूस पहुंचने वाले हैं।
मुख्य बातें
- ट्रंप ने कहा कि ज़ेलेंस्की को यह युद्ध खत्म करना चाहना होगा, वरना यह 'बहुत बुरी बात' होगी।
- सर्गेई लावरोव ने दावा किया कि अमेरिका-रूस का कोई भी समझौता ज़ेलेंस्की के 'शासन' का अंत होगा।
- अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ शांति वार्ता आगे बढ़ाने बुधवार को रूस जाने वाले हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की पर दबाव और बढ़ा दिया। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से उन्होंने कहा कि यूक्रेनी राष्ट्रपति को युद्ध खत्म करना चाहना होगा, वरना नतीजे भुगतने होंगे। कुछ ही घंटे पहले रूस के विदेश मंत्री ने दावा किया था कि शांति की कीमत ज़ेलेंस्की को अपनी कुर्सी से चुकानी पड़ेगी।
ट्रंप ने कहा, “ज़ेलेंस्की को यह युद्ध खत्म करना चाहना होगा, और अगर वे ऐसा नहीं चाहते, तो मुझे लगता है कि यह बहुत बुरी बात होगी।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें समझौता करना चाहना होगा, क्योंकि मुझे नहीं लगता कि उनके लोग इसे अब और बर्दाश्त करेंगे।”
ट्रंप ने फिर दोहराया कि फरवरी 2025 में ओवल ऑफिस की तीखी मुलाकात में ज़ेलेंस्की को “बेहतर समझौता” मिल सकता था। ज़ेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन की आमने-सामने मुलाकात के सवाल पर उन्होंने दोनों नेताओं के बीच “ज़बरदस्त” नफरत की बात की, फिर जोड़ा: “यह कैसे होता है, मुझे परवाह नहीं।”
पहले ओस्लो, फिर मॉस्को
ये टिप्पणियां ऐसे समय आईं जब ज़ेलेंस्की ओस्लो में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और यूरोपीय नेताओं से बातचीत पूरी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के पास “शांति तक पहुंचने के कुछ स्पष्ट विचार” हैं, पर ब्योरा नहीं दिया। वे चाहते हैं कि वॉशिंगटन ये विचार मॉस्को तक ले जाए। उन्होंने फिर से तीनों देशों के नेताओं की बैठक का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “देखते हैं पुतिन क्या कहते हैं।”
ज़ेलेंस्की के मुताबिक विटकॉफ बुधवार को रूस जाएंगे, जहां बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है। यानी आज पता चलेगा कि ओस्लो के विचार क्रेमलिन में टिक पाते हैं या नहीं।
लावरोव का आरोप
मॉस्को में सर्गेई लावरोव ने यूक्रेनी नेता पर कूटनीति को पटरी से उतारने का आरोप लगाया। रूसी विदेश मंत्री ने पत्रकारों से कहा, “ज़ेलेंस्की बातचीत नहीं चाहते और कई बार इसे बिगाड़ चुके हैं।” उन्होंने कहा, “शायद इसलिए कि वे समझते हैं कि रूस और अमेरिका को स्वीकार्य कोई भी समझौता उनके शासन का, और खुद उनका, अंत होगा।”
लावरोव ने कोई सबूत नहीं दिया। उन्होंने मिन्स्क प्रक्रिया, 2022 की इस्तांबुल वार्ता और इस साल अबू धाबी की बैठकों का ज़िक्र किया और कहा कि इनमें से कोई भी रूस की वजह से खत्म नहीं हुई।
रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच इस साल की शुरुआत में त्रिपक्षीय वार्ता के तीन दौर हुए, दो अबू धाबी में (जनवरी और फरवरी) और एक जिनेवा में 17-18 फरवरी को। इनसे कैदियों की अदला-बदली तो हुई, पर युद्धविराम नहीं हुआ। उसके बाद से कोई त्रिपक्षीय बैठक नहीं हुई है।
मतभेद वही पुराने हैं। मॉस्को चाहता है कि कीव उसके कब्ज़े को मान्यता दे और उन इलाकों से हट जाए जिन पर रूस दावा करता है पर जिन पर उसका पूरा नियंत्रण नहीं है। यूक्रेन यह मांग ठुकराता है और कहता है कि कोई भी समझौता उसकी संप्रभुता की रक्षा करे और लागू हो सकने वाली सुरक्षा गारंटी दे।
तनाव भरी पृष्ठभूमि
ट्रंप की बातें ऐसे रिश्ते पर आई हैं जो पहले से तनाव में है। यूक्रेनी अधिकारियों ने स्टारशील्ड की रफ्तार धीमी होने की शिकायत की है। यह स्पेसएक्स के स्टारलिंक नेटवर्क का सैन्य संस्करण है, जिस पर यूक्रेनी सेना संचार के लिए निर्भर है। एलन मस्क ने इसके लिए व्हाइट हाउस को ज़िम्मेदार ठहराया है; ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इनकार किया है कि सरकार ने कोई रोक लगवाई।
ट्रंप ने हाल में सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के तहत नए प्रतिबंधों से छूट भी दी है, जबकि इस कानून पर उन्होंने महीने भर पहले ही दस्तखत किए थे। उन्होंने रूसी डीज़ल खरीदने के एक सौदे की घोषणा भी की। इस हफ्ते भारत दौरे पर आए विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस छूट को “संतुलन साधने की कवायद” बताया है।
अब कीव इंतज़ार करेगा कि विटकॉफ रूस से क्या लेकर लौटते हैं।