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फ्रांस में पंप सूखे, मैक्रों ने खाड़ी से डीज़ल का इंतज़ाम किया, अब क़तर रवाना
यूएई और बहरीन दोनों ने फ्रांस को हर महीने 1,00,000 टन डीज़ल भेजने का वादा किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ऊर्जा कंपनियों के प्रमुखों के साथ खाड़ी दौरे पर हैं।
मुख्य बातें
- यूएई और बहरीन ने फ्रांस को हर महीने 1,00,000 टन डीज़ल देने का वादा किया।
- दौरे के पहले दिन मैक्रों ने कुवैत के साथ आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अलग-अलग समय पर 20% तक फ्रांसीसी पेट्रोल पंप सूख चुके हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तीन दिन के खाड़ी दौरे में डीज़ल की नई आपूर्ति पक्की कर ली है। घर में ईंधन की किल्लत और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन उनकी सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
संयुक्त अरब अमीरात ने मंगलवार को फ्रांस को हर महीने 1,00,000 टन डीज़ल देने का वादा किया, जिसकी अवधि तय नहीं है। बहरीन ने भी, जहां मैक्रों दिन में बाद में सखीर एयर बेस पर उतरे, इतनी ही मात्रा पर सहमति दी। सऊदी अरब पहले से अक्टूबर और नवंबर में 95,000 टन डीज़ल हर महीने टोटलएनर्जीज़ के ज़रिए दे रहा है।
इन सौदों से खाड़ी देशों की फ्रांस के प्रति प्रतिबद्धता करीब 2,95,000 टन प्रति माह हो गई है, जो फ्रांस की खपत के दसवें हिस्से से थोड़ी ज़्यादा है। 1,00,000 टन डीज़ल लगभग 7,46,000 बैरल के बराबर है।
कुवैत, अबू धाबी, मनामा, दोहा
मैक्रों ने दौरे की शुरुआत कुवैत से की, जहां दोनों देशों ने रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निवेश जैसे क्षेत्रों में आठ समझौतों और सहयोग दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए। सोमवार को अबू धाबी में उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान से मुलाकात की और दोनों ने ऊर्जा, उन्नत तकनीक और एआई में सहयोग की बात दोहराई। क़तर उनका आखिरी पड़ाव है। टोटलएनर्जीज़ और एंजी के वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ हैं।
2025 में फ्रांस और यूएई के बीच व्यापार €10.8 अरब तक पहुंचा। उस साल यूएई के हथियार और रक्षा आयात में फ्रांस का हिस्सा 18% रहा, जो अमेरिका के 42% के बाद दूसरे नंबर पर था।
घर में दबाव
ईरान युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। संघर्ष शुरू होने के बाद अलग-अलग समय पर फ्रांस के 20% तक पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीज़ल खत्म हो चुका है। शनिवार को पूरे फ्रांस में 5 लाख से ज़्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया और बजट तथा महंगाई को लेकर हफ्तों से चल रही अशांति में 2,500 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार हुए हैं।
फ्रांस ने खाड़ी में अपनी सुरक्षा भूमिका भी बढ़ाई है। सितंबर के आखिर में मैक्रों ने कहा था कि फ्रांस लाल सागर पर सऊदी अरब के यानबू तेल टर्मिनल की हिफाज़त के लिए “सैनिक, रडार, रक्षा प्रणालियां” भेजेगा। बाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि “ऑपरेशनल तत्व” तैनात कर दिए गए हैं। विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने सोमवार को सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान से मुलाकात की।
किंग्स कॉलेज लंदन के एंड्रियास क्रीग ने कहा कि यह दौरा “एक कहीं बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत” है। उनके मुताबिक पेरिस के सामने बड़ी दुविधा यह है कि गहरी भागीदारी कहीं फ्रांस को सीधे संघर्ष में न खींच ले।
तेहरान के साथ रिश्ते पहले से तनाव में हैं। जुलाई में ईरान ने फ्रांसीसी दूतावास के दो कर्मचारियों को हिरासत में लेकर अवांछित व्यक्ति घोषित किया था, और अगस्त में फ्रांस ने दो ईरानी राजनयिकों को निकाल दिया।