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दंगों पर मैक्रों ने 'नाकामी' मानी, पर गृह मंत्री नुनेज़ का इस्तीफा ठुकराया

फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार पूर्वानुमान और खुफिया जानकारी में चूकी, और लॉरां नुनेज़ से पद पर बने रहकर लुटेरों से निपटने के नए तरीके खोजने को कहा। इस बीच उनकी कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई गई।

संपादकीय डेस्क से · पेरिसप्रकाशित
इमैनुएल मैक्रों और लॉरां नुनेज़ (फ़ाइल फ़ोटो)
इमैनुएल मैक्रों और लॉरां नुनेज़ (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Arno Mikkor, EU2017EE Estonian Presidency / Wikimedia Commons; Arthur Empereur / Wikimedia Commons, CC BY 2.0, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. हफ्ते के अंत में हुए दंगों और लूटपाट के बाद मैक्रों ने "पूर्वानुमान और खुफिया तंत्र में नाकामी" मानी।
  2. उन्होंने गृह मंत्री लॉरां नुनेज़ की इस्तीफे की पेशकश ठुकरा दी, ताकि पुलिस की कमान व्यवस्था बनी रहे।
  3. न्याय मंत्री के मुताबिक सप्ताहांत में 2,330 से ज़्यादा लोग हिरासत में लिए गए।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को माना कि फ्रांस में सप्ताहांत के दंगों से निपटने में “पूर्वानुमान और खुफिया तंत्र में नाकामी” हुई, लेकिन उन्होंने अपने गृह मंत्री लॉरां नुनेज़ को इस्तीफा देकर ज़िम्मेदारी लेने नहीं दी।

राष्ट्रपति कार्यालय एलिज़े ने कहा कि मैक्रों ने नुनेज़ की इस्तीफे की पेशकश इसलिए ठुकराई क्योंकि पुलिस और सुरक्षा बलों की कमान व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंत्री का पद पर रहना ज़रूरी है। मैक्रों ने उनसे लुटेरों से निपटने के नए तरीके तैयार करने और हिंसा के पीछे योजना व खुफिया स्तर की चूकों पर पारदर्शिता बरतने को कहा।

उनकी कैबिनेट की सोमवार सुबह पेरिस में आपात बैठक होनी थी। मैक्रों ने अशांति से प्रभावित कारोबारों की मदद का भी वादा किया है।

“नियंत्रण छूट गया”

नुनेज़ यह बात पहले ही मान चुके थे। उन्होंने स्वीकार किया कि शनिवार को पुलिस का “नियंत्रण छूट गया” और बलों की तैनाती में “पूर्वानुमान की कमी” रही। उन्होंने बताया कि उस दिन देश भर में करीब 60,000 पुलिसकर्मी और जेंडार्म तैनात थे, और उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की थी।

शनिवार के प्रदर्शनों में पांच लाख से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। ये स्कूलों की हालत को लेकर छात्रों के मार्च के रूप में शुरू हुए और महंगाई व सार्वजनिक सेवाओं को लेकर व्यापक आक्रोश में बदल गए। कई शहरों में लूटपाट और आगज़नी हुई, और नकाबपोश दंगाइयों ने टाउन हॉल, थानों और दूसरी सरकारी इमारतों पर हमले किए।

गृह मंत्रालय ने कहा कि अकेले शनिवार को 2,300 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार हुए और करीब 1,000 पुलिसकर्मी और जेंडार्म घायल हुए। प्रदर्शनकारी भी घायल हुए, जिनमें एक व्यक्ति का हाथ पुलिस के भीड़ नियंत्रण ग्रेनेड से उड़ गया।

दूसरी रात भी लूटपाट

शनिवार के बाद भी हालात नहीं सुधरे। रविवार को भी लूटपाट जारी रही, और पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने बताया कि राजधानी में करीब 30 दुकानों को निशाना बनाया गया। नुनेज़ ने कहा कि रविवार और रात भर में पेरिस में करीब 350 लोग गिरफ्तार किए गए।

न्याय मंत्री जेराल्ड दारमानां ने कहा कि सप्ताहांत में 2,330 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 70% वयस्क थे।

गुस्से की शुरुआत कहां से हुई

सप्ताहांत की हिंसा से पहले कई हफ्तों तक हाई स्कूल के छात्र भीड़ भरी कक्षाओं, शिक्षकों की कमी और शिक्षा में बरसों से कम निवेश के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। हाल की स्मृति में यह फ्रांस का सबसे बड़ा युवा आंदोलन है।

शनिवार रात मैक्रों ने इन दृश्यों पर “गुस्से और शर्म” की बात कही थी। सोमवार को सरकार की नाकामी मानना उनके रुख में बदलाव है, दंगाइयों की निंदा से आगे बढ़कर यह स्वीकार करना कि सरकार तैयार नहीं थी।

अब सवाल यह है कि क्या लुटेरों से निपटने की नई रणनीति के आदेश के साथ नुनेज़ को पद पर बनाए रखना उस आंदोलन को शांत करने के लिए काफी होगा, जिसकी स्कूलों और महंगाई से जुड़ी शिकायतें अब भी अनसुलझी हैं।